क्‍यों होती है किशोरों में एसटीडीज होने की अधिक संभावना

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 01, 2014

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डब्‍ल्‍यूएचओ के अनुसार किशोरों में यौन सं‍चारित रोगों के फैलने की अधिक संभावना रहती है, और इसके मामले लगातार बढ़ भी रहे हैं।
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    किशोर और एसटीडीज

    किशोरों में यौन सं‍चारित रोगों के फैलने की अधिक संभावना रहती है, और इसके मामले लगातार बढ़ भी रहे हैं। विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक विश्‍वभर में प्र‍त्‍येक दिन ठीक हो सकने योग्‍य दस लाख से अधिक एसटीडीज के मामले सामने आते हैं, इनमें सबसे अधिक संख्‍या किशोरों (15-24) की है। दरअसल यौन संचरित रोग को लेकर किशोरों में गलतफहमी होती है जिसके कारण अनजाने में वे इसकी चपेट में आ जाते हैं।

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    कुछ शोध

    किशोरों में बढ़ रहे यौन संचारित रोगों को लेकर कई शोध हुए हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने इसके लिए 2005 से 2010 के बीच में 14-19 साल के किशोरों के खून की जांच की, इसमें एचएसवी-1 वायरस की संख्‍या अधिक मिली। हालांकि एचएसवी-1 वायरस कोल्‍ड सोर का कारण बनता है, लेकिन इस वायरस के कारण जेनिटल हर्पीज जैसे यौन संचारित रोग का कारण भी बनता है। किशोरों में यह असुरक्षित यौन संबंध बनाने से फैलता है।

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    शिक्षा का अभाव

    किशोरों में यौन संचारित रोगों के होने का एक प्रमुख कारण है, शिक्षा का अभाव। उनको इस बीमारी के बारे में जानकारी नहीं होती है और इसके कारण होने वाले नुकसानों का भी पता नहीं होता है। इसलिए यदि किशोंरों को सेक्‍स शिक्षा दी जाये तो उनको इस बीमारी से बचाया जा सकता है।

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    पब्लिक टॉयलेट के प्रयोग से

    अक्‍सर किशोरों को यह बीमारी सार्वजनिक शौचायल का प्रयोग करने से हो जाती है। किशोरों को यह भी जानकारी नहीं होती है कि यौन संचारित रोग किसी एसटीडीज से ग्रस्‍त मरीज के प्रयोग किये हुए टॉयलेट सीट का प्रयोग करने से भी उनको यह बीमारी हो सकती है। यदि यौन संचारित रोगी ने आपके बॉथरूम का प्रयोग किया है तो उसके तुरंत बाद उस बाथरूम का प्रयोग करने वाले व्‍यक्ति को यह बीमारी हो सकती है। हमेशा सार्वजनिक शौचालय का प्रयोग करने वाले किशोरों में इस संक्रमण के फैलने की आशंका अधिक होती है।

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    एक बार सेक्‍स संबंध

    किशोरों को यह लगता है कि यौन संचारित रोग एक बार सेक्‍स संबंध बनाने से नहीं फैलता है, उनको यह लगता है कि ऐसी बीमारियां केवल उन लोगों को होती हैं जो बार-बार सेक्‍स संबंध बनाते हैं केवल उनको ही यह रोग हो सकता है। जबकि ऐसा नहीं है, यदि आपने किसी ऐसे पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाये हैं जो क्‍लैमीडिया, गोनोरिया और सिफिलिस जैसी यौन सं‍चारित बीमारी से ग्रस्‍त है तो उससे आपको 30 प्रतिशत तक खतरा अधिक होता है।

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    ओरल सेक्‍स

    किशोरों को इस बात को लेकर बेफिकर रहते हैं कि यह बीमारी ओरल सेक्‍स के जरिये नहीं हो सकती है, और इसकी वजह से वे ओरल सेक्‍स करने से हिचकते नहीं। जबकि सच्‍चाई यह है कि यौन संचारित रोग या संक्रमण किसी भी तरह के सेक्स से हो सकते हैं इसलिए ओरल सेक्स से भी यह हो सकता है।

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    किसी से साझा न करना

    किशोर यौन संचारित रोग को लेकर हमेशा असमंजस में रहते हैं। उनको यह लगता है कि एसटीडीज ऐसी बीमारी है जिसके बारे में बात नहीं की जा सकती है। इसलिए वे इसके बारे में अपने अभिभावकों को नहीं बताते, इस बीमरी के बारे में बात करने में उनको शर्मिंदगी होती है। लेकिन ऐसा करने से इसका खतरा और बढ़ता है। इसलिए यदि इसके लक्षण दिखें तो इसके बारे में तुरंत सलाह कीजिए।

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    कंडोम का प्रयोग

    यह बीमारी असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होती है, इसलिए यौन संबंध बनाते वक्‍त कंडोम का प्रयोग करना चाहिए। लेकिन यदि आपको कंडोम के सही तरीके से प्रयोग करने की जानकारी नहीं है तो यह बीमारी आपको हा सकती है। किशोरों में यह समस्‍या अधिक होती है जिसके कारण वे एसटीडीज के संपर्क में आ जाते हैं। इसलिए यौन संबंध बनाने से पूर्व कंडोम के सही प्रयोग की जानकारी होना जरूरी है।

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    एक से अधिक पार्टनर

    यौन संचारित रोग एक से अधिक पार्टनर के साथ यौन संबंध बनाने से होता है। अक्‍सर किशोर एक से अधिक पार्टनर के साथ असुरक्षित तरीके से यौन संबंध बनाते हैं जिसके कारण वे इसकी चपेट में आ जाते हैं। किड्स हेल्‍थ डॉट कॉम के अनुसार किशोर कम उम्र में ही यौन संबंध बनाना शुरू कर देते हैं जिसकी वजह से उम्र बढ़ने के साथ उनके पार्टनर भी बढ़ते जाते हैं और उनमें एसटीडीज होने की संभावना भी बढती जाती है।

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    ड्रग्‍स और एल्‍कोहल

    नेशनल कैंपेन टू प्रीवेंट टीन एंड अनप्‍लांड प्रेग्‍नेंसी के द्वारा किये गये शोध के अनुसार, किशोर यौन संचारित रोग की चपेट में ड्रग्‍स और एल्‍कोहल के सेवन से भी आ सकते हैं, क्‍योंकि नशे में होने के बाद किशोर असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं और यही एसटीडीज का कारण बनता है।

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