ध्‍यान और सेक्‍स में क्‍या समानतायें हैं

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 29, 2014

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ध्‍यान और सेक्‍स दोनों से मानव मस्तिष्‍क पर एक सा प्रभाव पड़ता है। शोधों में कहा गया है कि मस्तिष्‍क ध्‍यान के दौरान भी उसी तरह व्‍यवहार करता है, जैसा वह सेक्‍स के दौरान करता है।
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    सेक्‍स और ध्‍यान

    क्‍या आपको मालूम है कि ध्‍यान और सेक्‍स दोनों से मानव मस्तिष्‍क पर एक सा प्रभाव पड़ता है। और जैसाकि कई शोध प्रमाणित कर चुके हैं कि ये शोध काफी लाभप्रद होते हैं। द न्‍यूरोबॉयोलॉजी ऑफ ब्लिस-सेकरेड एंड प्रोफेन ने एक शोध के हवाले से कहा कि मस्तिष्‍क ध्‍यान के दौरान भी उसी तरह व्‍यवहार करता है, जैसा वह सेक्‍स के दौरान करता है। दोनों हमारी स्‍व-चेतना, को जागृत कर हमें हमारे अहम से दूर करते हैं।

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    ऑर्गेज्‍म यानी चरम सुख

    ऑर्गेज्‍म संवेदी उत्‍तेजना का परिणाम होता है, जो चरम आनंद पर जाकर समाप्‍त होता है। इस बात को समझना मुश्किल है कि क्षणभंगुर लेकिन आनंमदय स्थिति को लेकर इतने संशय में क्‍यों रहते हैं।

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    हर प्रजाति का लक्ष्‍य

    हर प्रजाति अपने वंश को आगे बढ़ाना चाहती है। विकासवादी दृष्टिकोण से देखा जाए तो ऑर्गेज्‍म एक प्रेरक है, एक इनाम है और साथ ही संतान उत्‍पन्‍न करने का एक माध्‍यम है। कुछ प्रजातियों के लिए यह महज अपना वंश बढ़ाने का माध्‍यम है। हर प्रजाति युवावस्‍था में आते ही सेक्‍स को लेकर सशंकित व उत्‍साहित हो जाती है।

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    सेक्‍स एक सतत चेष्‍टा का नाम

    संभोग से समाधि की ओर में ओशो कहते हैं अगर हम सारे जीवन को देखें तो जीवन जन्‍म ने की एक क्रिया का नाम है। जीवन एक ऊर्जा है, जो स्‍वयं को पैदा करने में सतत् संलग्‍न है और सतत् चेष्‍टाशील है। आदमी के भीतर भी वही है। आदमी के भीतर उस सतत सृजन की चेष्‍टा का नाम हमने सेक्‍स दे रखा है, काम दे रखा है। इस नाम के कारण उस ऊर्जा को एक गाली मिल गयी है। एक अपमान मिल गया है। इस नाम के कारण एक निंदा का भाव पैदा हो गया है। मनुष्‍य के भीतर भी जीवन को जन्‍म देने की सतत चेष्‍टा चल रही है। हम उसे सेक्‍स कहते हैं। हम उसे काम कहते हें

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    ऑर्गेज्‍म सेहत के लिए फायदेमंद

    यह बात समझनी जरूरी है कि आखिर ऑर्गेज्‍म का हमारे स्‍वास्‍थ्‍य पर क्‍या असर पड़ता है। ऑर्गेज्‍म को समझना कई बार खुद को समझने की तरह होता है। ऑर्गेज्‍म एक सम्‍मानित खुशी से जुड़ा होता है। यह आपके अहंकार को खत्‍म कर देता है।

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    अहंकार कम करे

    इस शोध में कहा गया कि वे लोग जो ऑर्गेज्‍म तक पहुंचते हैं और वे लोग जो ध्‍यान करते हैं, दोनों घमंड को कम करते हैं। दोनों आपको स्‍व तत्‍व से राहत दिलाते हैं। इसके साथी सेक्‍स और ध्‍यान दोनों आपको आनंद की चरमसीमा तक लेकर जाते हैं।

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    दर्द दूर करे

    शारीरिक धारणा में परिवर्तन और दर्द में कमी लाने का काम करते हैं। सेक्‍स और ध्‍यान दोनों आपकी सोच में परिवर्तन लाकर आपको सकारात्‍मक और उत्‍साही बनाने का काम करते हैं।

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    शांति दिलाये

    जब आप ध्‍यान करते हैं, तो आपके मस्तिष्‍क का बायां हिस्‍सा जागृत होता है और सेक्‍स के दौरान मस्तिष्‍क का दायां हिस्‍सा जागृत होता है। दोनों अनुभव आपको मन-मस्तिष्‍क में चल रहे अनर्गल प्रलापों से राहत दिलाते हैं। और आप शारीरिक और मानसिक सीमाओं को तोड़कर शांत अनुभव करते हैं।

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    कष्‍टों से मुक्ति

    तिब्‍बत के बौद्ध भिक्षुओं ने मस्तिष्‍क के बायें हिस्‍से की गतिविधियों को बढ़ाने का कमाल का तरीका निकाला है, जिसका संबंध खुशी से होता है। भिक्षु इस स्थिति पर केवल करुणा पर ध्‍यान केंद्रित कर पहुंच पाते हैं। दूसरों को उनके कष्‍टों से मुक्ति दिलाने की कामना हमारे भी दर्द और अहंकार को कम करती है।

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