आभार और उदारता के भी होते हैं कई फायदे

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 17, 2014

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जीवन को उदरता और दया भाव से जीना वाकई गर्व और हर्ष की बात है। लेकिन इसके लिए आपको दुनिया को देखने के अपने नजरिये पर विचार मंथन करना होता है। और भलाई करते समय पूरी सावधानी भी बरतनी पड़ती है।
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    जीने का सही तरीका

    जीवन जीने के दो विकल्प होते हैं, या तो आप दयालु भाव और उदारता के साथ जीवन जियें। और दूसरा विकल्‍प होता है कि जैसा जीवन जी रहे हैं, वैसे ही जीते रहें। जीवन को उदरता और दया भाव से जीना वाकई गर्व और हर्ष का विषय है। मानव शरीर पांच तत्वों से बना है और उसकी आत्मा बनी है प्रेम से। उदारता आत्मा को पवित्र करती है। उदारता के साथ जीवन जीने पर हर दिन, हर पल जीवन आनंद का अनुभव कराता है। तो चलिये जानें कि कैसे खुद को उदार बनाएं और एक बेहतर जीवन की शुरुआत करें।
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    सहिष्णुता या उदारता कमजोरी नहीं

    कई लोग सहिष्णुता का अर्थ कमजोरी समझ लेते हैं। और ईंट का जवाब पत्थर से देने को आतुर रहते हैं। लेकिन इससे बात खत्म नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। इससे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू होता है। अधिकांश मामलों में सहिष्णुता के माध्यम से ही वातावरण को तनावमुक्त कर सामान्य बनाया जा सकता है।
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    महिलाओं से सीखें सहिष्णुता और उदारता

    पूरी दुनिया की (विशेषकर भारतीय) महिलाएं उदारता और सहिष्णुता का अनुपम उदाहरण हैं। उनका त्याग, सेवा, दयाभाव व परिवार के प्रति समर्पित भाव उनकी सहिष्णुता के कारण ही होता है। कई बार खुद आधा पेट खाकर पति, बच्चों व पूरे परिवार को भोजन कराने वाली भारतीय महिला बीमारी, हाथ-पैर दर्द व अन्य तकलीफों के समय भी अपने कामों में जुटी रहती हैं। यह उनकी सहिष्णुता और उदारता का ही अनुपम उदाहरण है।
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    विचार मंथन

    आप दुनिया को देखने के अपने नज़रिये पर जब विचार मंथन कर यह जानने की कोशिश करते हैं कि क्या वाकई आपका नज़रिया सही है। ऐसा करके आप अपने नजरिये में काफी सुधार कर सकते हैं। बुरे तजुर्बे अक्सर नकारात्मक भावना लेकर आते हैं, इसलिए यह याद रखना कि किसी की उदरता की वजह से आपका कई बार भला हुआ है, आपको उदार बनने के लिए प्रेरित करता है।
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    मदद चाहिये तो किसी ओर की मदद करें

    किसी से मदद लेना कोई बुरी बात नहीं। सभी को जीवन में कभी ना कभी, किसी ना किसी की मदद की आवश्यकता पड़ती ही है। इसलिए इसे अहं का विषय ना बनाएं। मदद लें, लेकिन लगों की मदद करें भी! जब आप किसी की मदद करते हैं तो ना सिर्फ आपको बल्कि लोगों को भी उदारता का महत्व समझ आता है।  
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    किसी के दिन को बनाएं बेहतर

    कभी-कभी थोड़ा समय निकाल कर किसी ज़रूरतमंद इंसान की सहायता करें। ज़रूरी नहीं कि यह सहायता धन की ही हो, आप किसी काम में उसकी मदद कर भी उसके मुश्किल व तनावपूर्ण दिन को बेहतर और आसान बना करते हैं।
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    उदार बनें लेकिन सतर्कता के साथ

    उदारता के साथ सतर्कता रखने की भी जरूरत होती है ताकि आपकी उदारता और भलमनसाहत का लोग अनुचित लाभ न उठाने पायें। सज्जनों को ठग लेना आसान है। इसलिए उदार बनें लेकिन सतर्क भी रहें।
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  • 8

    सराहना करना सीखें

    खुद की ओर दूसरे लोगों की सराहना करना सीखें। इसकी शुरुआत अपने सबसे अच्छे अध्यापक तो एक धन्यवाद पत्र लिखकर करें। जब आप ऐसा करेंगे तो आपके अध्यापक को वर्षों बाद वो पत्र पाकर बेहद खुशी और गर्व होगा कि उनके आपको सिखाते समय दिखाये धैर्य और उदारता का सही फल मिला है। इससे आपको भी उदार बनने की प्रबल प्रेरणा मिलेगी।    
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    गलतियों को मानें और उनसे सीख लें

    कहते हैं कि जो इंसान अपनी गलतियों से सीखता है वह उन्हें दौहराता नहीं है और बेहतर जीवन जीता है। इसलिये अपनी गलतियों को छिपायें नहीं, उन्हें स्वीकार करें और सीख लें। इससे ना सिर्फ उदार बनेंगे बल्कि आपमें सकारात्मक भी पैदा करता है।
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    जांच-परख कर करें उदारता

    संकटग्रस्तों की सहायता करना उचित है। पर इससे पूर्व यह जांच पड़ताल करनी चाहिए कि संकट की बात बनावटी तो नहीं है। और विपत्ति की बात मनगढ़ंत तो नहीं है। हितैषी बनकर जेब काटने का कोई कुचक्र तो नहीं चल रहा है? ताकि आपका और अन्य भले लोगों के दिल को चोट न पहुंचे।
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