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पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) क्‍या है

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 23, 2014
पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) महिलाओ के प्रजनन अंगों का संक्रमण है। यह गर्भाशय, अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या अन्य महिला प्रजनन प्रणाली को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
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    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी​​)

    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) महिलाओ के प्रजनन अंगों का संक्रमण है। इससे गर्भाशय, डिम्‍बवाही ट्यूबों और अंडाशय में संक्रमण और सूजन आ जाती है। इस बीमारी से इनमें से कोई एक अथवा सभी अंग प्रभावित हो सकते हैं। इस रोग में आमतौर पर योनि का संक्रमण गहरे आंतरिक प्रजनन अंगों में फैल जाता है।

    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी​​)
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    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के कारण

    पीआईडी कई प्रकार के जीवाणुओं से होता है, लेकिन इसका मुख्‍य कारण यौन संचरित संक्रमण होता है। यह संक्रमण गर्भाशय ग्रीवा से डिम्बवाही ट्यूबों तक फैलता है और इसके कारण सूजन ट्यूबों तक हो जाती है।

    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के कारण
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    पीआईडी का प्रभाव

    पीआईडी के कारण ट्यूबों की सतह लाल होकर सूज जाती है और पहले से ही छोटी ट्यूब और भी छोटी हो जाती है। इस संक्रमण से नलियों के भीतर घाव हो जाते हैं और ब्लॉक होने के कारण निषेचित अंडे की सामान्य चलन गति पर प्रभाव पडता है।

    पीआईडी का प्रभाव
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    सूजन की शिकायत

    योनि के भीतर विकसित संक्रमण से ट्यूबों में गंभीर संक्रमण शुरू हो जाता है। समय पर इलाज न होने पर संक्रमण फैल जाता है और डिम्बवाही ट्यूबों की दीवारों में सूजन आ जाती है। इलाज न होने पर यह नलियों की बाहरी सतहें से आस-पास के अंगों जैसे मूत्राशय और मलाशय से चिपकना शुरू हो जाता है।

    सूजन की शिकायत
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    पीआईडी के लक्षण

    पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के लक्षण दूसरे यौन संचारित रोगों के समान होने के कारण इसके लक्षणों का पता नहीं चलता है। लेकिन फिर भी इसके लक्षणों में योनि से बदबूदार गाढ़ा या असामान्य स्राव, लंबे समय से हल्‍का-हल्‍का बुखार या अचानक तेज बुखार और उल्टी, यूरीन करने में असुविधा और दर्द, संभोग के दौरान परेशानी या दर्द, पेट और पीठ में दर्द आदि शमिल होते हैं।

     

     

    पीआईडी के लक्षण
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    पीआईडी के जोखिम

    पीआईडी एक संक्रमण का परिणाम होता है जो योनि के आस-पास के अंग या ब्‍लड के माध्‍यम से फैल जाता है। आमतौर यौन संचारित रोगों के साथ महिलाओं को विशेष रूप से पीआईडी​​, गोनोरिया और क्लामिडिया के विकास के लिए बड़ा खतरा है। कई यौन साथी के साथ यौन सक्रिय किशोरों और महिलाओं में भी पीआईडी ​​विकसित होने की संभावना अधिक रहती हैं। 

     

    पीआईडी के जोखिम
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    पीआईडी के लिए टेस्‍ट

    अभी तक पीआईडी के निदान के लिए कोई भी परीक्षण उपलब्‍ध नहीं है। फिर भी इसके लक्षणों का निदान स्त्री रोग चिकित्सक द्वारा होता है। सामान्यतः योनि और गर्भाशय ग्रीवा के अंदर रूई का इस्‍तेमाल करके नमूना लिया जाता है। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड स्कैन भी रोग की पुष्टि के लिए आवश्यक हो सकता है।

    पीआईडी के लिए टेस्‍ट
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    संभावित जटिलताएं

    पीआईडी में जटिलताओं की संभावना कम रहती है, अगर इसका निदान और इलाज समय पर कर लिया जाये। गर्भवती होने में कठिनाई, फैलोपियन ट्यूब का क्षतिग्रस्त होना, अस्थानिक गर्भावस्था आदि पीआईडी ​​के साथ जुड़े जटिलताओं में से कुछ हैं।

    संभावित जटिलताएं
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    उपचार

    पीआईडी ​​का एंटीबायोटिक के एक कोर्स के साथ इलाज किया जा सकता है। एक से अधिक एंटीबायोटिक का इस्‍तेमाल कर बैक्टीरिया (बैक्टीरिया के कारण पीआईडी) की रेंज को कवर किया जा सकता है। पीआईडी ​​संदिग्ध होने के बाद उपचार तुरंत शुरू हो सकता है। पीआईडी में जल्‍द इलाज, बेहतर देखभाल और कभी कभी ऑपरेशन की जरूरत होती है।

    उपचार
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    रोकथाम

    पीआईडी को रोकने के लिए सबसे प्रभावी तरीका है, यौन संबंध एक ही पार्टनर के साथ बनाएं, यौन संबंध बनाते समय कंडोम का इस्‍तेमाल करें और नियमित रूप से यौन स्वास्थ्य की जांच करायें।

    रोकथाम
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    पुनरावृत्ति

    पीआईडी आपको भविष्‍य में दोबारा हो सकता है। हालांकि इसकी पुनरावृत्ति पांच में से केवल एक को ही होती है। ठीक से साथी के इलाज ना होने, असुरक्षित यौन संबंध या एंटीबायोटिक दवाओं का कोर्स सही तरीके से ना लेने से पीआईडी की पुनरावृत्ति आमतौर पर दो साल के भीतर ही हो जाती है।

    पुनरावृत्ति
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    जागरूकता फैलाएं

    जागरूकता पीआईडी ​​को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके लिए पीआईडी ​​कैसे होता है, एसटीडी के जोखिम और इसके लक्षणों की जागरूकता के बारे में अपने साथी के साथ चर्चा करें। हालांकि एसटीडी के बारे में बात करना थोड़ा मुश्किल काम है, लेकिन किसी भी अन्य चिकित्सा मुद्दे की तरह, किशोर को इसकी सुरक्षित और स्वस्थ जानकारी की जरूरत है। इसके अलावा, नियमित रूप से पूर्ण शारीरिक परीक्षण कराना भी महत्वपूर्ण है।

    जागरूकता फैलाएं
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