योगासन जो करें टिन्निटस और सुनने में दिक्कत का इलाज

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 14, 2014

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

भारत में 20 में से एक व्यक्ति सुनने की शक्ति से जुड़ी समस्या से पीड़ित है, ऐसे में कुछ विशेष योगासन लगों को कानों से संबंधित समस्याओं से निजात दिला सकते हैं।
  • 1

    टिन्निटस और सुनने में दिक्कत

    हम आवाज सुनकर ही अपने परिवेश से जुड़ते हैं, आवाज सुनकर ही स्थिति को समझते हैं और अपनी भावनाएं व्यक्त करते हैं। आवाज सुनने की यह क्षमता कम हो जाए तो इस स्थिति को हियरिंग लॉस कहते हैं। सुनने की क्षमता कम होने के अलावा भी कानों से संबंधित कई समस्याए होता हैं। भारत में 20 में से एक व्यक्ति सुनने की शक्ति से जुड़ी समस्या से पीड़ित है। हालांकि इन समस्याओं से सुरक्षित तरीके से निपटने के लिए योग एक बेहतरीन विकल्प है। चलिये जानें टिन्निटस और सुनने में दिक्कत के इलाज के लिए किये जाने वाले योग आसनों के बारे में।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 2

    क्या है टिन्निटस

    टिन्निटस एक प्रकार की कानों की बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को कानों में सरसराहट या कभी-कभी कुछ गूंजने जैसी ध्वनि सुनाई पड़ती है, जबकि वास्तव में ऐसी किसी आवाज का अस्तित्व ही नहीं होता है। इसे भी कुछ विशेष प्रकार के योगासनों को नियमित रूप से कर दूर किया जा सकता है।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 3

    विपरीत करनी आसन

    विपरीत करनी आसन रक्त संचार को सुचारू बनाता है। और कानों से संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा दिलाता है। इसे करने के लिए सबसे पहले दीवार से करीब 3 इंच की दूरी पर चटाई बिछाएं और फिर अपने पैरों को दीवार की ओर फैला कर लेट जाएं, अब शरीर के ऊपरी भाग को पीछे की ओर झुकाकर चटाई पर लेट जाएं, इस अवस्था में दोनों पैर दीवार से ऊपर की ओर होने चाहिए। बांहो को शरीर से कुछ दूरी पर ज़मीन से लगाकर रखें। इस अवस्था में हथेलियां ऊपर की ओर की होनी चाहिए। अब सांस छोड़ते हुए सिर, गर्दन और मेरूदंड को ज़मीन से लगायें। इस मुद्रा में 5 से 15 मिनट तक बने रहें और
    फिर घुटनों को मोड़ेते हुए दायीं ओर घूम जाएं और फिर सामान्य अवस्था में आ जाएं।
    courtesy: iyogaclasses.com

  • 4

    उष्ट्रासन

    उष्ट्रासन करने के लिए पेट के बल लेट जाइए और फिर दोनों हाथों से पैरों की पिंडलियों को पकड़ लीजिए। इसके बाद वक्षस्थल, कंधे और पेट के ऊपर और नीचे के भाग को खींचिए। इस स्थिति में 3 से 8 मिनट के लिए रहिए तथा मुंह पूरी तरह बंद रखिए। ध्यान रहे कि हर्निया के रोगी यह आसन ना करें।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 5

    मत्स्यासन

    मत्स्यासन करने के लिए पद्मासन (टौकड़ी लगाकर बैठना) लगाकर बैठ जाइए और पीठ का भाग जमीन से उठाइए तथा सिर को इतना पीछे ले जाइए कि सिर के बीच वाला भाग ज़मीन से छू जाए। अब सीधे हाथ से उल्टे पैर का अंगूठा और उल्टे हाथ से सीधे पैर का अंगूठा पकड़िए। घुटनों को जमीन से लगाकर पीठ के भाग को ऊपर उठाइए ताकि सारा शरीर केवल घुटनो और सिर के बल ऊपर उठ जाए।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 6

    पवनमुक्तासना

    पवन मुक्तासन रीढ़ की हड्डी को लचीला व मजबूत बनाने से साथ पूरी शरीर के लिए लाभदायक होता है। इस करने के लिए सबसे पहले कमर के बल लेट जाएं और फिर दाएं घुटने को हाथों से पकड़ कर जंघा को पेट पर दबाएं, अब सांस छोड़ते हुए घुटने को सीने के पास ले आएं। इसके बाद ठोड़ी को घुटने से छुलाने की कोशिश करें। अब बायां पैर जमीन पर सीधा टिकाएं और श्वास भरते हुए पैर व सिर को वापस जमीन पर लाएं। ठीक यही क्रिया बाएं पैर से करें व फिर दोनों पैरों से। इसे पांच बार दोहराएं।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 7

    उत्तानपादासन

    उत्तानपादासन करने के लिए पीठ के बल लेट जाये और अपनी हथेलियों को बगल में सटाकर ज़मीन पर रख लें और पैर के पंजो को मिला लें। अब सांस को अन्दर भरकर दोनों पैरों को 90 डिग्री के कोंण पर धिरे-धिरे उठायें और कुछ समय तक इसी स्थिति में बने रहे। अब वापस पैरों को धिरे–धिरे ज़मीन पर टिकायें। ध्यान रहे कि इसे अधिक बल लगाकर या झटके के साथ ना करें। कुछ देर आराम कर इसे दोहराएं।
    courtesy: © thesecretsofyoga Images

  • 8

    गोमुखासन

    गोमुखासन करने के लिए पहले सीधे बैठकर बायें पैर को मोड़कर उसकी ऐड़ी को दाये नितंब के पास रखें और इसी प्रकार दायें पैर को मोड़कर बाये पैर पर इस प्रकार रखे कि दोनों घुटने एक दूसरे को छुएं। अब दायें हाथ को उठाकर पीठ कि और मोड़ें तथा बायें हाथ को पीठ के पीछे से लेकर दायें हाथ को पकड़ें। ध्यान रहे कि आपकी गर्दन व कमर सीधी रहे। एक और एक मिनिट करने के बाद दूसरी और से भी इसी प्रकार से ह क्रिया करें।  
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 9

    अनुलोम विलोम प्राणायाम

    अनुलोम विलोम करने के लिए अपनी सुविधानुसार पद्मासन, सिद्धासन, स्वस्तिकासन अथवा सुखासन में बैठ जाएं। दाहिने हाथ के अंगूठे से नासिका के दाएं छिद्र को बंद कर लें और नासिका के बाएं छिद्र से 4 तक की गिनती में सांस को भरे और फिर बायीं नासिका को अंगूठे के बगल वाली दो अंगुलियों से बंद कर दें। इसके बाद दाहिनी नासिका से अंगूठे को हटा दें और दायीं नासिका से सांस को बाहर निकालें। अब दायीं नासिका से ही सांस को 4 तक गिनकर भरें और दायीं नाक को बंद करके बायीं नासिका खोलकर सांस को 8 तक गिनकर बाहर निकालें। इस प्राणायाम को 5 से 15 मिनट तक करें।

  • 10

    ब्रह्ममुद्रा

    ब्रह्ममुद्रा करने के लिए कमर सीधी रखकर बैठें और गर्दन को ऊपर-नीचे 10 बार और दाएं-बाएं 10 बार चलाएं और धीरे-धीरे गर्दन को गोल घुमाना 10 बार सीधे और 10 बार उल्टे, आंखें खुली रखकर इस मुद्रा को करें।

  • 11

    भुजंगासन

    भुजंगासन करने के लिए पेट के बल लेटकर पैर को मिलाकर लंबा रखें और कंधों के नीचे हथेली को जमा कर गर्दन, सिर व नाभी तक पेट ऊपर उठाएं और 10 से 15 श्वास-प्रश्वास करें फिर जमीन पर पहुंचकर आराम करें। 3 बार इस क्रिया को दोहराएं।
    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

  • 12

    भ्रामरी प्राणासन

    इसे करने के लिए कमर सीधी करके बैठें, दोनों कानों को दोनों हाथों की तर्जनी उंगलियों से हल्के से बंद कर लें। आंखें बंद कर लें और लंबी गहरी सांस भीतर भरकर करें। यह ज़ोर से करें ताकि मस्तिष्क, चेहरा और होंठों की मांसपेशियों में स्पंदन पैदा हो सके। एक के बाद एक श्वास लेकर लगातार 10 बार इसे दोहराएं। इससे कान की नसों में रक्त संचार बढ़कर और काम का परदा लोचदार होकर सुनने की क्षमता बढ़ती है।

    courtesy: © Thinkstock photos/ Getty Images

Related Slideshows
Post Comment
X
Post Your comment
Disclaimer +
Though all possible measures have been taken to ensure accuracy, reliability, timeliness and authenticity of the information; Onlymyhealth assumes no liability for the same. Using any information of this website is at the viewers’ risk. Please be informed that we are not responsible for advice/tips given by any third party in form of comments on article pages . If you have or suspect having any medical condition, kindly contact your professional health care provider.
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर