जानिये क्या हैं वेट लिफ्टिंग के प्रभाव

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 04, 2014

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अगर आप चाहते हैं कि आप फिट रहें, आपका शरीर मजबूत व स्वस्थ रहे, साथ ही आपकी चर्बी कम हो, तो वेट लिफ्टिंग आपके इन उद्देश्यों को पूरा कर सकती है। वेट लिफ्टिंग करने से न केवल आपका शरीर मजबूत होता है बल्कि आप तनाव से भी छुटकारा पा सकते हैं।
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    शारीरिक और मानसिक प्रभाव होते हैं वेट लिफ्टिंग के

    वेट लिफ्टिंग यानी भार वहन करने से आपके पूरे शरीर पर काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। वेट लिफ्टिंग अच्छे स्वास्थ्य के लिए किए जाने वाले व्यायाम का ही एक हिस्सा है। कुछ लोग, बाकी व्यायाम करते हैं लेकिन वेट लिफ्टिंग से बचते हैं। लोगों में ये गलत धारणा होती है कि वेट लिफ्टिंग की वजह से स्वास्थ्य को अधिक लाभ नहीं होता बल्कि जोड़ों में दर्द होता है और महिलाओं का शरीर भारी-भरकम हो जाता है। ये धारणाएं बेबुनियादी हैं। अगर आप चाहते हैं कि आप फिट रहें, आपका शरीर मजबूत व स्वस्थ रहे, साथ ही आपकी चर्बी कम हो, तो आपको वेट लिफ्टिंग जरूर करनी चाहिए। आइये जानते हैं कि वेट लिफ्टिंग करने से आपके शरीर पर कौन-कौन से दूरगामी प्रभाव पड़ते हैं।

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    शरीर की शक्ति व मजबूती बढ़ती है

    वेट लिफ्टिंग के पहले छह से आठ सप्ताह के दौरान, आपके शरीर में बल के लिए अपनी मांसपेशियों का इस्तेमाल करने की क्षमता बेहतर हो जाती है। हालांकि, इस शुरुआती अवधि के बाद, शक्ति व मजबूती आने की गति धीमी हो जाती है और ये कभी भी स्थिर हो सकता है। जितनी ज्यादा अवधि तक भार आप उठाएंगे, उतनी ज्यादा शक्ति आपको हासिल होगी। इसमें मांसपेशियों को अपनी चरम शक्ति तक पहुंचने से पहले, अधिक से अधिक तीव्रता के साथ मांसपेशियों का इस्तेमाल करने के प्रशिक्षण की बार-बार जरूरत होती है। वेट ट्रेनिंग के पहले दो सालों तक शक्ति की विकास काफी तीव्र होता है।

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    मांसपेशियों का विकास

    मजबूत मांसपेशियों से न सिर्फ शरीर बेहतर होता है बल्कि वजन भी घटता है। वेट ट्रेनिंग का एक सबसे बड़ा कारण ये होता है कि इससे मांसपेशियों की वृद्धि व विकास होता है। वेट लिफ्टिंग के बाद आपकी मांसपेशियां पहले से बढ़ जाती हैं, नष्ट मांसपेशियां सुधर जाती हैं और इसी वजह से चयापचय क्षमता बहुत बढ़ जाती है। औसतन, मांसपेशियों के एक अतिरिक्त पाउंड से आपके अंदर प्रतिदिन 15 कैलरी अतिरिक्त बर्न करने की क्षमता आ जाती है। महिलाओं को भी शरीर के बहुत बढ़ जाने का भय नहीं पालना चाहिए, महिलाओं में इतने टेस्टोस्टेरोन नहीं होते जिससे कि उनके शरीर की मांसपेशियां बहुत अधिक बढ़ जाएं।

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    तालमेल बेहतर होना

    लंबे समय तक वेट लिफ्टिंग से आपके पूरे शरीर का तालमेल बेहतर हो जाता है। ये अधिक उम्र के लोगों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण है, जिन्हें संतुलन खोने की वजह से चोट लगने का खतरा ज्यादा होता है। जेम्स जज के एक अध्ययन के मुताबिक, प्रतिरोध बढ़ाने की क्षमता की ट्रेनिंग बड़ी उम्र की महिलाओं का संतुलन बेहतर बनाती है। इससे व्यक्ति खेल से जुड़ी हुई गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन कर पाता है। यही वजह है कि खिलाड़ियों की ऐक्सरसाइज में वेट लिफ्टिंग जरूर शामिल की जाती है।

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    बीमारियों से बचाव

    वेट लिफ्टिंग बीमारियों से भी सुरक्षा प्रदान करती है। वेट लिफ्टिंग करने से इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है, और यह घुटनों के गठिया या अन्य गठिया रोगों की शुरुआत को भी रोकती है। उम्र के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। जिससे हड्डियों और जोड़ों पर चोट का खतरा मंडराने लगता है। वेट लिफ्टिंग से हड्डियां मजबूत होती हैं और पहले से कहीं अधिक स्वस्थ नजर आने लगती हैं। वेट लिफ्टिंग से जोड़ों पर उतना दबाव नहीं पड़ता जितना रनिंग या जंपिंग जैसी ऐक्सरसाइज से पड़ता है। इसलिए, अगर आप हमेशा के लिए बीमारियों से दूर रहना चाहते हैं तो अपने व्यायाम में वेट लिफ्टिंग को भी शामिल कर लें।

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    तनाव दूर

    अगर आपको दफ्तर, परिवार या फिर किसी और वजह से तनाव महसूस हो रहा है तो वेट लिफ्टिंग आपके लिए एक समाधान बन सकता है। रिसर्च बताती हैं कि वेट लिफ्टिंग से तनाव दूर होता है। दरअसल, वेट लिफ्टिंग के दौरान आपका ध्यान दूसरे मामलों से हट जाता है। आपका शरीर एंडोर्फिन हार्मोन्स का स्राव करने लगता है जो कि शक्तिशाली प्राकृतिक तनाव विरोधी हार्मोन है। ये हार्मोन तनाव कम करने के साथ साथ दर्द से राहत देता है और आत्म विश्वास भी बढ़ा देता है। ऐसे में आप ज्यादा खुशी महसूस करते हैं और अपने आप से ज्यादा संतुष्ट हो जाते हैं।

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    महिलाओं को मानसिक शक्ति

    वेट लिफ्टिंग करने से अधिक उम्र की महिलाओं का मानसिक विकास होता है। जनवरी, 2010 को "दि न्यूयॉर्क टाइम्स" में प्रकाशित एक लेख में वेट लिफ्टिंग से संबंधित एक स्टडी का जिक्र था जिसमें बताया गया था कि अधिक उम्र की महिलाएं अगर वेट लिफ्टिंग करती हैं तो उनका दिमाग बेहतर तरीके से काम करना शुरू हो जाता है। रिसर्च बताती है कि 65-77 साल की महिलाएं डंबल्स और वेट लिफ्टिंग मशीन के साथ अगर एक या दो घंटे ऐक्सरसाइज करती हैं तो एक साल के बाद उनका संज्ञानात्मक कार्य बढ़ जाता है। इसके अलावा महिलाओं की जोड़ो की समस्या में भी वेट लिफ्टिंग से फायदा मिल सकता है।

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    सावधानियां

    वेट ट्रेनिंग के दौरान ठीक से सांस न ले पाने का आपके दिल पर प्रभाव पड़ सकता है। वेट लिफ्टिंग के दौरान सांस को रोकने से ब्लड प्रेशर काफी अधिक बढ़ सकता है। इसलिए वेट लिफ्टिंग शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह करें। इसके अलावा, किसी अनुभवी पर्सनल ट्रेनर से वेट लिफ्टिंग के दौरान ब्रीदिंग या सांस लेने के तरीके भी सीखें। वेट लिफ्टिंग के दौरान ब्रीदिंग का एक थंब रूल होता है। उसी के हिसाब से चलने से लिफ्टिंग के दौरान सांस से संबंधित समस्याएं नहीं होतीं।

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