जानें क्‍यों फ्लॉसिंग है आपके मसूड़ों के लिए फायदेमंद

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 02, 2015

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दांतों की उचित सफाई करने के लिए फ्लॉसिंग करना बहुत जरूरी होता है। यह मसूड़ों और दांतों की बीमारी पैदा करने वाले प्‍लॉक को ह‍टाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नायलॉन का यह पतला सा धागा ना केवल आपके दांतों की सफाई करता है, बल्कि आपको मसूड़ों की कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है।
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    मसूड़ों के लिए फायदेमंद फ्लॉसिंग

    दांतों की उचित सफाई करने के लिए फ्लॉसिंग करना बहुत जरूरी होता है। यह मसूड़ों और दांतों की बीमारी पैदा करने वाले प्‍लॉक को ह‍टाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि नायलॉन का यह पतला सा धागा ना केवल आपके दांतों की सफाई करता है, बल्कि आपको मसूड़ों की कई बीमारियों से बचाने में भी मदद करता है। दांतों के क्षय तथा अन्य बीमारियों से रक्षा के लिए चिकित्सक अक्सर मरीजों को फ्लॉस कराने की सलाह देते हैं, लेकिन हाल में किए गए एक नए अघ्ययन से पता चला है कि फ्लॉस मसूडों की विभिन्न बीमारियों को भी दूर रखने में भी सहायक होता है।
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    शोध के अनुसार

    फ्लॉस मसूडों की विभिन्न बीमारियों को भी दूर रखने में भी सहायक होता है। इस बात को न्‍यूयार्क यूनिवर्सिटी के अध्‍ययन द्वारा शामिल किया गया। इस अघ्ययन में 12 से 21 आयु वर्ग के 51 जुड़वाओं को शामिल किया गया। अघ्ययन के दौरान एक युवा को सामान्य ब्रश और टूथपेस्ट से दांतों की सफाई की, जबकि दूसरे ने इसके साथ-साथ फ्लॉसिंग भी की। दो सप्ताह के परीक्षण के बाद पाया गया कि दांतों को साफ करने के लिए फ्लॉसिंग का उपयोग करने वाले युवाओं में न करने वालों की  तुलना मसूड़ों की बीमारी कम पाई गई।   
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    फ्लॉस करने का महत्व

    दांतों के लिए फ्लॉसिंग उतना ही जरूरी है, जितना ब्रश करना, क्योंकि ये दांतों के बीच की ऐसी जगहों पर पहुंचकर सफाई करता है, जहां ब्रश नही पहुंच पाता। दांतों के बीच मौजूद भोजन के कण और प्‍लॉक को निकालना जरूरी है, क्योंकि इससे दांतों में कैविटी बनने का खतरा होता है। इसके साथ ही प्लॉक, खाई जाने वाली सामग्री की एक चिपचिपी परत होती है जिसमें बैक्टीरिया होता है, वे दांतों के गिरने और मसूड़ों की जलन का कारण बनते हैं, जो बाद में पेरिओडोंटल रोग पैदा कर सकते हैं। इसलिए अपने दांतों के स्‍वास्‍थ्‍य और मुस्‍कान में सुधार करने के लिए नियमित रूप से फ्लॉसिंग से अपने दांतों का उपचार करें।
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    क्यों करना चाहिए फ्लॉस?

    ब्रश करने के चार घंटे के बाद ही प्लॉक बनना शुरू हो जाता है। और जब प्‍लॉक को निकाला नहीं जाता तो यह कड़ा होकर टार्टर में बदल जाता है। फिर टार्टर केवल  डेंटिस्ट या हाइजीनिस्ट के द्वारा ही हटाया जा सकता है। इसलिए नियमित रूप से फ्लॉस किया जाना चाहिए।
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    फ्लॉस न करने के मसूड़ों को नुकसान

    फ्लॉस न करने से बहुत खतरनाक बैक्टीरिया टार्टर में निर्मित होकर, विषाक्त पदार्थों का उत्पादन शुरू कर देता हैं। ये विषाक्त पदार्थ व्यक्ति के मसूड़ों में उत्तेजना, जलन, सूजन पैदा करते है जिसे जिन्जवाइटिस कहते हैं। जिन्जवाइटिस, पेरीडोन्टाइटिस को जन्म देता हैं, जहां यह विषाक्त पदार्थ दांतों को सहारा देने वाली हड्डियों पर आक्रमण करते हैं और जिससे वह हड्डी खराब हो जाती है, दांत हिलने लगते हैं, यहां तक कि दांत गिरने भी लगते हैं।
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    स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में मददगार

    दांतों का दिल की सेहत से सीधा संबंध होता है। दांतों का खराब स्‍वास्‍थ्‍य और जिन्जवाइटिस के कारण हृदय रोग हो सकता है। मसूड़ों और मुंह में सूजन होने पर पूरे शरीर में उसके बैक्‍टीरिया फैलने का खतरा होता है। और बैक्‍टीरिया के ये अंश रक्‍त प्रवाह का भी हिस्‍सा बन सकते हैं। जो लोग नियमित रूप से ब्रश और फ्लॉस करते हैं, न केवल उनके दांत साफ रहते हैं, बल्कि उन्‍हें दिल का दौरा पड़ने का खतरा भी कम होता है।
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    फ्लॉसिंग के प्रकार

    फ्लॉसिंग का एक कॉस्मेटिक लाभ भी है। इससे बदसूरत टार्टर का निर्माण नहीं होता और यह बुरी सांस को भी रोकता है। फ्लॉस की कई शैलियों उपलब्ध हैं- वैक्स्ड और अन्वैक्स्ड, व्यापक और नियमित और कुछ स्वाद सुगंध के प्रकार जैसे मिंट और दालचिनी भी मौजूद हैं। ये सब लगभग एक जैसा ही काम करते हैं। यदि किसी के दांतों के बीच में चौड़ी जगह है तो वह चौड़े फ्लॉस का उपयोग कर सकता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात एक उत्पाद का चयन करना और रोज इसका उपयोग करना है।
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    फ्लॉस करने का तरीका

    ब्रश करने के बाद एक बार फ्लॉस करना जरूरी है, फिर चाहे आप इसे सुबह करें या रात को। फ्लॉस करने के लिए आपको जो अच्‍छे लगे वहीं लें। वैसे वैक्स फ्लॉस आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। फिर फ्लॉस को आधा मीटर तोड़ें। उसके एक छोर को हाथ की एक उंगली पर बांध दें, दूसरे छोर को दूसरे हाथ की उंगली पर बांधें। उंगलियों से फ्लॉस को कसकर पकड़ें। अब आपके दांतों के बीच फ्लॉस को आहिस्ता से घुमाएं। फ्लॉस को हर दांत के आसपास उपर और नीचे रगड़ें। फ्लॉस गंदा हो जाने पर उंगली से उसे निकाल दें और दूसरा फ्लॉस लें।
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