जानें क्‍या है ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर एंटीबॉडी टेस्ट

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 20, 2016

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मायस्थेनिया ग्रेविस और ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर टेस्ट हमारी मांसपेशियों की कोशिकाओं को संकुचित होने का संकेत देती हैं। इस बारें में विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढे।
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    ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर टेस्ट

    ऐसेटाइलकोलिन हमारे शरीर में, उन तंत्रिका संकेतों को भेजने का कार्य करता है, जो हमारी मांसपेशियों की कोशिकाओं को संकुचित होने का संकेत देती हैं। ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर (AChR) ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर, मायस्थेनिया ग्रेविस जिसे गहरी मांसपेशियों में कमजोरी  भी कहा जाता है, की जाँच के लिए किया जाता है। ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर एंटीबॉडी टेस्ट , रक्त में, एक ऐसे पदार्थ ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टरएंटीबॉडी की एकाग्रता की जाँच करता है, जो न्यूरोट्रांसमीटर ऐसेटाइलकोलिन को अपना कार्य करने से रोकता है।
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    ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर के तीन प्रकार

    एंटीबॉडीज तंत्रिका कोशिकाओं में, ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर से चिपक जाते हैं और उनपर आक्रमण कर उन्हें नष्ट कर देते हैं इसे बाइंडिंग कहा जाता है। ब्लॉकिंग में  एंटीबॉडीज, रिसेप्टर्स पर बैठ कर ऐसेटाइलकोलिन को बाइंड होने से रोक सकते हैं। मॉड्युलेटिंग में एंटीबॉडीज, रिसेप्टर्स के जोड़ों में क्रॉस-लिंक कर सकते हैं, जिसके कारण यह न्यूरोमस्क्यूलर संधि से अलग हटकर मांशपेशियों की कोशिकाओं में आ जाते हैं।‘बाइंडिंग’, करने वाले एंटीबॉडीज टेस्ट को सबसे ज्यादा प्रयोग किया जाता है। क्योंकि ‘बाइंडिंग’ की जाँच के बिना, बाकी दोनों जांचों का पॉजिटिव आना बहुत ही कम देखने को मिलता है। ये दोनों प्रकार की जाँचें डॉक्टर तभी करता है, जब वह मायस्थेनिया ग्रेविस और ‘बाइंडिंग’ टेस्ट को नेगेटिव पाता है।
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    क्या होता है मायस्थेनिया ग्रेविस

    मियासथीनिया ग्रेविस एक स्व-प्रतिरक्षित बीमारी होती है, जिसमें शरीर की कुछ एंटीबॉडीज (शरीर की वह कोशिकाएं, जो शरीर पर बाहर से आक्रमण करने वाले, बैक्टीरिया, फंगस और कीटाणुओं पर आक्रमण कर उन्हें खत्म कर देती हैं।) गलती से, शरीर के ही किसी हिस्से को बाहरी तत्व समझ लेती हैं, और वह ऐसेटाइलकोलिन रिसेप्टर पर आक्रमण कर उन्हें खत्म करना शुरू कर देती हैं।
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    कैसे करता है प्रभावित

    जिन लोगों में, मायस्थेनिया ग्रेविस  की समस्या होती हैं, उनमें अक्सर थाइमस ग्रंथि भी बढ़ी हुई पाई जाती है। साथ ही उनमें, थाइमोमस यानी थाइमोमस के एक विशेष ट्यूमर होने की भी संभावना होती है। छाती के नीचे स्थित, थाइमस, बचपन में, प्रतिरक्षा प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण भाग होता है। लेकिन युवा होने तक इसकी सक्रियता कम हो जाती है।यदि किसी जाँच जैसे चेस्ट कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन के दौरान, थाइमोमा पाया जाता है, तो इसके बाद AChR एंटीबॉडी टेस्ट भी किया जा सकता है। इससे यह पता चल जाता है कि कहीं उक्त व्यक्ति में, यह एंटीबॉडी तो सक्रिय नहीं हो चुका है।

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    किसी को भी हो सकती है ये बीमारी

    मियासथीनिया की समस्या किसी को भी हो सकती है, लेकिन इसकी संभावनाएं महिलाओं में, ख़ास तौर पर, 20 से 40 के बीच ज्यादा होती है। वहीं, पुरुषों में, यह समस्या, 50 से 70 के बीच ज्यादा होती है। यदि कोई मियासथीनिया से पीड़ित महिला, बच्चे को जन्म देती है, तो ऐसा भी हो सकता है कि उसके बच्चे में, भी यह समस्या आ जाए और यह अस्थाई और जानलेवा दोनों ही प्रकार की हो सकती है।
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