लेथोलॉजिका नामक बीमारी के रहते कुछ शब्‍द नहीं बोल पाते हम

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 25, 2016

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क्‍या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी शब्‍द को याद कर रहे हो और वह दिमाग में आकर भी आपकी जुबा पर नहीं आ पाते। अगर ऐसा है तो इस समस्‍या को नजरअंदाज न करें क्‍योंकि ये एक बीमारी है।
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    जुबा पर नहीं आ पाते कुछ शब्‍द

    क्‍या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी शब्‍द को याद कर रहे हों और वह दिमाग में आकर भी आपकी जुबा पर नहीं आ पाते। ऐसा आपके साथ हुआ होगा। ऐसा लगभग सबके साथ होता है। बार-बार वह शब्‍द आपकी जुबां पर होने के बावजूद बाहर नहीं आ पाता। वैसे मिलते-जुलते कई शब्‍द आपके मन में आते हैं, मगर लाख कोशिश करने के बावजूद वह विशेष शब्‍द आपको समझ में नहीं आता और आप झुंझलकार रह जाते हैं। लेकिन इस समस्‍या को नजरअंदाज न करें क्‍योंकि ये एक बीमारी है।

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    लेथोलॉजिका में हम भूल जाते हैं शब्‍द

    वैज्ञानिकों ने इस बीमारी का नाम लेथोलॉजिका रखा है। ‘लेथोलॉजिका’ ऐसी बीमारी है, जिसमें हम शब्द भी भूल जाते हैं। ये ग्रीक भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। पहला शब्द है लेथे, यानी भूलने की आदत। और दूसरा ग्रीक शब्द है लोगोस जिसका मतलब है पढ़ाई। जुबां पर आने के बावजूद शब्द न याद कर पाने वाली इस बीमारी को ये नाम, बीसवीं सदी के मशहूर मनोवैज्ञानिक, कार्ल गुस्ताव जंग ने दिया था।

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    जानकारी को समझना या महसूस करना

    ब्रिटिश मनोवैज्ञानिक टॉम स्टैफोर्ड के अनुसार हमारा दिमाग किसी कंप्यूटर की तरह काम नहीं करता कि आपने किसी चीज को ढूढ़ा और झट से उसका जवाब हाजिर हो जाये। असल में किसी शब्द या जानकारी को हम जितनी शिद्दत से समझते या महसूस करते हैं। हमारा दिमाग उसी हिसाब से उस शब्द या जानकारी को अपने अंदर अलग-अलग खांचों में रखता है।

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    इंसान का एक्टिव शब्दकोश

    किसी भी व्‍यक्ति के लिए पढ़ा हुआ हर शब्द सही समय पर याद करना करीब-करीब नामुमकिन होता है। शोधकर्ताओ के अनुसार आमतौर पर हर इंसान बोलने और लिखने में औसतन पचास हजार शब्दों का इस्तेमाल करता है। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में किसी इंसान का एक्टिव शब्दकोश कहते है। इसके अलावा भी लगभग हर व्‍यक्ति को बहुत से और शब्द पता होते हैं। लेकिन, इन शब्दों को कम ही इस्तेमाल में लाते हैं। और इस तरह अपने दिमाग को संदेश देते हैं कि इन शब्दों की अहमियत हमारे लिए कम है। ऐसे में दिमाग इन शब्दों को छांटकर किसी ऐसी जगह रख देता है, कि, कई बार पता होने के बावजूद भी ये याद नहीं आते। ऐसा लगता है कि बस अभी आपकी जुबां पर ये शब्द आया, मगर याद नहीं आता। ये बिलकुल वैसा ही होता है, जैसे कि हम कोई चीज बक्से में बंद करके भूल जाते हैं। और जिस चीज को हम नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं करते, उसको भूल जाते हैं।

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    गैरजरूरी जानकारी दिमाग से साफ करें

    लेथोलॉजिका एक ऐसी बीमारी है, जिसमें हम शब्द भी भूल जाते हैं, और उसका पता ठिकाना भी। मतलब उससे हमारा रिश्ता टूट सा जाता है। मगर वह हमारे दिमाग के स्टोरेज की जगह, भी घेरे रहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि हम गैरजरूरी जानकारी दिमाग से साफ करें और जरूरत वाली बातें ही याददाश्त के बक्से में रखें, ताकी जब जरूरत पड़े तो हमें फौरन उसे निकाल सके।
    Image Source : Getty

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