किशोर बेटियों वाले सिंगल डैड जरूर जानें ये 5 बातें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 10, 2016

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एकल परवरिश हालांकि काफी मुश्किल काम है। जब एक बच्‍चे की जिम्‍मेदारी आपको बिना किसी की मदद के उठानी पड़ती है। एक किशोर लड़की के लिए एकल पिता होना एक अतिरिक्‍त स्‍तर की कठिनाई प्रस्‍तुत करता है। क्‍योंकि किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव एकल पिता के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, जिनका उन्‍हें सामना करना पड़ता हैं। लेकिन सही योजना, संचार ओर दृष्टिकोण के माध्‍यम से इस कभी जिम्‍मेदारी को आसानी से पूरा किया जा सकता है।
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    सिंगल डैड जरूर जानें ये बातें

    किशोरावस्‍था लड़कियों के लिए उथल-पुथल और अत्यधिक तीव्रता से भरा होता है, और उनके पेरेट्स के लिए भी उतनी ही मुश्किलें होती है। लेकिन  एकल पिता को अपनी किशोर बेटी की परवरिश का कार्य अकेले संभालना अंडर-कुशल महसूस कराता है। यह बहुत आम देखने को मिलता है कि एक महिला अपने एक बच्‍चे या अनेक बच्‍चों की परवरिश को अपने दम पर कर सकती है, लेकिन एक सिंगल डैड के लिए यह स्थिति अभी भी अजीब होती है विशेष रूप से सिंगल डैड के लिए बेटी की परवरिश। अमेरिकी जनगणना से अंतिम आंकड़ों से पता चलता है कि केवल 14 प्रतिशत बच्‍चे ही अपने पिता के साथ रहते हैं। सिंगल डैड को किशोर बेटी की परवरिश में कई समस्‍याओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए उसे कुछ बातों को ध्‍यान में रखना चाहिए। आइए ऐसी ही कुछ बातों के बारे में जानते हैं।

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    लड़की की परवरिश के लिए खुद को शिक्षित करें

    एक बेटी की परवरिश किशोरावस्‍था में करना थोड़ा मुश्किल होता है। इसलिए एकल पिता के लिए लड़की की किशोरावस्‍था के विभिन्‍न चरणों और प्रत्‍येक चरण में आने वाले बदलावों को समझना बहुत जरूरी होता है। एक लड़की में यौवन के दौरान मानसिक और सामाजिक रूप के साथ शारीरिक रूप से बदलाव भी आता है, यह जरूरी है कि उसके पिता जानते हो कि उसकी क्‍या उम्‍मीद है।

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    अनुशासन लागू करें

    अक्‍सर ए‍कल पिता अनुशासन के नियम तो बना देते हैं लेकिन इसे लागू करने में बहुत हिचकिचाते हैं, लेकिन एक पिता के काम को आसान करने के लिए अपनी बेटी के लिए नियम और संरचना बनायें कि आप उससे क्‍या उम्‍मीद करते हैं। साथ ही नियम तोड़ने के परिणाम और सीमाओं की स्‍थापना को लागू करना चाहिए।

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    पोषण के बारे में जानें

    लड़कियों की पोषण की जरूरतें, विशेष रूप से अपनी किशोरावस्‍था के दौरान लड़कों और पुरुषों की तुलना में अलग होती है। एक पिता को इस बात की ओर ध्‍यान देना चाहिए कि उसकी बेटी को सही मात्रा में मिनरल जैसे कैल्शियम और आयरन मिल रहा है या नहीं।

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    अपनी बेटी से बात करें

    संचार किसी भी स्‍वस्‍थ रिश्‍ते के निर्माण और किशोरी को सुरक्षित और रिलेक्‍स महसूस कराने का एक अनिवार्य हिस्‍सा है। एकल पिता को इस बात का ख्‍याल रखना चाहिए कि उसकी किशोर बेटी उससे बात करते समय आरामदायक महसूस करें।

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    बहुत ज्‍यादा सुरक्षात्‍मक न हो

    बहुत ज्‍यादा सुरक्षात्‍मक होने का प्रलोभन समझ में आता है, लेकिन यह नहीं होना चाहिए। इसकी बजाय, अपनी बेटियों को अपनी स्वयं की महत्वपूर्ण सोच और मुकाबला कौशल विकसित करने के लिए पिता को उनकी मदद करनी चाहिए।
    Image Source : Getty

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