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बार-बार वॉशरूम क्‍यों जाती हैं महिलायें और क्‍या है इसका उपचार

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 19, 2015
ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण महिलाएं बार-बार वॉशरूम जाती हैं। यानी यह वह स्थिति होती है, जब किसी महिला का अपने ब्‍लैडर पर नियंत्रण नहीं रहता, इस स्थिति को यूरीन इंकांटीनेंस (मूत्र असंयम) भी कहते हैं।
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    क्‍यों बार-बार वॉशरूम जाती हैं महिलायें

    ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण महिलाएं बार-बार वॉशरूम जाती हैं। आम बोलचाल की भाषा में कहें तो यह वह स्थिति होती है, जब किसी महिला का अपने ब्‍लैडर (यह यूरीनेशन के लिए जिम्‍मेदार होती है) पर नियंत्रण नहीं रहता, इस स्थिति को यूरीन इंकांटीनेंस (मूत्र असंयम) भी कहते हैं। यह स्थिति बहुत ही शर्मनाक होती है, इसमें महिला खुद को असहज अहसूस करती है। कई बार तो खांसने, छींकने, हंसने, सामान उठाने, सीढि़या चढ़ने आदि सामान्‍य स्थिति में यूरीन का रिसाव हो जाता है।
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    क्‍यों बार-बार वॉशरूम जाती हैं महिलायें
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    महिलाओं में ओवर एक्टिव ब्लैडर

    'दी नेशनल एसोसिएशन फॉर कॉन्टिनेंस' (NAFC) के अनुसार, महिलायें में ब्‍लैडर इंकांटीनेंस की समस्‍या का अनुभव पुरुषों के मुकाबले दोगुना होता है। इसमें ओवरएक्टिव ब्‍लैडर या मूत्र असंयम शामिल हैं। 20 से 45 की आयु की महिलायें ओवरएक्टिव ब्‍लैडर की समस्या का शिकार अधिक होती हैं। इस उम्र की महिलाओं में यह समस्या, बाकी उम्र से 40 प्रतिशत तक अधिक होती है।
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    महिलाओं में ओवर एक्टिव ब्लैडर
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    ओवर एक्टिव ब्‍लैडर के प्रकार

    पेट की निचली मांसपेशियों पर अत्‍यधिक दबाव के कारण महिलाओं का मूत्र पर नियंत्रण नहीं रहता। ऐसा व्यायाम, छींकने, हंसने अथवा खांसने के दौरान हो सकता है। तनाव असंयम में पेल्विक ऊतक और मांसपेशियां के कमजोर होने के कारण होता हैं। अगर कोई महिला अपना मूत्राशय पूरी तरह खाली नहीं कर पाती है, तो यह इस बात का संकेत है कि वह ओवरफ्लो असंयम से जूझ रही है। इस परिस्थिति में मूत्राशय पूरा भरने के बाद महिला को मूत्र लीक होने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा तीव्र असंयम की समस्‍या अति सक्रिय मूत्राशय के कारण होती है। इस समस्‍या के होने पर महिला को वॉशरूम तक पहुंचने की बहुत जल्‍दी होती है, लेकिन वहां तक पहुंचने तक भी वह अपने मूत्र पर नियंत्रण नहीं रख पाती।
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    ओवर एक्टिव ब्‍लैडर के प्रकार
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    ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण

    महिलाओं में गर्भावस्था और प्रसव के बाद भी यह समस्‍या होती है। ऐसा इन परिस्थितियों में होने वाले तनाव के साथ श्रोणि क्षेत्र की मांसपेशियों पर अधिक दबाव के कारण मूत्रमार्ग में रुकावट और कब्ज की समस्‍या आदि के कारण मूत्र अंसयम की समस्‍या होती है। कुछ अन्य चिकित्सीय समस्यायें भी इसका कारण बन सकती हैं। इसमें स्‍केलेरोसिस, अर्थराइटिस, डिमेंशिया, मूत्राशय की पथरी और मूत्राशय संक्रमण आदि प्रमुख हैं। कुछ प्रकार की दवायें भी मूत्र असंयम का कारण होती है।
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    ओवर एक्टिव ब्लैडर के कारण
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    ओवर एक्टिव ब्लैडर का इलाज

    ब्लैडर का जरूरत से ज्यादा एक्टिव दिखाना समस्या का संकेत है। इसकी वजह से अक्‍सर शर्मिंदा भी होना पड़ सकता है। लेकिन घबराइए नहीं क्‍योंकि जीवनशैली में कुछ सकारात्मक बदलाव लाकर आप मूत्र असंयम की शिकायत को कम कर सकते हैं। इसके साथ ही श्रोणि क्षेत्र के कुछ व्यायामों के जरिये भी इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। कीगल व्‍यायाम और पेल्विक फ्लोर व्‍यायाम की सलाह चिकित्‍सक भी देते हैं। बॉयोफीड बैक के जरिये मूत्र असंयम को कम किया जा सकता है।
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    ओवर एक्टिव ब्लैडर का इलाज
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    कीगल एक्सरसाइज

    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार ओवर एक्टिव ब्लैडर में कीगल एक्सरसाइज बेहद लाभकारी होती है। यह ब्लैडर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती हैं। इसके लिए आप चिकित्सक से भी सलाह ले सकते हैं। इस एक्‍सरसाइज को करने के लिए पेल्विक मांसपेशियों को 5 सेकंड तक पकड़ कर रखें और फिर धीरे से छोड़ें। इसे एक दिन में दस बार दोहरायें। आप इस एक्‍सरसाइज को बैठकर, खड़े होकर या घुटनों के बल लेटकर भी कर सकती हैं। शिशु के जन्‍म के बाद महिलाएं अपनी मांसपेशियों को टोन करने के लिए भी ये एक्‍सरसाइज करती है।
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    कीगल एक्सरसाइज
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    ब्‍लैडर ट्रेनिंग

    महिलाओं में ओवरएक्टिव ब्लैडर की समस्या में राहत पाने के लिए एक और एक्सरसाइज फायदेमंद है, इसे ब्‍लैडर ट्रेनिंग या ब्‍लैडर ब्रिल्स कहते है। एक्सरसाइज के दौरान बताया जाता है कि कैसे पेशाब को कंट्रोल करना है। अगर हर 15 मिनट बाद जाना पड़ता है तो कैसे इसे रोक कर 20 मिनट और 25 मिनट तक पहुंचाया जा सकता है। इसे ब्लैडर ट्रेनिंग कहते हैं। ये एक्सरसाइज आपके ब्‍लैडर को मूत्र रोकने में मदद करना सिखाती है। जब आपका ब्‍लैडर अधिक यूरीन रोकने लायक बन जाता है तो आप इन गतिविधियों पर ज्यादा काबू रख पाते हैं। इस एक्सरसाइज की मदद से आप एक हफ्ते के भीतर ही मूत्र को रोकने में अधिक सफल हो सकती है।  Image Courtesy : Getty Images

    ब्‍लैडर ट्रेनिंग
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    बायोफीडबैक (Biofeedback)

    बायोफीडबैक नामक तकनीक यह सुनिश्चित करने में मदद करती है, कि आप कीगल एक्सरसाइज ठीक प्रकार से कर रही हैं या नहीं। बायोफीडबैक में एक डिवाइस शामिल होता है, जो डॉक्टर को ये बताता है कि पेल्विक एक्सरसाइज के दौरान आप मसल्‍स को सही से सिकोड़ रही हैं, या नहीं। तो इन उपायों को आजमाकर आप शर्मिंदा होने से बच सकती हैं।  
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    बायोफीडबैक (Biofeedback)
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