आखिर क्‍यों आप होते हैं किसी के प्‍यार में गिरफ्तार

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 08, 2014

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वो पूछते हैं मोहब्‍बत नाम है किसका। ये कहां से शुरू होती है। कौन इसे पैदा करता है और आखिर इसका अंजाम क्‍या होता है। सवालों की इस लंबी झड़ी का सबके पास अलग-अलग जवाब है।
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    प्‍यार नाम है किसका

    वो पूछते हैं मोहब्‍बत नाम है किसका। ये कहां से शुरू होती है। कौन इसे पैदा करता है और आखिर इसका अंजाम क्‍या होता है। सवालों की इस लंबी झड़ी का सबके पास अलग-अलग जवाब है। कोई इसे दिल की कारस्‍तानी बताता है, तो किसी की नजर में इश्‍क कहते हैं जिसे कुछ नहीं खलल दिमाग का है। कोई मन के तारों से इसकी बुनावट करता है, तो किसी की नजर में यह वक्‍त की बर्बादी है। लेकिन, सवाल तो वहीं है, आखिर क्‍या है यह प्‍यार, यह कैसे होता है, और क्‍यों होता है। इन्‍हीं के जवाबों के बारे में जानिये इस स्‍लाइड शो में। Image courtesy : getty images

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    प्‍यार की वजह

    रोमांस इनसानी जीवन का अहम हिस्‍सा है। इनसान को बनाया ही इस तरह गया है कि वह विपरीत सेक्‍स के प्रति आकर्ष‍ित हो। तभी शायद अर्द्धनारीश्‍वर की परिकल्‍पना का‍ विचार उत्‍पन्‍न हुआ होगा। यही तो मानवीय रिश्तों और कामुकता की कुंजी है। यही तो धरती पर इनसानी जीवन के लगातार चलयामान बने रहने का आधार है। आमतौर पर पुरुष और महिला दोनों रोमांस के फूलों की महक का आनंद लेते हैं। और जवानी में ही सबसे पहले प्रेम की कोपलें फूटती हैं। Image courtesy : getty images

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    यौन परिपक्‍वता

    रोमांस में यौन परिपक्‍वता की कोई भूमिका नहीं होती। यौवन की कलियां खिलने से पहले ही कई लोगों को रोमांस का अहसास होने लगता है। रोमांस वास्‍तव में मनोवैज्ञानिक कारणों से होता है। और इसका आधार बचपन से ही तय होने लगता है। प्‍यार के पीछे दिल और दिमाग के साथ ही कई सामाजिक और मनोवैज्ञानिक पहलू भी काम करते हैं। image courtesy : getty images

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    फेरोमोन्स और हार्मोन

    किसी को देखकर आप उसकी ओर खिंचने लगते हैं। इसके पीछे फेरोमोन और हार्मोंन उत्‍तरदायी होते हैं। मानवीय रिश्‍तों पर किए कुछ शोधों के अनुसार, कुछ फेरोमोन और हार्मोंन विपरीत सेक्‍स को एक दूसरे की तरफ आ‍कर्षित करने और रिश्‍ते में बांधने में म‍हत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन फेरोमोन को गंध से मुक्त वेरिएंट कहा जाता है, और इन्‍हें जैविक नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया द्वारा पहचाना जाता है।  image courtesy : getty images

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    ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन

    ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन मनुष्य में रोमांस की भावना को बढ़ावा देने वाले अन्‍य दो हार्मोन हैं। हो सकता है कि आपको हैरानी हो कि आखिर हॉर्मोन कैसे रोमांस के कारण हो सकते हैं। फिर ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर हम हर किसी की ओर आकर्षित क्‍यों नहीं होते। तो इसका जवाब है सही संयोजन। एक व्यक्ति में भावना केवल हार्मोन के कुछ संयोजन की समानता के कारण विकसित होती है। यही कारण आप केवल कुछ लोगों के साथ प्यार में पड़ते हैं। image courtesy : getty images

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    मनोवैज्ञानिक पहलू

    प्‍यार मानवीय रिश्‍तों का मनोवैज्ञानिक तत्‍व है। और इसी वजह से किसी के मन में उत्‍पन्‍न रोमांस की प्रवृत्ति‍ को समझ और जान पाना बहुत मुश्किल होता है। लेकिन कुछ मनोवैज्ञानिक पहलू लोगों को प्‍यार में गिरफ्तार करवा सकते हैं। जैसे समानता की भावना रोमांस की भावना को अंकुरित करने वाला एक प्रमुख मनोवैज्ञानिक पहलू है। इसके अलावा लंबी अवधि तक अपने ही जैसे स्‍वभाव और मन वाले लोगों के संपर्क में रहने पर भी लोग उन के प्रति खुद के भीतर रोमांस महसूस करते हैं। image courtesy : getty images

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    प्‍यार के प्रकार

    मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों के अनुसार, प्‍यार दो तरह से हो सकता है, दयापूर्ण प्‍यार और आवेशपूर्ण प्‍यार। दयापूर्ण या अनुकंपा प्‍यार आपसी समझ, सम्‍मान और शेयरिंग से उत्‍पन्‍न होता है। जबकि दूसरी ओर आवेशपूर्ण प्‍यार तीव्र यौन इच्छाओं, चिंता और स्नेह पर आधारित होता है। प्रत्येक प्यार या रिश्ता इन मनोवैज्ञानिक कारणों से किसी की शह होता है। image courtesy : getty images

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    शारीरिक आकर्षण

    शारीरिक आकर्षण रोमांटिक संबंधों के पीछे एक और कारण है। एक सामान्य आदमी या औरत को समय की पूर्ति के लिए विपरीत लिंग की ओर आकर्षित करने के लिए बनाया गया है। लेकिन सभी पुरुष या महिला एक ही तीव्रता से एक दूसरे की ओर आकर्षित नहीं होते हैं। कुछ को अधिक सुंदर और सेक्‍सी, तो दूसरों को कम लग सकता है। image courtesy : getty images

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    सुंदरता का पैमाना

    कहते हैं खूबसूरती देखने वालों की आंखों में होती है। आखिर, श्‍याम वर्ण लैला के पीछे कैस मजनू होकर घूमता रहता है। लोगों की समानता मस्तिष्क में बनती है, और सौंदर्य और यौन छवियों और विचारों के अनुसार व्‍यक्ति अपने मन में पैदा करता है। सौंदर्य की अवधारणा लोगों से लोगों में भिन्‍न-भिन्‍न होती है। कुछ की राय में स्लिम होना सेक्‍सी है, जबकि दूसरे का नजरिया अलग है। image courtesy : getty images

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    सामाजिक कारण

    मनुष्‍य आज जिस समाज में रहता है, वहां मानवीय रिश्‍तों को लेकर स्‍पष्‍ट परिभाषायें मौजूद हैं। समाज आज भी परिवार को महत्‍वपूर्ण ईकाई मानता है। जहां बच्‍चों की परवरिश इस प्रकार की जाती है, ताकि वे भविष्‍य के जिम्‍मेदार नागरिक बन सकें। यौवन की उम्र तक पहुंच कर बच्‍चा अपने चारों ओर पुरुष और महिला के संबंधों को देखता है और धीरे-धीरे वह स्‍वयं भी इससे जुड़ने का प्रयास करता है। image courtesy : getty images

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    मीडिया के सहारे

    सोसायटी, जीवन और मीडिया के माध्‍यम से बच्‍चे में पुरुष और महिला संबंधो के विचार का समावेश होता है। और वह अपने भीतर प्‍यार में पड़ने की जरूरत महसूस करने लगता है। समाज की खुलती बंदिशें लड़के और लड़कियों में बातचीत करने के लिए अधिक से अधिक संभावनायें पैदा करती हैं। ये बातें बच्‍चों की सबसे प्रिय बनकर आसानी से उन्‍हें प्‍यार करने में मदद करती है। पारिवारिक वातावरण प्‍यार में पड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है।  image courtesy : getty images

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    माता-पिता की व्‍यस्‍तता

    माता-पिता व्‍यस्‍त कार्यक्रम के चलते अपने बच्‍चों की देखभाल के लिए समय नहीं निकाल पाते। इस प्रकार देखभाल और प्यार प्राप्‍त करने की उस खाली जगह को बाकी लोग भरते हैं। एक सिद्ध तथ्‍य हैं कि जिन बच्‍चों की घर में कम परवाह होती है, वह अन्‍य लोगों की तुलना में प्‍यार के रिश्‍तों में बहुत जल्‍दी पड़ते हैं। वह रोमांटिक रिश्‍ते में प्‍यार के आग्रह को संतुष्‍ट करते हैं। लेकिन यह असुरक्षा और अप्रिय भावनाओं अक्सर बच्चों में अस्वस्थ रिश्तों के साथ खत्म हो रही है। जहां रोमांस का संबंध होता है, जब सामाजिक कारण, मनोवैज्ञानिक या हार्मोनल कारणों की तुलना में अधिक दिखाई देता हैं।  image courtesy : getty images

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