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अपने साथी के साथ लिव इन में रहना क्‍यों अच्‍छा नहीं

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 12, 2014
देखा गया है कि खासतौर पर भारत में अक्सर समय बीतने के साथ लिव-इन में कम्‍फर्ट फील नहीं करते या कह सकते हैं वे रिश्ते से भागने लगते हैं, क्योंकि इसके पीछे कई अहम कारण होते हैं।
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    लिव इन का सच

    कई देशों में लिव-इन रिलेशन्स को मान्‍यता मिल चुकी है और वहां इसके लिए खास कानून भी बन चुके हैं। लेकिन आज भी भारत इसको लेकर कई समस्याएं भी हैं। लोग अक्सर समय बीतने के साथ लिव-इन में कम्‍फर्ट फील नहीं करते या कह सकते हैं वे रिश्ते से भागने लगते हैं। हलांकि इनके सफल होने के भी कुछ उदाहरण हैं, इस रिश्ते में बंधन में न बंधने की आजादी तो होती है, लेकिन दो लोग इसमें जीवन को पूरी तरह से एन्जॉय नहीं कर पाते, क्योंकि इसके कई साइड इफेक्ट सामने आने लगते हैं। तो चलिये जानें साथी के साथ लिव इन में रहने के क्या नुकसान हैं।
    Image courtesy: © Getty Images

    लिव इन का सच
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    सामाजिक कंलक

    खासतौर पर भारतीय लोगों को लगता है कि लिव-इन रिलेशन में रहना एक सामाजिक कंलक है। छोटे शहरों के लोगों के  लिए तो लिव-इन रिलेशनशिप एक बड़ी शर्मिंदगी वाली बात होती है। इसलिए लोगों को कई बार समाज से इसके लिए नकारात्मक व्यवहार झेलना पड़ता है।
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    सामाजिक कंलक
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    विश्वास की कमी

    इस रिश्ते का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि दोनों को ही यह डर हमेशा बना रहता है कि कहीं साथी छोड़ न दे। यह देखा भी गया है कि भावनात्मक असुरक्षा के चलते लिव-इन रिलेशनशिप ज्यादा लंबे समय तक नहीं चल पाते। और थोड़ी भी नोक-झोंक होने पर लड़का-लड़की एक दूसरे का साथ आसानी से छोड़ देते हैं।
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    विश्वास की कमी
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    निर्भरता की कमी भी और अधिकता भी

    लिव-इन रिलेशन में पार्टनर जोड़े एक-दूसरे पर निर्भर नहीं भी होते हैं और कभी-कभी बहुत निर्भर हो जाते हैं। और ये दोनों ही चीजें लिव-इन में नुकसानदायक हो सकती हैं। क्योंकि बिना शादी अधिक निर्भरता परेशान करती है और कोई स्‍ट्रांग कमीटमेंट बिना ये परेशानी पेदा करती है।
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     निर्भरता की कमी भी और अधिकता भी
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    सम्‍मान की कमी

    अक्सर लिव-इन रिलेशन में दोनों ही लोगों को लगता है कि उनका पार्टनर उन्‍हे वह सम्‍मान नहीं देता है जो उन्‍हे शादी करने के बाद मिल सकता है, और यही कारण है कि भारत जैसे देश में लिव-इन में रहने वाले जोड़ों में पुरूष की हमेशा कोशिश रहती है कि वह दोनों जल्‍द शादी कर लें।
    Image courtesy: © Getty Images

    सम्‍मान की कमी
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    चाइल्‍ड फैक्‍टर

    लिव इन रिलेशन से पैदा होने वाले बच्‍चों को आज भी भातरीय समाज में अच्‍छी नज़रों से नहीं देखा जाता है। जबकि लिव इन में रहने वाले पुरूषों को हमेशा चाहिए होता है कि उनके बच्‍चे को उनके जैसा ही सम्‍मान मिलें, इसलिए वह अपने पार्टनर के साथ एक सच्‍चा रिश्‍ता रखना पसंद करते हैं, लेकिन कई बार रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच पाता और बड़ी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं।
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    चाइल्‍ड फैक्‍टर
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    बोरिंग सेक्स लाइफ

    आमतौर पर लिव इन में जाने का बड़ा कराण सेक्स होता है और इसी लिए बिना कमिटमेंट कुछ समय बाद वे सैक्स लाइफ को उतना एंज्वाय नहीं कर पाते हैं। दरअसल लंबा समय साथ बिताने के बाद ऐसे जोड़ों के संबंधों में नीरसता और एकरसता आने लगती है। रोमांस कम होने पर बोरिंग सैक्स लाइफ से ऊब जाने के कारण अक्सर ये रिश्ते टूटने लगते हैं।
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    बोरिंग सेक्स लाइफ
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    लिव इन रिलेशनशिप और खर्च

    लिव इन में साथ रहने से दो लोगों का खर्चा घटता नहीं है, बल्कि बढ़ जाता है। यूएस सेंसेस ब्यूरो के पियू रिसर्च सेंटर द्वारा 30 से 44 वर्ष तक के लोगों पर किए गए इस सर्वे के अनुसार ग्रेजुएट या फिर इकोनॉमिकली सैटल्ड जोड़ों के लिए एक बार को बेशक लिव इन रिलेशनशिप में रहना फायदेमंद होता हो सकता है, लेकिन कम पढ़े-लिखे कपल्स पर यह बात बिल्कुल लागू नहीं होती है।
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    लिव इन रिलेशनशिप और खर्च
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