एंटीबॉयटिक की जगह लें ये 7 हर्बल विकल्प

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 22, 2015

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एंटीबॉयटिक दवायें भले ही दर्द और बीमारी को कम कर दें लेकिन इनका लंबे समय तक प्रयोग स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है, इनकी जगह आप हर्बल औषधियों का सेवन कर बीमारी का उपचार कर सकते हैं, तो अगली बार बीमारी में औषधियां लें न कि एंटीबॉयटिक।
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    हर्बल एंटीबॉयटिक हैं हेल्‍दी विकल्‍प

    सामान्‍य दर्द हो या फिर कोई घातक बीमारी, हमेशा हम एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन बिना किसी संदेह के करते हैं। लेकिन कई शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि एंटीबॉयटिक जितनी जल्‍दी दर्द पर काबू पाता है उतना ही शरीर को नुकसान भी पहुंचाता है। इसकी जगह आप हर्बल औषधियों का सेवन कर सकते हैं, इससे आपके शरीर पर कोई साइड-इफेक्‍ट नहीं होगा और बीमारी का उपचार भी हो जायेगा। तो अगली बार बीमार होने पर एंटीबॉयटिक की जगह इन हर्बल औषधियों का सेवन कीजिए।

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    बहुत फायदेमंद है लहसुन

    लहसुन सिर्फ मसाले के रूप में खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाती बल्कि अब तो डॉक्‍टर भी मानने लगे है कि लहसुन कई बीमारियों में लाभदायक औषधि की तरह काम करता है। जर्मनी की हेल्थ एडवाइस एसोसिएशन के अनुसार लहसुन को प्रतिदिन के खाने में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। लहसुन में एंटीबायोटिक दवाओं से अधिक गुण हैं, जिसकी वजह से वह रोगाणुओं का नाश करती है। यही कारण है कि घाव धोने के लिए लहसुन के एक भाग रस में तीन भाग पानी मिलाकर काम में लिया जाता है। चाय में अदरक के साथ लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से अस्थमा की परेशानी को कम किया जा सकता है। इसके अलावा इसमे विटामिन ए,सी व सल्फाइड पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है।

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    गुणकारी है शहद

    शहद बैक्टीरिया की प्रतिरोधी क्षमता से भी लड़ सकता है। यह अध्ययन दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक संगठन “अमेरिकन केमिकल सोसायटी” की 247 वीं राष्ट्रीय बैठक के हिस्से के तौर पर कराया गया। यह जानकारी को देने वाले इस अध्ययन के प्रमुख्ख शोधार्थी रोड आईलैंड के न्यूपोर्ट स्थित साल्वे रेगिना विश्वविद्यालय के एम. स्च्वट्ज ने कहा, ”शहद की विशेष लाभ है कि यह कई स्तरों पर बैक्टीरिया से लड़ता है, जिसकी वजह से बैक्टीरिया में प्रतिरोधी क्षमता का विकास बहुत ही मुश्किल हो जाता है।” उनके मुताबिक शहद हाइड्रोजन पेरोक्साइड, अम्लीयता, ओस्मोटिक इफेक्ट, हाई सुगर कंसंट्रेशन और पॉलीफिनोल्स जैसे हथियारों का उपयोग करता है। ये सभी बैक्टीरिया को मारने के लिए काफी है।

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    हल्‍दी रोग भगाये जल्‍दी

    हल्दी कीटाणुनाशक होने के साथ ही इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीबायोटिक और दर्द निवारक तत्व पाए जाते हैं। इसमें मौजूद यह तत्व चोट के दर्द और सूजन को कम करने में मदद करते हैं। चोट लगने पर दूध में हल्दी डालकर पीने से दर्द में राहत मिलती है।

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    गुणों से भरपूर है तुलसी

    अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ तुलसी एंटीबायोटिक और दर्द निवारक भी होती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी फायदेमंद है। रोज सुबह तुलसी के 3-5 पत्तों का सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।

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    रोगों को दूर करे एलोवेरा

    औषधि की दुनिया में एलोवेरा किसी चमत्‍कार से कम नहीं है। एलोवेरा के सेवन से कई तरह के रोगों को दूर किया जा सकता है। एलोवेरा औषधीय गुणों से परिपूर्ण है। साथ ही एलोवेरा बढ़िया एंटीबायोटिक और एंटीसेप्टिक के रूप में भी काम करता है।

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    बीमारियों के लिए मीठा है नीम

    आयुर्वेद के अनुसार नीम की पत्तियां एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल और एंटीएलर्जी होती हैं। अगर आप किसी ऐसी बीमारी में जब आपको एंटीबायोटिक खाने की जरूरत होती है, नियमित रूप से नीम खाएं तो आपको काफी फायदा पहुंच सकता है।

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    एंटीबॉयटिक भी है सरसों

    सरसों में एंटीबायोटिक गुण होते है। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। सरसों शरीर को गर्माहट भी प्रदान करता है, अगर इसे ठंडक में खाया जाए तो ठंड बिल्‍कुल भी नहीं लगेगी।

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