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बेडरूम में सेलफोन न रखने के सात कारण

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 07, 2014
मोबाइल फोन हमारे शरीर के अंग की तरह हो गया है। इसके बिना शायद हर एक पल भी नहीं रह सकते। लेकिन, जानकार मानते हैं कि कम से कम सोते समय तो मोबाइल फोन व अन्‍य डिजिटल उपकरणों को खुद से दूर ही रखना चाहिये।
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    सिरहाने न रखें स्‍मार्टफोन

    स्‍मार्टफोन सिरहाने रखे बिना आपको नींद नहीं आती। तो, मान लीजिये कि स्‍मार्टफोन का आपका नशा खतरनाक‍ स्थिति तक पहुंच चुका है। और इससे बचना आपके लिए बहुत जरूरी है। हालांकि अपने बेडरूम में फोन को रात भर चार्जिंग पर लगाना इतना बुरा नहीं होता। लेकिन यूगोव और हफगिन्‍टन पोस्‍ट द्वारा किये गए एक सर्वे में यह बात सामने आयी है कि 18 से 29 वर्ष की आयु के 63 फीसदी लोग अपना फोन और टेबलेट पलंग पर साथ रखकर सोते हैं।

    सिरहाने न रखें स्‍मार्टफोन
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    नींद पर असर

    हाल ही में वैज्ञानिकों ने पता लगाया है कि अगर आप मोबाइल या टेबलेट को सिरहाने रखकर सोते हैं, तो इसका असर आपकी नींद पर पड़ता है। हावर्ड मेडिकल स्‍कूल की ओर से जारी एक शोध में कहा गया है मोबाइल फोन, स्‍मार्टफोन और टेबलेट में चमकने वाली नीली रोशनी मस्तिष्‍क के न्‍यूरॉन्‍स को उत्‍तेजित कर देती है और फिर इसका असर आपकी नींद पर पड़ता है। साथ ही मोबाइल को साथ रखकर सोने से न सिर्फ आपको अनिद्रा की शिकायत होती है, बल्कि साथ ही नींद के स्‍तर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा कुछ और कारण भी हैं जिनकी वजह से आपको यह फोन खुद से दूर रखकर ही सोना चाहिये।

    नींद पर असर
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    वक्‍त बेवक्‍त गेम्‍स या बातें नहीं

    आप यूं ही फेसबुक पर न्‍यूजफीड पढ़ने से शुरुआत करते हैं, लेकिन उसके बाद आप फोन में खो ही जाते हैं। खासतौर पर युवा पीढ़ी तो एक बार फोन को हाथ में लेती है, तो फिर आसानी से छोड़ती ही नहीं। देर रात तक फोन पर गेम्‍स खेलने या चैट करते रहने से नींद पर असर पड़ता है, जिससे शरीर के अंदरूनी घड़ी को भी अपना वक्‍त बार-बार सेट करना पड़ता है। इससे स्‍लीप हॉर्मोंस पर भी असर पड़ने लगता है। और इसका असर यह होता है कि आपको उस वक्‍त से पहले नींद आती ही नहीं। फिर चाहे रात के दो ही क्‍यों न बज चुके हों। नींद का यह गलत वक्‍त अगले दिन आपके ऊर्जा स्‍तर और उत्‍पादकता पर भी विपरीत असर डालता है।

    वक्‍त बेवक्‍त गेम्‍स या बातें नहीं
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    किताब पढ़ लें

    अगर आपको नींद नहीं आ रही है, तो फोन की जगह किताब उठायें। रीडिंग लैम्‍प में मोबाइल फोन या अन्‍य किसी डिजिटल डिवाइस की तरह ब्‍लू लाइट नहीं होती, जो आपकी नींद में बाधा उत्‍पन्‍न करे। अपनी पसंद की कोई भी किताब पढ़ें। शब्‍द आपके विचारों को एक पटरी पर दौड़ता हैं। 2012 में यूनि‍वर्सिटी ऑफ नोर्ट डेम ने कहा कि हमारी याद्दाश्‍त को वे चीजें ज्‍यादा याद रहती हैं जो हम सोने से पहले सीखते हैं।

    किताब पढ़ लें
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    अपने प्रियजनों के साथ वक्‍त बितायें

    आपका सा‍थी सेलफोन से ज्‍यादा कीमती हैं। लेकिन, बेडरूम में तकनीकी की ज्‍यादा दखल के कारण इस रिश्‍ते पर नकारात्‍मक असर पड़ता है। 2013 में हुए एक शोध के अनुसार 72 फीसदी अमेरिकी दिन के अधिकतर समय अपना फोन खुद से पांच फीट या उससे भी कम दूरी पर रखते हैं। यहां तक कि 20 फीसदी लोग तो अंतरंग पलों के दौरान भी फोन पर ही व्‍यस्‍त होते हैं। वास्‍तव में यह आभासी दुनिया आपको असल जिंदगी से काट रही है। अब लोग अपने साथी से भी सही प्रकार से संवाद करने से कतराने लगे हैं।

    अपने प्रियजनों के साथ वक्‍त बितायें
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    रेडिएशन का खतरा कम

    हालांकि मोबाइल फोन से कैंसर होने के बारे में कोई प्रमाणिक शोध अभी सामने नहीं आया है, लेकिन अमेरिका के नेशनल कैंसर इंस्‍टीट्यूट के मुताबिक मोबाइल फोन से निकलने वाली इलैक्‍ट्रोमेगनेटिक किरणे शरीर के ऊत्‍तकों द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं। इंटरनेशल एजेंसी फॉर कैंसर के शोध के अनुसार शायद इन किरणों से कैंसर हो सकता है। और जब आप फोन को अपने शरीर से सटाकर रखते हैं तो कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप अपने फोन का वाईफाई बंद रखते हैं तो यह खतरा कम हो जाता है। और अगर यह फोन पूरी तरह बंद हो तो बहुत ही अच्‍छा। लेकिन, यह बात सही है कि सिरहाने फोन रखकर सोने वाले अधिकतर लोग इन सब बातों पर ध्‍यान नहीं देते।

    रेडिएशन का खतरा कम
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    अलर्ट से परेशानी

    चाहे आपको इस बात का अहसास हो या नहीं लेकिन फोन आपको जरूरत से ज्‍यादा जागरुक रखता है। आपको लगातार ऐसा लगता रहता है जैसे कोई एलर्ट आया है या फिर आपका मोबाइल बज रहा है। इसे पोस्‍टट्रामेटिक स्‍ट्रेस की परिस्थिति कहा जाता है। आप लगातार अपने फोन की ओर ध्‍यान लगाकर रखते हैं और ऐसे में आपका मस्तिष्‍क शांत नहीं हो पाता।

    अलर्ट से परेशानी
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    आराम से सोयें

    कई बार आप बहुत थके हुए होते हैं, लेकिन फोन के कारण चाहकर भी सो नहीं पाते। जानकार मानते हैं कि सोने से कम से कम आधा से एक घंटा पहले अपने फोन से दूरी बना लें। इससे आपके मस्तिष्‍क को शांत होने का पर्याप्‍त समय मिल जाता है। याद रखें बेडरूम सोने की जगह है और नींद शरीर और मस्तिष्‍क को शांत करने और ऊर्जा देने का जरिया। और अगर आपको यहां भी सुकून नहीं मिल रहा, तो आप वाकई बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं।

    आराम से सोयें
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