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पुरुषों को सुबह और महिलाओं को रात में क्‍यों पसंद होता है सेक्‍स

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Sep 02, 2014
पुरुष अकसर सुबह सबसे ज्‍यादा कामुक महसूस करते हैं। और यही वह समय होता है जब महिलाओं में कामुकता अपने निचले स्‍तर पर होती है। आखिर क्‍या वजह है इसके पीछे। जानकार इसके पीछे हॉर्मोंस की क्रियाप्रणाली को जिम्‍मेदार मानते हैं।
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    सुबह क्‍यों सेक्‍स करना पसंद करते हैं पुरुष

    पुरुष सुबह सवेरे सबसे ज्‍यादा सेक्‍सी महसूस करते हैं। वे उस समय सेक्‍स करना चाहते हैं। लेकिन, यही वह वक्‍त होता है, जब महिलायें सोना चाहती हैं। आखिर ऐसा क्‍यों होता है। और क्‍यों जब बीती रात महिला प्रणय संबंध बनाने के मूड में थी, तो आप सोना चाहते थे। इन सबका संबंध हॉर्मोन से है। और शायद इसी वजह से हमारी सेक्‍स घड़ी हमेशा समय पर काम नहीं करती। image courtesy : getty images

    सुबह क्‍यों सेक्‍स करना पसंद करते हैं पुरुष
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    सुबह पांच बजे

    पुरुषों के सुबह सोकर उठने से पहले उनके टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर अपने उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच जाता है। यह स्‍तर 25 से 50 तक पहुंच जाता है। दिन भर में यह कभी भी इस अंक तक नहीं पहुंचता। असल में इसके पीछे पुरुषों की पिटूटेरी ग्रंथि उत्‍तरदायी होती है। यह ग्रंथि पुरुषों में सेक्‍स हॉर्मोन उत्‍पादित करती है। रात में यह सक्रिय हो जाती है और भोर तक अपनी उच्‍चतम स्‍तर पर पहुंच जाती है। image courtesy : getty images

    सुबह पांच बजे
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    महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरॉन

    महिलाओं में भी टेस्‍टेस्‍टेरॉन होता है, लेकिन उनमें इसका निर्माण बहुत कम होता है, और वह भी रात के समय। इसके साथ ही ऑस्‍टे्रोजेन और प्रोगेस्‍ट्रेरॉन के जरिये इसे संतुलित भी रखा जाता है। पुरुषों में काम की भावना जगाने के लिए टेस्‍टोस्‍ट्रेरॉन की थोड़ी सी मात्रा ही काफी होती है। सुबह के समय इसकी मात्रा अधिक होने का अर्थ यह है कि पुरुष सप्‍ताह में दो तीन बार स्‍तंभन के साथ उठेंगे।  image courtesy : getty images

    महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरॉन
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    सुबह छह बजे

    रात की अच्‍छी सुबह पुरुषों के अधिक कामुक महसूस करने का एक और कारण है। शोध में प्रमाणित हुआ है कि पुरुष जितना अधिक और गहरी नींद सोते हैं उनके टेस्‍टास्‍टेरॉन का स्‍तर उतना ही अधिक होता है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल के मुताबिक पांच घंटे से अधिक सोना पुरुषों में इस हॉर्मोन का स्‍तर 15 फीसदी तक बढ़ा सकता है। image courtesy : getty images

    सुबह छह बजे
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    सुबह सात बजे

    एक ओर जहां सुबह उठते ही पुरुषों के सेक्‍स हॉर्मोन अपने चरम पर होते हैं, वहीं महिलाओं में ये उस समय अपने निम्‍नतम स्‍तर पर होते हैं। पुरुष और महिला टेस्‍टोस्‍टेरॉन के स्‍तर विपरीत समय पर अपने चरम पर होते हैं। जानकारों का कहना है कि इसी कारण पुरुषों और महिलाओं के तारतम्‍यता नहीं होती। महिलाओं को सेक्‍स के लिए उत्‍तेजित करने में हॉर्मोन्‍स के अलावा अन्‍य कारकों की भी भूमिका होती है। तो इस लिहाज से पुरुषों को अधिक मेहनत करने की जरूरत होती है। image courtesy : getty images

    सुबह सात बजे
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    महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टॉन पर असर

    महिलाओं के हॉर्मोंस का स्‍तर उनके मासिक चक्र के आधार पर दिन भर में ऊपर नीचे होता रहता है। मासिक चक्र के मध्‍य में महिलाओं के शरीर में टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर शुरुआत की अपेक्षा 30 गुना तक अधिक होता है। image courtesy : getty images

    महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टॉन पर असर
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    आठ बजे सुबह

    इस समय महिला और पुरुष दोनों दिन भर की अपनी गति‍विधियों के लिए तैयार हो रहे होते हैं। ऐसे में तनाव हॉर्मोन कोर्टिसोल का बढ़ता स्‍तर सेक्‍स हॉर्मोन के प्रभाव को कम देता है। शोध में प्रमाणित हुआ है कि कोर्टिसोल महिलाओं और पुरुषों दोनों में कामेच्‍छा को कम कर देता है।  image courtesy : getty images

    आठ बजे सुबह
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    बॉडी क्‍लॉक से होता है प्रभावित

    जैसे-जैसे दिन बढ़ता है जो पुरुषों में धीरे-धीरे टेस्‍टोस्‍टेरॉन का निर्माण होता रहता है। यह हॉर्मोन मांसपेशियों के विकास और वीर्य निर्माण के लिए भी उत्‍तरदायी होता है। इसका स्‍तर हर 90 मिनट में ऊपर और नीचे होता रहता है। यह व्‍यक्ति की बॉडी क्‍लॉक पर निर्भर करता है।  image courtesy : getty images

    बॉडी क्‍लॉक से होता है प्रभावित
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    दोपहर 12 बजे

    आपके ऑफिस में कोई आकर्षक महिला आती है। और आप उसे देखकर आह भरते हैं। लेकिन इसके पीछे हॉर्मोंस नहीं बल्कि नर्वस सिस्‍टम काम करता है। किसी आकर्षक या खूबसूरत नजारे से रूबरू होते ही मस्तिष्‍क में फील-गुल ब्रेन न्‍यूरोट्रांसमीटर्स, एंडोरफिन्‍स का स्राव होता है। इससे पुरुष के जननांगों में रक्‍त स्राव बढ़ जाता है। सेक्‍स हॉर्मोंस को बढ़ने में अधिक समय लगता है। हालांकि, जब कोई ऐसा पुरुष जिसका टेस्‍टोस्‍टेरॉन बढ़ा हुआ है, वह किसी सेक्‍सी लड़की को देखता है, वह और चुलबुला हो जाता है। अमेरिका के मिशिगन स्थित वेयन स्‍टेट यूनिवर्सिटी जिस पुरुष में टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर अधिक होता है, महिलायें भी उस पुरुष को अधिक पसंद करती हैं।  image courtesy : getty images

    दोपहर 12 बजे
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    दोपहर एक बजे

    लंच के समय किसी छैल-छबीले पुरुष को देखकर महिलाओं में उत्‍तेजना का प्रवाह कम होता है। इसके विपरीत पुरुष किसी सेक्‍सी लडकी को देखकर अधिक उत्‍तेजित होते हैं। शोधों में यह बात प्रमाणित हुई है कि महिलाओं में अपने साथी के साथ सेक्‍स की संभावना के समय अधिक टेस्‍टोस्‍टेरॉन का निर्माण होता है।  image courtesy : getty images

    दोपहर एक बजे
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    शोध पर निकला नतीजा

    इस बात को जानने के लिए टेक्‍सॉस युनिवर्सिटी ने एक शोध किया। इसमें लॉन्‍ग डिस्‍टेंट रिलेशनशिप में शामिल महिलाओं ने पांच साल्विया सेम्‍पल दिये। पहला अपने साथी को देखने के दो सप्‍ताह बाद, सेक्‍स से एक दिन पहले, सेक्‍स के एक दिन बाद और सेक्‍स के दिन तीन बाद। शोध में सामने आया कि महिलाओं में अपने साथी से संभावित मुलाकात से एक दिन पहले टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर सबसे अधिक था।  image courtesy : getty images

    शोध पर निकला नतीजा
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    शाम छह बजे

    शाम को पुरुषों में टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर कम होने लगता है, जबकि इसी समय महिलाओं में सेक्‍स हॉर्मोंस धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। शोध में साबित हुआ है कि जिम के बाद महिलाओं और पुरुषों दोनों में कामेच्‍छा बढ़ सकती है। इसके साथ ही इस शोध में यह बात भी सामने आयी कि जिम के बाद सेक्‍स का समय 30 फीसदी ऑर्गेज्‍म की दर 26 फीसदी अधिक हो जाती है। टेक्‍सास यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक जिन महिलाओं ने 20 मिनट कार्डियो व्‍यायाम किया था वे कामुक फिल्‍म देखकर, व्‍यायाम न करने वाली महिलाओं की अपेक्षा अधिक उत्‍तेजित हुईं।  image courtesy : getty images

    शाम छह बजे
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    शाम सात बजे

    तनाव भरे दिन के बाद संगीत भी सेक्‍स हॉर्मोंस के स्‍तर को कम कर सकता है। जापान की नारा यूनिवर्सिटी के शोध के मुताबिक संगीत महिलाओं में टेस्‍टोस्‍टेरॉन के स्‍तर को काफी हद तक बढ़ा देता है, हालांकि पुरुषों में इसका विपरीत असर होता है। शोधकर्ताओं कहते हैं कि संगीत महिलाओं को शांत कर देता है। वे अधिक जुड़ाव महसूस करती हैं, इसलिए वे अधिक कामुक हो जाती हैं। वहीं संगीत पुरुषों के आक्रामक व्‍यवहार को शांत कर देता है, इससे उनके टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर कम हो जाता है। image courtesy : getty images

    शाम सात बजे
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    रात आठ बजे

    मान लीजिये पुरुष टीवी पर कोई महत्‍वपूर्ण मैच देख रहे हैं। ऐसे मैच के नतीजे भी उनके टेस्‍टोस्‍टेरॉन के स्‍तर को प्रभावित कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ उताह के शोध में खेल के दीवाने पुरुषों के साल्विया की जांच की गयी। इसमें पाया गया कि अगर पुरुषों की पसंदीदा टीम जीतती है तो उनके सेक्‍स हॉर्मोन का स्‍तर 20 फीसदी तक बढ़ जाता है। और अगर टीम हार जाए तो इस स्‍तर में 20 फीसदी की गिरावट भी आ सकती है। वहीं दूसरी ओर महिलायें खेल देखने के बजाय खेलकर ज्‍यादा उत्‍तेजित होती हैं। image courtesy : getty images

    रात आठ बजे
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    रात नौ बजे

    इस समय तक पुरुषों के टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर दिन के न्‍यूनतम स्‍तर पर पहुंच जाता है। और इसी समय महिलाओं के टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर बढ़ने लगता है। लेकिन, महिलाओं की कामेच्‍छा को समझना इतना आसान नहीं है। जानकार मानते हैं कि महिलाओं में सेक्‍स को प्रभावित करने वाली सबसे अहम चीज बॉडी इमेज होती है। अगर कोई महिला स्‍वयं को आकर्ष‍ित नहीं समझती, तो वह सेक्‍स के लिए तैयार नहीं होती। इसलिए पॉलीसाइकटिक ओवेरीज से प्रभावित उन महिलाओं, जिनमें टेस्‍टोस्‍टेरॉन का स्‍तर अधिक होता है, में भी कामेच्‍छा ज्‍यादा नहीं होती। वे स्‍वयं को ओवरवेट और अनाकर्षक मानती हैं। और इसलिए सेक्‍स हॉर्मोन अधिक होने के बावजूद वे सेक्‍स के लिए तैयार नहीं होतीं। image courtesy : getty images

    रात नौ बजे
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    रात दस बजे

    हालांकि इस दौरान पुरुषों के टेस्‍टेस्‍टेरॉन का स्‍तर काफी कम होता है। लेकिन इसके बावजूद वे सेक्स के लिए तैयार होते हैं। क्‍योंकि इस समय भी यह महिलाओं के स्‍तर से ज्‍यादा होता है। संभोग के दौरान यदि महिला का टेस्‍टेस्‍टेरॉन स्‍तर मासिक चक्र के कारण बढ़ जाए, तो उसका ऑर्गेज्‍म काफी अच्‍छा होगा। और साथ ही वह कामुकता का अहसास अपने पूरे शरीर पर करेगी। यदि यह स्‍तर कम हो, तो क्‍लाइमेक्‍स कम उत्‍तेजित करने वाला होगा और इसका प्रभाव भी सीमित ही रहेगा।  image courtesy : getty images

    रात दस बजे
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