आपको किस यौन संचारित रोग की जांच करवानी चाहिए और क्यों

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 10, 2014

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असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण फैले संक्रमण से यौन संचारित रोग यानी एसटीडीज होते हैं, यदि इनका समय पर इलाज न किया जाये तो कुछ मामलों में मौत तक हो सकती है।
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    यौन संचारित रोगों की जांच

    असुरक्षित यौन संबंध बनाने के कारण फैले संक्रमण से यौन संचारित रोग यानी एसटीडीज होते हैं। कुछ यौन संचारित रोगों का इलाज आसान है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आप उनको पहचानकर उनका इलाज समय से करायें। यदि इनका इलाज नहीं कराया जाये तो कुछ यौन संचारित रोग खतरनाक हो सकते हैं, जैसे क्लैमिडिया के कारण प्रजनन में असमर्थता और एचआईवी जानलेवा हो सकती है।

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    क्लैमिडिया

    यह ऐसी यौन संचारित बीमारी है जो क्लैमिडिया ट्रैकोमेटिस नामक जीवाणु से होती है। क्लैमिडिया मूत्र नली, योनि या गर्भग्रीवा के पास, सर्विक्स एरिया, गुदा या आंखों को संक्रमित कर सकती है। इसका इलाज आसान है। लेकिन यदि आप इसका इलाज नहीं कराते हैं, तो प्रजनन करने में बांझपन की समस्‍या हो सकती है। क्लैमिडिया, डिंबवाही नलिका तक फैल सकता है और उन्हें बंद कर सकता है। यदि आपकी डिंबवाही नलिकाएं बंद हो जाती हैं तो डिम्ब गर्भाशय तक नहीं जा सकते, इसलिए गर्भवती होना कठिन या असंभव हो जाता है। यह एक्टोपिक प्रेग्‍नेंसी की संभावना भी बढ़ाता है।

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    गोनोरिया

    गोनोरिया, निसेरिया गोनोरिये नामक बैक्टीरिया से होता है। यह बहुत तेजी से फैलता है। यह गले, मूत्र नली, योनि और गुदा को संक्रमित कर सकता है। यदि आप गोनोरिया का इलाज नहीं कराती हैं तो प्रजनन करने में असमर्थता हो सकती है, यह क्लैमिडिया की तरह डिंबवाही नलिकाओं तक फैल सकता है। ऐसा होने पर पेट के आस-पास सूजन हो सकती है और आपको पेट में दर्द महसूस होगा। जब यह बढ़ता है तो डिंबवाही नलिकाओं में घाव कर देता है और डिंब के गर्भाशय में जाने वाले रास्ते को बंद कर सकता है। कुछ समय बाद यह संक्रमण आपको प्रजनन में असमर्थ बना देता है।

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    सिफि़लिस

    यह एक ऐसी यौनसंचारित रोग है जो ट्रिपोनीमा पैलीडियम नामक जीवाणु की वजह से फैलता है। सिफि़लिस के लक्षण संक्रमण के तीन महीनों के भीतर दिख जाते हैं। यह महिलाओं तथा पुरुषों दोनों में ही उनके जननांगों पर हो सकता है, इसके कारण बिना दर्द वाले एक या दो फोड़े या दानें निकलते हैं, इन दानों को शैंकर्स भी कहते हैं। सिफि़लिस का इलाज आसानी से किया जा सकता है, लेकिन अधिकांश संक्रमित व्यक्तियों को पता नहीं चलता कि उन्हें सिफि़लिस हो गया है। यदि आप सिफि़लिस का इलाज नहीं कराते हैं तो आगे चलकर अंधेपन का शिकार हो सकते हैं, दिमागी संतुलन बिगड़ सकता है अथवा मृत्यु भी हो सकती है।

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    एचआईवी

    एचआईवी, ह्यूमन इम्यूनोडेफिसिएन्सी वायरस का संक्षिप्त रूप है, जिसके कारण एड्स होता है। यह ऐसा यौनसंचारित रोग है जो समय के साथ व्‍यक्ति की प्रतिरोधक क्षमता को नष्ट कर देता है, एचआईवी प्रतिरोधक क्षमता को इतना अधिक नुकसान पहुंचा देता है कि मरीज दूसरे संक्रमण से निपटने में असमर्थ हो जाते हैं। एचआईवी संक्रमण की अंतिम अवस्था में ही एड्स होता है। यह एक जानलेवा बीमारी है, आजकल जो व्यक्ति एचआईवी से संक्रमित है और इलाज करा रहे हैं वह एड्स होने से पहले 20 वर्षों तक जीवित रह सकते हैं।

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    हेपिटाइटिस-बी

    यह लीवर को संक्रमित करता है, जो हेपिटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के संक्रमण के कारण होता है। हालांकि अधिकांश मरीजों का शरीर बिना किसी इलाज के हेपिटाइटिस-बी के संक्रमण से लड़ सकता है। लेकिन जो लोग वायरस से नहीं निपट पाते हैं उन्हें पूरे जीवन भर के लिए संक्रमण यानी क्रोनिक हेपिटाइटिस-बी हो जाता है। इन लोगों का लीवर हमेशा के लिए खराब हो सकता है और कुछ मरीजों की मौत भी हो सकती है।

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    वाटर वाटर्स

    यह यौन संक्रमित रोग मोलस्कम कान्टेजिओसम नामक वायरस से होते हैं। यह एक आम विषाणु संक्रमण है जो चमड़ी पर बुरा असर डालता है। यदि आप संक्रमित हो जाते हैं, तो आपकी चमड़ी पर द्रव या पानी से भरे फफोले निकल आते हैं। आम तौर पर आपका शरीर त्वचा पर होने वाले संक्रमण से 6 से 18 महीनों में अपने-आप खतम हो जाते हैं, लेकिन यदि आपने इसके इलाज में कोताही बरती तो यह पूरे शरीर में हो सकते हैं।

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    जेनिटल हर्पीज

    यह ऐसा यौन संचारित रोग है, जो दो अलग-अलग तरह के हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस से होते हैं। यह ठंड के कारण हुए छालों या फफोलों की तरह दिखते हैं। यदि आप जेनिटल हर्पीज से संक्रमित हैं तो इसकी वजह से लिंग, योनि या गुदा के आस-पास छाले हो सकते हैं। जब छाले फूटते हैं तो वहां घाव बन जाते हैं। ये छाले कुछ हफ्तों या महीनों के अंतर पर फिर से निकल सकते हैं। एक बार जब आप एचएसवी-1 या एचएसवी-2 से संक्रमित हो जाते हैं, तो आप पूरे जीवन भर इनसे संक्रमित रहते हैं। जेनिटल हर्पीज का कोई इलाज नहीं है, केवल छालों को दबाया जा सकता है।

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    ट्राइकोमोनिएसिस

    इसे ‘ट्रिक’ के नाम से भी जाना जाता है। यह यौन संचारित रोग, महिलाओं एवं पुरुषों, दोनों को प्रभावित करता है लेकिन महिलाओं में इनके लक्षण दिखने की संभावना अधिक होती है। यदि आप ट्रिक से संक्रमित हो जाते हैं तो इसका इलाज आसानी से किया जा सकता है, यदि महिलाओं का इलाज न कराया जाए तो कुछ एक मामलों में वे इसके कारण प्रजनन में असमर्थ हो सकती हैं। इालाज न कराने पर मूत्र नली में संक्रमण हो सकता है।

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    स्कैबीज

    स्कैबीज एक-दूसरे के शरीर के संपर्क में आने से पड़ते हैं, यह यौन संबंध के कारण अधिक फैलता है। इस बीमारी के फैलने का दूसरा कारण स्कैबीज से संक्रमित किसी व्यक्ति के कपड़े, बिस्तर या फर्नीचर का प्रयोग करना है। स्कैबीज के अंडो और मल से होने वाले एलर्जिक प्रतिक्रिया के कारण आपको दाने या मुंहासे होते हैं। इसका इलाज किया जा सकता है। इस बीमारी में व्‍यक्ति की चमड़ी पर हल्की खुजली हो सकती है, उसके बाद यह पूरे शरीर पर तेज खुजली का रूप ले सकती है। यह खुजली खासकर रात में या गर्म पानी से नहाने के बाद और अधिक बढ़ जाती है।

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