आपको भी हो सकती है नवजो‍त सिंह सिद्धू को होने वाली बीमारी डीवीटी

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 07, 2015

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हंसमुख स्वभाव व फिटनेस को तवज्जो देने वाले मशहूर क्रिकेटर और सांसद नवजोत सिंह सिद्धू डीवीटी की चपेट में आ गये, इस स्‍लाइडशो में जानें क्‍या है ये बीमारी और कैसे करें इससे बचाव।
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    क्रिकेटर और लोकसभा सांसद नवजोत सिंह सिद्धू डीवीटी की चपेट में


    खेल के मैदान से कमेंट्री बॉक्स, लोकसभा, बिग बॉस के घर और फिर कपिल शर्मा के टीवी शो 'कॉमेडी नाइट्स विद कपिल' में अपनी शायरी और चुटकुलों से सभी को हंसाने वाले नवजोत सिंह सिद्धू को डीप वेन थ्रोंबोसिस (डीवीटी) नामक बीमारी हो गई है। डीप वेन थ्रोंबोसिस ऐसी बीमारी है छुपकर दस्‍तक देती है और कुछ गंभीर मामलों में जानलेवा भी हो सकती है। सिद्धू एक खिलाड़ी होने के नाते शुरू से ही फिनटेस का खास ध्यान रखते आए हैं, और आज भी नियमित योग और एक्सरसाइज करते हैं। हंसमुख स्‍वभाव के सिद्धू से तनाव और अवसाद कोषों दूर हैं। इस लेख में जानते हैं स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति इतना ध्‍यान देने वाले सिद्धू को होने वाली बीमारी क्‍या है और कैसे होती है।
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    क्या है डीप वेन थ्रोम्बोसिस


    डीप वेन थ्रोम्बोसिस की समस्‍या होने पर दिल को रक्त वापिस ले जाने वाली गहरी नाड़ियों में रूकावट हो जाती है। डीवीटी दरअसल तब होता है जब एक गहरी शिरा में खून का थक्का जम जाता है और सामान्य रक्त प्रवाह में रुकावट पैदा करता है। आसान भाषा में समझा जाए तो दिल को वापस रक्त दो तरह की नाड़ियां ले जाती हैं। एक तो वे जो चमड़ी की उपरी सतह पर होती हैं और कभी-कभी दिखाई भी देती हैं और दूसरी वे जो गहरी होती हैं और ऊपर से दिखाई नहीं देती। दिल को रक्त वापिस ले जाने वाली इन गहरी नाड़ियों में (विशेषतौर पर पैरों की नाड़ियों में) होने वाली किसी रूकावट को ही चिकित्सकीय भाषा में डीप वैन थ्रोंबोसिस कहा जाता है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो इससे होने वाली सालाना मौतों की संख्या छाती के कैंसर, सड़क दुर्घटनाओं और एड्स से होने वाली मौतों से अधिक हैं।
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    डीवीटी क्यों होता है


    टांगों के भीतर मौजूद ये नाड़ियां (डीप वेन) वापिस गंदे रक्त को दिल में भेजने का काम करती हैं। इस काम के लिये इनमें जगह-जगह वाल्व होते हैं, ताकि ये रक्त आगे जाये और वापिस ना आ पाए। इस लिये टांग की पिंडलियों में लगातार हरकत होना और उनका स्वस्थ्य होना जरूरी होता है। अगर किसी कारणवश टांगो की हरकत कम हो जाये औरये वेन एक्टिव न हों तो रक्त की दिल को वापसी बाधित हो जाती है और रक्त टांगो में ही इकट्ठा होने लगता है। एक बार जब रक्त नाड़ी की दीवार पर जम जाता है तो उसके चारों और भी रक्त जमने की आशंका बढ़ जाती है। कई बार रक्त के इस थक्के (क्लोट) का एक हिस्सा टूट कर रक्त बह कर फेफड़े, दिल या गुर्दे में जाकर रूकावट पैदा कर सकते हैं।
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    डीवीटी के लक्षण


    अगर लगातार कुछ घण्टों के लिये टांग/पिण्डलियों में हरकत न हो और इनमें खून का दौरा कम हो जाए तो इस समस्या की शुरुआत हो सकती है। हालांकि कई बार तुरंत तो इस समस्या का कोई लक्षण नहीं दिखाई देता लेकिन गम्भीर होने पर इसके लक्षणों में टांग मे दर्द रहना (रुक-रुक कर और तेज या धीमा), टांग का गर्म रहना, टांग में चींटियां जैसी चलना तथा टांग के रंग में बदलाव आदि शामिल हो सकते हैं
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    डीवीटी के कारण


    कई बार महिलाओं का शिशु को जन्म देने के बाद चलना फिरना बेहद कम हो जाता है। वहीं इस दौरान शरीर में खून जमने की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से तेज भी होती है। इसलिये शिशु को जन्म देने के बाद इस बिमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा इसके स्वभाविक कारणों में बुढ़ापा, मोटापा, धूम्रपान की लत, वैरिकॉज वेन्स (कुछ मामलों में), लंबे समय तक बैठे या लेटे रहने पर (हड्डी जोड़ने के लिये प्लास्टर लगने के कारण, कोई ऑप्रेशन होने के कारण, लंबे सफर में, इत्यादि) तथा हारमोन असंतुलन के कारण (कुछ मामलों में) भी डीवीटी की समस्या हो सकती है।
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    डीवीटी से बचाव


    इस समस्या से बचने के लिये घंटो तक बिना हिले एक ही जगह बैठे रहने से बचें। अगर सिटिंग ज़ब है तो बीच-बीच में उठकर कुछ मिनट के लिये चहलकदमी करें, टांगों को बहुत देर तक एक दूसरे के ऊपर चढ़ा कर न बैठें, कभी-कभी टांगों की मालिश भी किया करें, महिलाएं शिशु के जन्म के बाद थोड़ी देर के लिये रोज़ चहल कदमी शुरू करें। इसके अलावा स्वस्थ जीवन शैली अपनायें और अपने वजन को नियंत्रिण में रखें। इसके लिये नियमित एक्सरसाइज करें और पौष्टिक और ताजा भोजन करें। एक खास बात का ख्‍याल रखें कि आप पानी प्रयाप्त मात्रा में पियें।
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