जानिए क्या है यूरेथ्राइटिस, इसके लक्षण व कारण

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 10, 2013

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यूरेथ्राइटिस एक यौन संचारित रोग है। यह यूरेथ्रा में सूजन के कारण हो सकता है। और यूरेनरी ब्‍लैडर के नीचे स्थित होता है। इसके लक्षण और कारणों के बारे में जानें इस स्‍लाइड शो में।
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    क्‍या है यूरेथ्राइटिस

    यूरेथ्राइटिस यूरेथ्रा में सूजन के कारण हो सकता है। यह सूजन किसी भी वजह से हो सकती है। यूरेथ्रा यूरेनरी ब्‍लैडर के नीचे स्थित होता है। यह रोग महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकता है। चोट और यौन संक्रमण इस रोग के प्रमुख कारण हो सकते हैं। पुरुषों में इसे गोनोकोकक्‍ल और नॉनगोनोकोकक्‍ल श्रेणी में बांटा जा सकता है।

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    यूरेथ्राइटिस के लक्षण

    पेशाब अथवा सीनम में रक्‍त आना, मूत्र विसर्जन के दर्द होना इसके लक्षण है। इसके अलावा जल्‍दी-जल्‍दी पेशाब आना, जननांग और उसके आसपास खुजली, कोमलता अथवा सूजन होना, संभोग अथवा स्‍खलन के दौरान दर्द होना, मूत्र विसर्जन करते समय पेट में दर्द होना, श्रोणि दर्द व योनि स्राव होना आदि इसके लक्षण होते हैं। कुछ मामलों में बुखार भी इसका लक्षण हो सकता है।

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    क्‍यों होता है यूरेथ्राइटिस (कारण)

    जननांग या उसके आसपास कोई चोट लगने के कारण यह रोग हो सकता है। पुरुषों में 20 से 35 वर्ष की आयु के बीच में अधिक नजर आती है। अति असुरक्षित यौन संबंध स्‍थापित करना (जैसे बिना कण्‍डोम के गुदा मैथुन करना)। इसके अलावा यदि किसी व्‍यक्ति को पहले भी कोई यौन रोग हो चुका है, तो उसे यह रोग होने की आशंका अधिक होती है। एक से अधिक साथियों के साथ शारीरिक संबंध स्‍थापित करना। महिलाओं में रिप्रोडक्टिव वर्षों के दौरान यह रोग हो सकता है।

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    बैक्‍टीरिया और वायरस भी हो सकते हैं कारण

    यूरेथ्राइटिस बैक्‍टीरिया और वायरस के कारण भी हो सकता है। ई. कोली बैक्‍टीरिया, जो यूरीनेरी ट्रेक्‍ट इंफेक्‍शन की वजह होता है उसी के कारण यह रोग भी हो सकता है। और इसके अलावा क्‍लाइमेडिया और गोनोरेहा जैसे यौन संचारित रोग आगे चलकर थरेथ्राइटिस की वजह बन सकते हैं। इसके साथ ही हरपस सिम्‍प्‍लैक्‍स वायरस और कायटोमेगालोवायरस भी इसकी वजह हो सकता है।

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    यूरेथ्राइटिस की जांच

    पेशाब करते समय दर्द होने पर डॉक्‍टर एंटीबायोटिक दवा दे सकता है। डॉक्‍टर जननांगों, पेट के निचले हिस्‍से और मलाशय की जांच कर सकता है। पेशाब की जांच के जरिये भी इसका पता लगाया जा सकता है। किसी भी प्रकार के स्राव की जांच भी रोग की पुष्टि में सहायक होती है। हालांकि यूरेथ्राइटिस का पता लगाने के लिए आमतौर पर रक्‍त जांच की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ मामलों में यह की जा सकती है।

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    यूरेथ्राइटिस का निदान

    सही जांच और इलाज के जरिये इस रोग का इलाज किया जा सकता है। आमतौर पर इस रोग से किसी प्रकार का बड़ा खतरा नहीं होता। हालांकि यूरेथ्रा‍इटिस कुछ मामलों में यूरेथ्रा को स्‍थायी क्षति पहुंचा सकता है। यह नुकसान पुरुषों और महिलाओं दोनों में हो सकता है। इसलिए इस रोग को हल्‍के में नहीं लेना चाहिए।

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    यूरेथ्राइटिस से बचाव

    इस रोग के कुछ कारणों से बचा जा सकता है। आप खुद को हाइजीन रखें। सुरक्षित सेक्‍स करें। अपने साथी के प्रति वफादार रहें। और संभोग के दौरान कण्‍डोम का प्रयोग करें। किसी भी प्रकार का लक्षण नजर आने पर बिना देर किये चिकित्‍सीय सलाह लें।

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    कैसे होता है इलाज

    संक्रमण के कारणों से दूर रहें। सुरक्षित संभोग करें। यदि आप एक से अधिक व्‍यक्तियों के साथ संसर्ग करते हैं, तो आपको यौन रोग होने की आशंका हमेशा अधिक होती है। कई मामलों में डॉक्‍टरों को उचित कारण का पता नहीं पाता इस सूरत में डॉक्‍टर एक या उससे अधिक एंटीबॉयोटिक दवायें दे सकता है, जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

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    सलाह

    डॉक्‍टर के पूछने पर उसे संभावित कारण बिना हिचक बतायें। अगर आपको डॉक्‍टर के इलाज से फायदा न हो रहा हो, तो उसे इस बारे में अवश्‍य सूचित करें। इलाज के बाद कम से कम एक सप्‍ताह तक सेक्‍स (ओरल सेक्‍स भी) से दूर रहने की कोशिश करें। क्‍योंकि इससे आपके साथी को भी संक्रमण होने का खतरा बना रहता है।

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    खतरे

    अंडकोषों और प्रोस्‍टेट ग्रंथि में सूजन,  सूजाक, जैसे नेत्रश्लेष्मलाशोथ, त्वचा के घावों के प्रणालीगत प्रसार, रिएक्टिव गठिया, श्रोणि जलन बीमारी (पीआईडी​​) व अन्‍य जटिलताओं के साथ रिटर सिंड्रोम का खतरा भी इस रोग के साथ आता है। सही समय पर इलाज न किया जाए तो एचआईवी संचरण की वृद्धि का खतरा भी बना रहता है।

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