जानें छोटे बच्‍चों को चाय क्‍यों नहीं पिलानी चाहिए

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 29, 2016

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इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाने के साथ मौसमी बीमारियों से लड़ने और पाचन को दुरुस्‍त रखने के लिए बच्‍चों को चाय पीने के लिए दी जाती है। आपको क्या लगता है, क्या ये एक अच्छी और हेल्दी आदत है?
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    छोटे बच्‍चे और चाय की आदत

    हमारे देश में चाय पीना एक आदत है। दिन की शुरुआत अगर चाय की चुस्क‍ियां से न की जाएं तो दिन अधूरा लगता है। देश के करीब आधे से ज्‍यादा लोग सुबह उठने के साथ ही चाय पीना पसंद करते हैं। बेड टी का कल्चर न केवल शहरों में बल्क‍ि गांवों में भी प्रचलित हैं। लेकिन यह आदत बड़ों तक ही सीमित नहीं है, कई भारतीय घरों में बड़ों के साथ-साथ बच्‍चों को भी चाय दी जाती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि माना जाता है कि बच्‍चों को चाय देने से उनकी इम्‍यूनिटी मजबूत होती है जिससे उन्‍हें मौसमी बीमारियों से लड़ने और पाचन को दुरुस्‍त रखने में मदद मिलेगी। आपको क्या लगता है, क्या ये एक अच्छी और हेल्दी आदत है? क्‍या सच में बच्‍चों को चाय के सेवन से ये सब फायदे मिलते हैं। आइए जानें छोटे बच्‍चों को चाय देने से उनकी सेहत पर क्‍या नुकसान होते हैं।

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    कैल्शियम और पोषक तत्‍वों की कमी

    वैसे तो चाय छोटे बच्‍चों के साथ बड़ों को भी नुकसान पहुंचाती है, लेकिन अगर छोटे बचचे अगर चाय पीते हैं तो उनके शरीर में कैल्शियम ठीक तरह से अवशोषित नहीं हो पाता जिससे उनमें कैल्शियम की कमी हो जाती है। चाय में टैनिन शामिल की मात्रा प्रोटीन और अन्‍य पोषक तत्‍वों के अवशोषण को कम कर देती है। यहां तक कि कई मां छोटे बच्चे के दूध न पीने पर ज्यादा दूध वाली चाय बनाकर पिला देती हैं, उन्हें लगता है इससे बच्चे को कैल्शियम मिल जाएगा। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि दूध में कुछ बूंद चाय के पड़ने से दूध के अपने फायदे भी खत्‍म हो जाते है।

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    चीनी के सेवन में वृद्धि और मूत्रवर्धक

    चाय में हमेशा चीनी डाली जाती है। चीनी का बहुत ज्‍यादा सेवन बच्‍चों में दांत के खराब होने के साथ मोटापे का कारण बन सकता है। इसलिए बच्‍चों को चाय नहीं पिलानी चाहिए। चाय भी कॉफी की तरह एक मूत्रवर्धक है। इसका मतलब यह है, चाय के सेवन से बच्‍चों को यूरीन अधिक आता है। और बार-बार यूरीन आने से यूरीन के माध्यम से कैल्शियम का नुकसान होता है।

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    अनिद्रा की समस्‍या

    जो बच्‍चे चाय का सेवन करते हैं, उनमें अनिद्रा की समस्‍या देखने को मिलती है। चाय में मौजूद कैफीन, बेचैनी और नींद संबंधी विकार पैदा कर सकती है। इसके अलावा कैफीन रक्‍तचाप में वृद्धि कर बच्‍चों में चिंता विकार पैदा करता है, जिसके परिणामस्‍वरूप बच्‍चों में अनिद्रा की समस्‍या देखने को मिलती हे। इसके अलावा चाय के सेवन से बच्‍चों में एकाग्रता में कठिनाई और अतिसक्रियता देखने को मिलती है।

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    अन्‍य नुकसान

    बच्चे के लगातार चाय पीने से उसके मस्तिष्क, मांसपेशियां, नर्वस सिस्टम और शारीरिक ढांचे के विकास पर असर पड़ता है। कम उम्र में चाय पीने के कुछ कमजोर हड्डियां, शरीर में दर्द, ख़ासतौर पर लोअर लिंब में एकाग्र न हो पाना, चिड़चिड़ापन और व्यवहार से जुड़ी समस्याएं, कमजोर मांसपेशियां आदि समस्‍याएं देखने को मिलती है। बच्‍चों की छोटे अंग शाक्तिशाली कैफीन से निपट सकते हैं, इसलिए चाय का छोटा सा घूंट भी पेट की समस्‍याओं और हार्टबर्न का कारण बन सकता है।
    Image Source : Getty

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