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क्‍या है प्रियपिज्‍म, इसके कारण और लक्षण

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 26, 2014
प्रियपिज्‍म एक प्रकार की यौन समस्‍या है जो लगभग चार घंटे तक रहतती है, इसके कारण लगातार दर्द होता है, इस वक्‍त व्‍यक्ति के मन में यौन इच्‍छा और यौन उत्‍तेजना बिलकुल भी नहीं होती।
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    क्‍या है प्रियपिज्‍म

    यह एक प्रकार की यौन समस्‍या है जो लगभग चार घंटे तक रहता है। इसकी वजह से लगातार दर्द होता है। इस दौरान व्‍यक्ति के मन में यौन इच्‍छा और यौन उत्‍तेजना बिलकुल भी नहीं होती। अगर इस बीमारी से ग्रस्‍त कोई व्‍यक्ति पार्टनर के साथ बेड पर है तब भी उसे यौन इच्‍छा नहीं होगी। इस समस्‍या के होने पर पेनिस में रक्‍त फंस जाता है और वह निकल नहीं पाता। अगर इस समस्‍या का उपचार न किया जाये तो यह स्‍थायी इरेक्‍टाइल डिसफंक्‍शन यानी स्‍तंभन दोष का कारण बन सकता है।

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    क्‍या है प्रियपिज्‍म
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    किस उम्र में होता है

    यह समस्‍या किसी भी उम्र में व्‍यक्ति को अपना शिकार बना सकती है। यह नवजात बच्‍चों को भी हो सकता है। इसके लिए एक निश्चित उम्र का निर्धारण नहीं हुआ है। इसे दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है - लो फ्लो और हाई फ्लो यानी कम प्रवाह और उच्‍च प्रवाह।

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    किस उम्र में होता है
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    कम प्रवाह

    प्रियपिज्‍म के इस प्रकार में जननांगों के निर्माण कक्ष में जहां से स्‍तंभन होता है वहां पर रक्‍त फंस जाता है। यह ऐसी समस्‍या है जो किसी को भी हो सकती है, यह किसी स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति को भी हो सकती है। लेकिन इसकी समस्‍या ज्‍यादातर उन लोगों को होती है जो सिकल सेल रोग, रक्‍त कैंसर (ल्‍यूकीमिया) या मलेरिया से ग्रस्‍त होते हैं।

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    कम प्रवाह
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    उच्च प्रवाह

    यह समस्‍या लो फ्लो की तुलना में कम देखी जाती है और यह आम तौर पर कम कष्‍टकारक होती है। यह सामान्‍य रूप से खून को पेनिस के आसपास खून को जमा होने से रोकता है, अंडकोष की थैली और गुदा के बीच के हिस्‍से के आसपास यह खून नहीं जमने देता है।

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    उच्च प्रवाह
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    रक्‍त संबंधित समस्‍या के कारण

    किसी भी प्रकार की खून संबंधित समस्‍या के कारण यह यौन रोग होता है। दरअसल जब रक्‍त का संचार अच्‍छी तरह से पेनिस में नहीं हो पाता तब यह समस्‍या होती है। सिकल सेल एनीमिया और ल्‍यूकीमिया से ग्रस्‍त लोगों में यह समस्‍या अधिक देखी जाती है।

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    रक्‍त संबंधित समस्‍या के कारण
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    दवाओं के साइड-इफेक्‍ट

    दवाओं के साइड-इफेक्‍ट के कारण भी यह समस्‍या होती है। तनाव और अवसाद के लिए प्रयोग की जाने वाली दवाओं के सेवन से यह समस्‍या होती है। मनोवैज्ञानिक बीमारी के उपचार के दौरान प्रयोग की जाने वाली दवायें इसका कारण बन सकती हैं। खून को पतला करने वाली दवा (वारफेरिन) के कारण भी प्रियपिज्‍म हो सकता है। शराब के सेवन से भी यह समस्‍या हो सकती है।

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    दवाओं के साइड-इफेक्‍ट
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    चोट के कारण

    अगर कोई ऐसी चोट जो रक्‍त संचार को प्रभावित करती है वह प्रियपिज्‍म का कारण बन सकती है। क्‍योंकि इस चोट के कारण पेनिस की तरफ रक्‍त का संचार प्रभावित होता है और यह प्रियपिज्‍म का कारण बनता है।

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    चोट के कारण
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    इस्‍कीमिक प्रियपिज्‍म के लक्षण (Ischemic priapism)

    इसे लो-फ्लो प्रियपिज्‍म भी बोलते हैं। यह प्रियपिज्‍म का सबसे सामान्‍य कारण हैं जो सबसे अधिक देखा जाता है। इसमें चार घंटे या उससे अधिक समय तक इरेक्‍शन होता है, लिंग का कठोर होना, लिंग में दर्द होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।

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    इस्‍कीमिक प्रियपिज्‍म के लक्षण (Ischemic priapism)
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    नॉन-इस्‍कीमिक प्रियपिज्‍म के लक्षण (Nonischemic priapism)

    यह हाई-फ्लो प्रियपिज्‍म है जिसमें अधिक मात्रा में खून का प्रवाव लिंग में होता है। यह वास्‍तव में दर्दरहित होता है। कम से कम चार घंटे तक चलने वाला अवांछित इरेक्‍शन, इसमें पेनिस कठोर नहीं होता लेकिन उसमे उत्‍तेजना नहीं आती।

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    नॉन-इस्‍कीमिक प्रियपिज्‍म के लक्षण (Nonischemic priapism)
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