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दस ऐसे योगासन जो मधुमेह पर लगाम लगाएं

By:Anubha Tripathi, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 18, 2014
डायबिटीज जैसे गंभीर रोग को कंट्रोल में रखने के लिए कुछ खास योगासन काफी मददगार साबित होते हैं। आइए जानें इन योगासनों के बारे में।
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    योग से डायबिटीज पर काबू पाएं

    नियमित योग एक तरफ जहां आपको स्वस्थ रखता है वहीं दूसरी तरफ गंभीर बीमारियों से भी निजात दिलाता है। अगर मधुमेह में नियमित कुछ खास तरह के योग किए जाएं तो मधुमेह को कंट्रोल कर सकते हैं। आइए जानें कुछ खास योगासनों के बारे में जो डायबिटीज को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

    योग से डायबिटीज पर काबू पाएं
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    प्राणायाम

    गहरी सांस लेना और छोड़ना रक्त संचार को दुरुस्त करता है।  इससे दिमाग शांत होता है और नर्वस सिस्टम को आराम मिलता है। फर्श पर चटाई बिछाकर पद्मासन की मुद्रा में पैर पर पैर चढ़ाकर बैठ जाएं। अब अपनी पीठ सीधी करें, अपने हाथ घुटनों पर ले जाएं, ध्यान रहे हथेली ऊपर की तरफ खुली हो, और अपनी आँखें बंद करें। गहरी सांस लें और पांच की गिनती तक सांस रोककर रखें। अब धीरे धीरे सांस छोड़ें। इस पूरी प्रक्रिया को कम से कम दस बार दोहराएं।

    प्राणायाम
  • 3

    सेतुबंधासन

    यह आसन न सिर्फ रक्तचाप को नियंत्रित रखता है बल्कि मानसिक शान्ति देता है और पाचनतंत्र को ठीक करता है। चटाई पर लेट जाएं।अब सांस छोड़ते हुए पैरों के बल ऊपर की ओर उठें। अपने शरीर को इस तरह उठाएं कि आपकी गर्दन और सर फर्श पर ही रहे और शरीर का बाकी हिस्सा हवा में।  सपोर्ट के लिए आप हाथों का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। अगर आप में लचीलापन है तो अतिरिक्त स्ट्रेचिंग के लिए आप अपनी अंगुलियों को ऊपर उठी पीठ के पीछे भी ले जा सकते हैं। अपने कम्फर्ट का ध्यान रखते हुए इस आसन को पूरा करें।

    सेतुबंधासन
  • 4

    बलासन

    बच्चों की मुद्रा के नाम से जाना जाने वाला यह आसन तनावमुक्ति का बहुत अहम साधन है। इससे तनाव और थकान से राहत मिलाती है। ये ज्यादा देर तक बैठे रहने से होने वाले लोअर बैक पेन में भी काफी मददगार साबित होता है। फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं। अब अपने पैर को सीधे करते हुए अपनी एड़ी पर बैठ जाएं। दोनों जांघों के बीच थोड़ी दूरी बनाएं। सांस छोड़ें और कमर से नीचे की और झुकें। अपने पेट को जाघों पर टिके रहने दें और पीठ को आगे की और स्ट्रेच करें। अब अपनी बांहों को सामने की तरफ ले जाएं ताकि पीठ में खिंचाव हो।  आप अपने माथे को फर्श पर टिका सकते हैं बशर्ते आपमें उतना लाचीलापन हो।  पर शरीर के साथ ज़बरदस्ती न करें।  वक्त के साथ आप ऐसा करने में कामयाब होंगे।

    बलासन
  • 5

    वज्रासन

    यह एक बेहद सामान्य आसन है जो मानसिक शान्ति देने के साथ पाचन तंत्र को ठीक रखता है। घुटने टेक कर बैठ जाएं और अपने पैर के ऊपरी सतह को चटाई के संपर्क में इस तरह रखें कि आपकी एड़ी ऊपर की तरफ हो।  अब आराम से अपनी पुष्टिका को एड़ी पर टिका दें।  यह ध्यान देना ज़रूरी है कि आपका गुदाद्वार आपकी दोनों एड़ी के ठीक बीच में हो।  अब अपनी दोनों हथेलियों को नीचे की और घ्तनों पर ले जाएं।  अपनी आँखें बंद करें और एक गति में गहरी साँस लें।

    वज्रासन
  • 6

    सर्वांगासन

    चटाई पर पैर फैलाकर लेट जाइए।  अब धीरे धीरे घुटनों को मोड़कर या सीधे ही पैरों को ऊपर उठाइए।  अब अपनी हथेली को अपनी पीठ और पुष्टिका पर रखकर इस आसन को सपोर्ट कीजिए।  अपने शरीर को इस तरह ऊपर उठाइए कि आपके पंजे छत की दिशा में इंगित हों।  समूचा भार आपके कंधों पर होना चाहिए।  सुनिश्चित करें कि आप धीरे-धीरे सांस ले रहे हैं और अपनी ठुड्डी को सीने पर टिका लें।  आपकी केहुनी फर्श पर टिकी होनी चाहिए और आपकी पीठ को हथेली का साथ मिला होना चाहिए।  इस आसन में तब तक रहें जब तक आप इसके साथ सहज हैं।  लेटने वाली मुद्रा में वापस आने के लिए धीरे-धीरे पैरों को नीचे लाएं, सीधा तेज़ी से नीचे न आएं।

    सर्वांगासन
  • 7

    हलासन

    फर्श पर चित होकर लेट जाएं।  अपनी बांहों को बगल में रखें और घुटनों को मोड़ लें ताकि आपका तलवा फर्श को छूए।  अब धीरे धीरे अपनी पुष्टिका से पैरों को उठाएं।  पैर उठाते वक्त अपने हाथों को पुष्टिका पर रखकर शरीर को सपोर्ट करें।  अब धीरे धीर अपने पैरों को पुष्टिका के पास से मोड़ें और सर के पीछे ले जाकर पंजों को फर्श तक ले जाने की कोशिश करें।  और हाथों को बिलकुल सीधा रखें ताकि वो फर्श के संपर्क में रहे।  ऊपर जाते हुए सांस छोड़ें।  लेटने वाली मुद्रा में वापस लौटने के लिए पैरों को वापस लाते हुए सांस लें।  एकदम से नीचे न आएं।

    हलासन
  • 8

    धनुरासन

    पेट के बल लेट जाएं और पैरों को पुष्टिका की दूरी के हिसाब से फैलाए रखें।  अपनी बांहों को शरीर के बगल में रखें।  घुटनों को मोड़ें और एड़ी को जस का तस रखें।  अन्दर सांस लेटे हुए सीने को ऊपर की और खींचें और पैरों को भी ऊपर करते हुए वापस अपनी तरफ लाएं।  सामने की और देखें और चहरे पर मुस्कराहट रखें।  आसन को यथासंभव स्थिर रखें और अपनी सांसों पर ध्यान केन्द्रित करें।  जब तक आप इस आसन में हैं तब तक लम्बी गहरी साँसें लेना जारी रखें।  ज़्यादा लम्बे समय तक ये आसन न करें।  15 -20 सैकेंड के बाद सांस छोड़ें और आराम से अपने पैर और छाती को फर्श पर लाएं।

    धनुरासन
  • 9

    चक्रासन

    यह आसन करने के लिए पीठ के बल लेट जाएं और दोनों हाथों को कन्धों की सीध में बाहर की ओर स्ट्रेच करें।  घुटनों को मोड़ें और पैरों को पुष्टिका के पास लाएं।  पैरों के तलवे पूरे तरह से ज़मीन पर होने चाहिए।  अपने घुटनों को तब तक बाईं ओर ले जाएं जब तक कि बायाँ घुटना ज़मीन को न छु दे।  इस दौरान दायाँ घुटना और जांघ बाएँ घुटने और जांघ पर टिके होने चाहिए।  इसके साथ साथ अपने सर को दाईं ओर घुमाएं और दाईं हथेली को देखें।  सुनिश्चित करें कि आपके कंधे ज़मीन को छु रहे हों।  चूंकि शरीर चक्रवत होता है, ऐसे में आपके कंधे ज़मीन से उठा सकते हैं ध्यान दें कि ऐसा न हो।  इसी प्रक्रिया को एक बार बाईं एक बार दाईं और करते रहें।  इस आसन में आपको बांह, गर्दन, पेट और पीठ में तनाव महसूस होगा।

    चक्रासन
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    पश्चिमोतासन

    पैरों को फर्श पर स्ट्रेच करके बैठा जाएं।  अपनी ऊँगली और अंगूठे से पैरों के अंगूठे को पकड़ें।  अब धीरे धीरे सांस छोड़ें और शरीर को आगे की तरफ  मोड़ते हुए कोशिश करें कि आपका माथा आपके घुटनों को छू रहा हो।  ध्यान रहे आपकी केहुनी फर्श के संपर्क में रहे।  पांच गिनने तक इसी स्थिति में रहें और बैठने वाली मुद्रा में वापस जाते हुए सांस अन्दर लें।

    पश्चिमोतासन
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    अर्ध मत्स्येन्द्रासन

    पैरों को सामने की तरफ फैलाकर बैठ जाएं, रीढ़ तनी हो और दोनों पैर एक-दूसरे से लगे हों।  अपने बाएं पैर को मोड़ें और उसकी एड़ी को पुष्टिका के दाएं हिस्से की और ले जाएं।  अब दाएं पैर को बाएँ पैर की ओर लाएं और बायां हाथ दाएं घुटनों पर और दायाँ हाथ पीछे ले जाएं।  कमर, कन्धों और गर्दन को इस क्रम में दाईं और मोड़ें।  लम्बी सांसे लें और छोड़ें।  शुरुआती मुद्रा में आने के लिए सांस छोड़ना जारी रखें , पहले पीछे स्थित दाएं हाथ को यथावत लाएं, फिर कमर सीधी करें, फिर छाती और अंत में गर्दन।  अब इसी प्रक्रिया को दूसरी दिशा में करें।

    अर्ध मत्स्येन्द्रासन
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