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पुरुष नसबंदी कराने से पहले जानें ये जरूरी बातें

By:Pradeep Saxena, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 19, 2014
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    पुरूष नसबन्‍दी

    पुरूष नसबन्‍दी, पुरूषों के लिए गर्भनिरोध का सबसे सरल और सुरक्षित उपाय है। इसमें शुक्रवाहिका नाम दो ट्यूबों को काट दिया जाता है जिससे शुक्राणु वीर्य तक पहुंच ही नहीं पाते हैं। पुरूष नसबन्‍दी करवाने में समय भी कम लगता है और यह गर्भनिरोधक के लिए महिला नसबन्‍दी जितना ही प्रभावशाली होता है।

    पुरूष नसबन्‍दी
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    नसबंदी कैसे की जाती है

    नसबंदी करने के लिए बिना चीरे के टांके की तरह सबसे पहले अण्‍डकोषों के ऊपर वाली खाल पर सुई लगाकर उसे सुन्‍न किया जाता है। फिर सुन्‍न की गई खाल में खास तरह की चिमटी से बहुत बारीक सुराख करके उस नली को बाहर निकालकर अण्‍डकोष से पुरूष बीजों को पेशाब की नली तक पॅंहुचाया जाता है। फिर इस नली को बीच से काटककर दोनों कटे हुए सिरों को बांधकर उनके मुंह बन्‍द कर देते हैं और वापस अण्‍डकोष थैली के अन्‍दर डाल देते हैं।

    नसबंदी कैसे की जाती है
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    नसबन्‍दी से पहले इन बातों का खयाल रखें

    जब तक आप यह पक्‍का निश्चय न कर लें कि आपकी भविष्‍य में संतान नहीं चाहिए तब तक आपको नसबन्‍दी नहीं करानी चाहिए। क्‍योंकि नसबन्‍दी करवाने के बाद आप संतान उत्‍पन्‍न नहीं कर सकते।

    नसबन्‍दी से पहले इन बातों का खयाल रखें
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    संक्रमण होने पर नसबन्‍दी ना करायें

    यदि आपके जननांगों में या उसके आसपास किसी प्रकार का संक्रमण हो तो आपको नसबन्‍दी नही करानी चाहिए। क्‍योंकि ऐसे में नसबन्‍दी करने में विलम्‍ब हो सकता है। इसके अलावा रक्त स्राव का विकार हो तो भी नसबन्‍दी नहीं करवानी चाहिए।

    संक्रमण होने पर नसबन्‍दी ना करायें
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    फौरन काम नहीं करती

    दोनों, शुक्राशय से शुक्राणुओं को पूरी तरह खाली करने के लिए 15 से 20 बार उनका निष्‍कासन करना होगा। इस कारण से शल्‍य प्रक्रिया के बाद तीन महीने तक कंडोम या परिवार नियोजन की किसी विधि का प्रयोग करना जरूरी है।

    फौरन काम नहीं करती
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    रहता है खतरा

    नसबंदी को जन्‍म नियंत्रण का सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपाय माना जाता है। लेकिन, फिर भी कुछ मामलों में नसबंदी काम नहीं करती। नसबंदी करने के एक साल में 10 हजार में से केवल 15 को ही गर्भधारण होता है।

    रहता है खतरा
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    एचआईवी मरीज भी करवा सकते हैं

    ऐसा कुछ नहीं कि जिससे एचआईवी मरीजों को नसबंदी करवाने से रोकता हो। इसलिए कहा जा सकता है कि जिन पुरुषों को एचआईवी जैसा यौन संक्रामक रोग हो वे भी नसबंदी करवा सकते हैं।

    एचआईवी मरीज भी करवा सकते हैं
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    असर पलटा नहीं जा सकता

    यह जानना जरूरी है कि नसबंदी के प्रभाव को टाला नहीं जा सकता। कुछ लोग दावा करते हैं कि वे नसबंदी के प्रभाव को पलट सकते हैं, लेकिन ऐसा संभव नहीं। तो, इसलिए जरूरी है कि जब भी आप नसबंदी करवायें आप इस बात को लेकर पूरी तरह से आश्‍वस्‍त रहें कि आपको संतान नहीं चाहिए। यदि आप भविष्‍य में कभी भी संतान चाहते हैं, तो नसबंदी न करवाइये।

    असर पलटा नहीं जा सकता
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    नसबंदी से कैंसर का खतरा

    1990 के दशक में हुए एक शोध में नसबंदी और प्रोस्‍टेट कैंसर के बीच संबंधों की बात कही गयी थी, लेकिन बाद में हुए अन्‍य प्रमाणिक शोधों में इस बात को पूरी तरह नकार दिया गया। यानी यह बात प्रमाणित हो चुकी है कि नसबंदी और कैंसर के बीच कोई संबंध नहीं है।

    नसबंदी से कैंसर का खतरा
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    नसबंदी से डिमेंशिया का खतरा

    2006 में नार्थवेर्स्‍टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने इस बात की आशंका जतायी कि नसबंदी का संबंध डिमेंशिया से हो सकता है। अल्‍जाइमर के 47 मरीजों पर शोध करने के बाद यह पता चला कि उनमें से 19 ने नसबंदी करवायी थी। हालांकि, कुछ लोगों ने इस पर हैरानी जतायी कि नसबंदी से मस्तिष्‍क को कोई नुकसान हो सकता है। वीर्य आमतौर पर रक्‍त प्रवाह का हिस्‍सा नहीं होता। लेकिन, यह भी देखा गया कि नसबंदी करवाने वाले दो तिहाई पुरुषों के रक्‍त में वीर्य के एंटीबॉडीज पाए गए। लेकिनयह शोध काफी छोटे पैमाने पर किया गया है और इस बारे में किसी निर्णय पर पहुंचना अभी जल्‍दबाजी होगी।

    नसबंदी से डिमेंशिया का खतरा
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    रक्‍तस्राव और सूजन

    नसबंदी से अंडकोष में रक्‍तस्राव अथवा रक्‍त के थक्‍के जमने की शिकायत हो सकती है। इसके साथ ही वीर्य में रक्‍त, अंडकोष में चोट, और सर्जरी के स्‍थान पर संक्रमण जैसी परेशानियां हो सकती हैं। इसके साथ ही दर्द, असहजता और सूजन की शिकायत हो सकती है।

    रक्‍तस्राव और सूजन
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    ये भी हो सकते हैं दुष्‍प्रभाव

    बहुत कम मामलों में अंडकोष में तेज दर्द, फ्लूड बनने जैसी समस्‍यायें हो सकती हैं। वीर्य स्‍खलन के समय यह दर्द काफी तेज हो सकता है। इसके साथ ही वीर्य के लीक होने से जलन भी हो सकती है। और बहुत कम मामलों में गर्भधारण भी हो सकता है।

    ये भी हो सकते हैं दुष्‍प्रभाव
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    दिल की बीमारी

    हालांकि कई लोग मानते हैं कि नसबंदी के कारण इनसान के दिल पर बुरा असर पड़ता है, लेकिन वास्‍तव में ऐसा नहीं है। अभी तक इस बात का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

    दिल की बीमारी
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