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ये अजीब चीजें हो सकती हैं संक्रामक

By:Anubha Tripathi, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 13, 2014
सिर्फ बीमारियां ही संक्रामक नहीं होती हैं। कुछ खास तरह की भावनाएं भी संक्रामक बीमारी की तरह फैलती हैं। आइए जानें ऐसे ही अजीब चीजों के बारे में जो संक्रामक हैं।
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    भावनाएं भी होती हैं संक्रामक

    हम जानते हैं कि सर्दी-जुकाम, फ्लू यहां तक की जम्हाई लेना भी संक्रामक होता है। लेकिन शायद यह बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ भावनाएं और  व्यवहार भी संक्रामक होते हैं। इसमें से कुछ अच्छी भावनाएं होती हैं तो कुछ खराब। आइए ऐसी ही अजीब चीजों के बारे में जानते हैं जो संक्रामक होती हैं।

    भावनाएं भी होती हैं संक्रामक
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    तनाव

    साइकोन्यूरो एंडोक्राइनोलॉजी पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक किसी तनावग्रस्त व्यक्ति के साथ लगातार रहने से आपको भी तनाव हो सकता है। जरूरी नहीं कि वह व्यक्ति आपका कोई करीबी ही हो, किसी अजनबी का तनाव देख कर भी आप तनावग्रस्त हो सकते हैं। इसका सीधा संबंध शरीर में स्रावित  हो रहे हार्मोनों से है। अगर आपके आसपास कोई ऐसा व्यक्ति है जो तनावपूर्ण स्थिति में है। तो ऐसे में आपका शरीर भी कॉर्टिसॉल नाम का स्ट्रेस हार्मोन स्रावित करता है। इसे वैज्ञानिक 'एम्पैथेटिक स्ट्रेस' या सहानुभूति में होने वाला स्ट्रेस कहते हैं.

    तनाव
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    जूनून

    क्या आपने कभी देखा है कि कोई बच्चा तब तक अपने खिलौने को लेकर बेपरवाह रहता है, जब तक कोई और उसे ना ले ले? इसी तरह हर किसी में यह भावना होती है। अच्छी चीजों के प्रति जुनून बहुत तेजी से फैलता है। यह दूसरों को भी प्रेरित करता है कि वे अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित हों। उसे हासिल करने के लिए जुटे रहें।

    जूनून
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    अकेलापन

    यह थोड़ा बेवजह लग सकता है, लेकिन हाल ही में हुए शोध के मुताबिक अकेलापन लोगों को नकारात्मक, चिड़चिड़ा और रक्षात्मक बनाता है। जिससे वे खुद को उन लोगों से बचा सकते हैं जिनके साथ वो असुरक्षित महसूस करते हैं। जो लोग अकेले रहते हैं वो दूसरों के साथ बुरी तरह से पेश आते हैं और वो दूसरे लोग अन्य लोगों के साथ बुरा व्यवहार करते हैं। यह चक्र इसी तरह चलता रहता है।

    अकेलापन
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    डर

    क्या आप जानते हैं कि बिना किसी कारण के आखिर डर की भावना कैसे संक्रामक होती है? इसके पीछे की वजह जानने के लिए शोधकर्ताओं ने इस पर शोध किया है। क्या वजह हो सकती है शोधकर्ताओं ने इस पर शोध किया है। जब शोध में शामिल प्रतिभागियों नें एक डरे हुए प्रतिभागी के पसीने को सूंघा तो उनके बी चेहरे पर डर की भावनाएं दिखायी देने लगी जिससे वो काफी सर्तक हो गए।  

    डर
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    घृणा

    फ्रेरोमोन्स रसायन के स्राव के कारण भी घृणा की भावना उत्पन्न होती है। जिस शोध में डर अथवा भय के बारे में बताया गया था, उसी में घृणा के बारे में भी बताया गया है। इसमें यह बात सामने आयी है जब प्रतिभागियों को घृणित व्यक्तियों का पसीना सुंघाया गया, तो उन्होंने उसे कम सूंघा। इसके साथ ही उनमें दूर हटने और खदेड़ने की प्रवृत्ति भी अध‍िक देखी गयी। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रतिक्रिया हवा में मौजूद विषाक्त रसायनों के कारण हो सकती है।

    घृणा
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    खुशी

    खुशी भी संक्रामक होती है। आप जैसे लोगों के साथ संपर्क रखते हैं, जिनके साथ अपना समय बिताते हैं, उनका स्वभाव आपके भीतर विकसित होने लगता है। अगर आप ऐसे लोगों के साथ ज्यादा मेलजोल रखते हैं जो खुश रहना तो दूर हमेशा अपने नकारात्मक स्वभाव का ही परिचय देते रहते हैं तो यह आपके व्यक्तित्व पर भी प्रभाव डाल सकता है। इसीलिए जितना हो सके ऐसे लोगों को अपने जीवन से दूर करने का प्रयास करें। खुशहाल और प्रसन्न लोगों के बीच ज्यादा से ज्यादा समय बिताएं। निःसंदेह व्यावसायिक संबंध और काम जरूरी होते हैं लेकिन इन्हें अपने ऊपर हावी ना होने दें। कभी-कभार हल्का-फुल्का मूड भी अच्छा रहता है।

    खुशी
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    ताली बजाना

    ताली बजाना भी संक्रामक है। कई बार देखा गया है कि दर्शक कार्यक्रम के स्तर से अध‍िक यह देखकर तालियां बजाते हैं कि उनके आसपास के लोग भी ऐसा ही कर रहे हैं। स्वीडन के वैज्ञानिकों की ओर से किये गए शोध के मुताबिक, जैसे ही कुछ लोग तालियां बजाना शुरू करते हैं, पूरा ग्रुप तालियां बजाने लगता है। ठीक ऐसा ही तब तालियां बजाना बंद करने के दौरान होता है। जैसे ही एक यो दो लोग क्लैपिंग बंद कर देते हैं, धीरे-धीरे तालियों की गड़गड़ाहट थम जाती है।

    ताली बजाना
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    फेसबुक स्टेटस

    एक अध्ययन के अनुसार, सोशल नेटवर्किंग साइट पर भावनाएं व्यक्त करना संक्रामक है। अध्ययन में अमेरिका में फेसबुक के 10 करोड़ से भी ज्यादा यूजर्स के एक अरब से ज्यादा स्टेटस अपडेट का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि सकारात्मक पोस्टों ने सकारात्मक जबकि नकारात्मक पोस्टों ने नकारात्मक पोस्टों में गुणात्मक वृद्धि की।

    फेसबुक स्टेटस
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