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पीरियड्स के बारे में बात करना है जरूरी

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 14, 2015
माहवारी या पीरियड्स हर लड़की के शरीर के विकास से जुड़ी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके बारे में हम आज भी सार्वजनिक रूप से बात नहीं करते। पीरियड्स से जुड़ी कई भ्रांतियां आज भी हमारे बीच में हैं। इन भ्रांतियों के चलते मां आज भी बड़ी हो रही अपनी बेटियों से इस बारे में बेहिचक बात नहीं कर पाती।
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    पीरियड्स से जुड़ी जानकारी

    माहवारी या पीरियड्स हर लड़की के शरीर के विकास से जुड़ी एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके बारे में हम आज भी सार्वजनिक रूप से बात नहीं करते। और हम में से ज्‍यादातर लड़कियां गोपनीयता के चलते यह पता लगाने की कोशिश भी नहीं करती कि हमारे द्वारा अपनाये गये उपाय सही मायनों में हमारे लिए स्‍वास्‍थ्‍यकर है भी या नहीं। पीरियड्स से जुड़ी कई भ्रांतियां आज भी हमारे बीच में हैं। इन भ्रांतियों के चलते मां आज भी बड़ी हो रही अपनी बेटियों से इस बारे में बेहिचक बात नहीं कर पाती। आइए जानें, अपनी बेटी को पीरियड्स से पहले तैयार करने के लिए क्‍या-क्‍या उपाय अपनाने चाहिए।  
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    पीरियड्स से जुड़ी जानकारी
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    मां से बेहतर भला कौन

    आप यह मत भूलिए कि आप उसकी मां हैं और इस विषय पर उससे आपसे बेहतर कोई और बात नहीं कर सकता। मां को चाहिए कि अपनी 10 से 11 साल की बच्ची को बताए कि पीरियड एक सामान्य शारीरिक घटना है, जो उसके बड़े होने की निशानी है। अगर इस स्टेज पर आपने उसका भरोसा जीत लिया, तो वह आपसे अपनी सारी समस्‍याओं को शेयर करने लगेगी। इसलिए निसंकोच अपनी बच्‍ची को इस विषय पर खुलकर बताये।
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    मां से बेहतर भला कौन
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    मिथकों को तोड़ें

    हमारे समाज में पीरियड्स को लेकर एक सामान्य धारणा है कि यह गंदा होता है और उस वक्त हम अशुद्ध हो जाते हैं। लेकिन यह सही नहीं है। अपनी बेटी को बताएं कि पीरियड्स के दौरान कुछ गंदा नहीं होता, यह सामान्‍य प्रक्रिया है। लेकिन इस दौरान सफाई का ध्यान रखने की जरूरत होती है।
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    मिथकों को तोड़ें
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    हार्मोस परिवर्तन की जानकारी दें

    अपने बच्ची को हार्मोस से जुड़ी जानकारी दें। पीरियड्स के दौरान शरीर में कई हार्मोंन परिवर्तन के कारण कई तरह के बदलाव आते है। इस दौरान होने वाले हॉर्मोंल बदलाव के कारण मूड में बार-बार बदलाव हो सकता हैं। ऐसे में उसे समझाएं कि ये बदलाव सामान्य हैं और इनसे परेशान होने की जरूरत नहीं है।
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    हार्मोस परिवर्तन की जानकारी दें
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    शॉपिंग पर लें जाये

    बच्ची के 10 साल की उम्र पार करने के बाद आपको सेनेट्री पैड का विज्ञापन आते ही चैनल चेंज करने की जरूरत नहीं है। साथ ही यह भी अच्छा रहेगा कि आप उसे अपने साथ ऐसे पर्सनल प्रॉडक्ट्स की खरीदारी के लिए ले जाएं। इस तरह उसे लगेगा कि ये हाइजीन प्रॉडक्ट्स हैं और आपको उसके साथ खुलने का एक मौका भी मिलेगा।
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    शॉपिंग पर लें जाये
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    किताबों का सहारा लें

    मां बेटी दोनों एक-दूसरे को जितनी अच्छी तरह जान और समझ सकती हैं, उतना शायद ही कोई और। कुछ ऐसी बातें होती हैं, जो मां अपनी नाजुक उम्र बेटी को समझाकर उसकी परफेक्ट गाइड बन सकती है। पीरियड्स के बारे में बताने के लिए आप किताबों का सहारा लें सकती हैं। इससे उसे काफी नॉलेज मिल जाएगी और अगर इस बीच उसके कुछ सवाल होते हैं, तो आप उनके सवालों को जवाब आसानी से दे पायेगी।
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    किताबों का सहारा लें
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    विकास प्रक्रिया को समझाएं

    जब आपकी बच्ची 10 वर्ष से अधिक की हो जाए तो उसे शारीरिक विकास के बारे में बताएं। बच्चों के बाद इस बात को जानने के बाद कि बड़े होने पर शरीर में किस प्रकार के परिवर्तन होते हैं वह मानसिक रूप से तैयार रहता है। लड़कियों में सेक्स के प्रति परिपक्वता थोड़ा पहले आ जाती है। और पीरियड्स के बारे में पहले से जानकारी होने पर पीरियड्स आने पर तनाव में नहीं रहती है।
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    विकास प्रक्रिया को समझाएं
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    समस्याओं पर बात करें

    आजकल लड़कियों के पीरियड्स शुरू होने की कोई निश्चित आयु सीमा नहीं है। किसी के 10 वर्ष में तो किसी के 14 वर्ष की उम्र में पीरियड्स शुरू हो जाते हैं। इसलिए कोशिश करें कि पीरियड के बारे में उसे बताते वक्त यह भी बताएं कि यदि उसके किसी सहेली को पीरियड उससे पहले या बाद में आए तो यह कोई असामान्य बात नहीं है। पीरियड के दौरान पेट में हल्का दर्द होना और थकान होना सामान्य बात है। साथ ही शुरूआत में पीरियड्स अक्सर दो-तीन महीने के अंतर पर होते हैं तो कभी-कभी कई दिन तक लगातार होते रहते हैं। ऐसा हॉर्मोंस में बदलाव की वजह से होता है। इससे परेशान न हों और बेटी को भी इस बारे में पूरी जानकारी दें।
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    समस्याओं पर बात करें
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    सैनिटरी नैपकिन की जानकारी

    माहवारी की जानकारी तब तक अधूरी है जब तक आप सही सैनिटरी नैपकिन के चुनाव के बारे में अपनी बेटी को नहीं बताती। आजकल मार्केट में कई साइजों और वैराइटी में सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध हैं। लेकिन आपको अपनी बेटी को कॉटन लेयर वाले स्लिम सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करने की सलाह देनी चाहिए। साथ ही उसे यह भी बताये कि पीरियड्स के दौरान हर 6 घंटे के अंतराल पर नैपकिन बदलते रहना चाहिए। फिर चाहे रक्तस्राव कम हो रहा हो या अधिक। इस के अतिरिक्त उसे यह भी बताएं कि वही सैनिटरी नैपकिन इस्तेमाल करे, जो गीलेपन को अच्छी तरह सोख कर जैल में परिवर्तित कर दे।
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    सैनिटरी नैपकिन की जानकारी
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