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आंखों को कमजोर कर सकती हैं ये आदतें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 15, 2015
बिना आंखों के हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। लेकिन जाने अनजाने हम कुछ ऐसी आदतों को अपना लेते हैं जिसके चलते हमारी आंखों को नुकसान होने लगता हैं। फोन, टैबलेट, टीवी और कंप्यूटर का लगातार इस्तेमाल हमारी आंखों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। आइए ऐसी ही कुछ आदतों के बारे में जानते हैं।
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    अनमोल हैं आंखें

    आंखे कुदरत की अनमोल देन है। बिना आंखों के हम अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। यानी आंखें न हों तो इस खूबसूरत दुनिया को हम देख नहीं सकते। इसलिए आंखों की देखभाल बहुत आवश्‍यक हो जाती है। लेकिन कई ऐसी चीजें हमारी आदतों या रुटीन में शुमार हैं जो आपकी आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंचाती हैं। इनके बारे में जानकर आप जरूर चौंक जाएंगे। आइए आंखों को नुकसान पहुंचाने वाले आदतों के बारे में जानें।  
    Image Source : Getty

    अनमोल हैं आंखें
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    कम रोशनी में पढ़ना

    कम रोशनी में या लेटकर पढ़ने की आदत भी आंखों की सेहत के लिए हानिकारक होती है। अंधेरे में पढ़ने से आंखों को आगे चलकर नुकसान हो सकता है। क्‍योंकि रोशनी की कमी से आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं, जिसका परिणाम होता है, दृष्टि क्षेत्र की गहनता यानी आंख के फोकस में नजदीक और दूर की चीजों के बीच फर्क का कम होना।
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    कम रोशनी में पढ़ना
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    लगातार इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन देखना

    कुछ आंखों के डॉक्‍टरों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन, जैसे हमारे कंप्यूटर, टेबलेट्स और स्‍मार्टफोन से निकालने वाली नीली लाईट सूरज की पराबैंगनी किरणों की तरह हानिकारक हो सकती है। इसके अलावा कंप्यूटर और लैपटॉप के स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी से आंखें खराब होने के साथ-साथ मोतियाबिंद जैसी बीमारी तक हो सकती है। कई लोग इस वजह से अनिद्रा के भी शिकार हो जाते हैं।
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    लगातार इलेक्ट्रॉनिक स्क्रीन देखना
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    सीधे संपर्क में रहना

    मोबाइल और कंप्यूटर हमारी आंखों के सीधे संपर्क में रहते हैं, इसलिए सबसे इससे ज्यादा नुकसान आंखों को ही होता है। कंप्यूटर और मोबाइल से अपनी आंखों की दूरी कम होती हैं, जिससे आंखों की मूवमेंट कम होती है। इस कारण लंबे समय तक आंखें एक ही पॉइंट पर फोकस रहती है। मोबाइल और कंप्यूटर अधिक उपयोग करने वाले लोगों में मुख्य समस्या ड्राई आई सिंड्रोम की होती है। इसमें या तो आंखों में नमी कम होने लगती है ।
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    सीधे संपर्क में रहना
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    लंबे समय तक मोबाइल का इस्‍तेमाल

    बहुत अधिक समय तक मोबाइल के इस्‍तेमाल से भी आंखों को नुकसान हो सकता है। क्‍योंकि लंबे समय तक मोबाइल का इस्तेमाल करने से उसकी स्क्रीन से निकलने वाली एलेक्ट्रोमैग्नेटिक किरणें आंखों के विभिन्न हिस्सों जैसे रेटिना और कॉर्निया पर अपना असर डालती हैं।
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    लंबे समय तक मोबाइल का इस्‍तेमाल
  • 6

    कम क्षेत्र होना

    2007 में हुए एक शोध के अनुसार, कम दायरे में देखने के कारण भी आंखों की रोशनी कम होती है, यानी जब हम एक केंद्रीय बिंदु पर अधिक देर त‍क ध्‍यान लगाये रहते हैं और अन्‍य वस्‍तुओं को नहीं देखते तब भी हमारी आंखों की रोशनी कम होती है। उम्रदराज युवाओं में यह समस्‍या अधिक देखने को मिलती है। यह शोध इन्‍वेस्टिगेटिव ऑप्‍थॉल्‍मेलॉजी एंड विजुअल साइंस में छपा था।
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    कम क्षेत्र होना
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    धूम्रपान का आंखों पर असर

    धूम्रपान करने का असर भी आंखों पर पड़ता है। सिगरेट में लगभग 4000 केमिकल्स मौजूद होते हैं, जो शरीर के भीतर जाकर शरीर के अन्य अंगों के साथ-साथ आंखों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। ज्यादा सिगरेट पीने से आंखों में लाल धब्बे होने के साथ-साथ आंखों से जुड़ी अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ता है। रेटिना के केंद्र को मैक्युला कहते हैं। हम अपनी आंखों की सीध में जिन चीजों को देखते हैं, उसके लिए मैक्युला जिम्मेदार होता है। उम्र बढ़ने पर खासकर 60 साल की उम्र के बाद मैक्युला की कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है। लेकिन अगर आप धूम्रपान करते हैं तो मैक्युला की कार्यक्षमता समय से काफी पहले ही कम होकर आपकी आंखें खराब हो जाती हैं।
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    धूम्रपान का आंखों पर असर
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    अल्ट्रावॉयलेट किरणों का प्रभाव

    यह बात जानकर आपको थोड़ा अटपटा लग सकता हैं लेकिन अगर आप बाहर धूप में ज्यादा देर तक रहते हैं तो आपको मोटियाबिंद का खतरा अन्‍य लोगों की तुलना में अधिक होता है। सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणें कोर्निया को जला देती हैं जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है।
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    अल्ट्रावॉयलेट किरणों का प्रभाव
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    आंखों को कम झपकना

    आपने देखा होगा कि लगातार कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करते रहने से उनमें असहजता, खुजली महसूस होने लगती है। आमतौर पर आंखें एक मिनट में 12-15 बार  झपकती हैं, लेकिन कंप्यूटर स्क्रीन पर काम करने वाले एक मिनट में केवल 4-5 बार ही आंखों को झपकाते हैं। आंखों को कम झपकाना और अधिक समय तक काम करते रहने से ड्राई आई सिंड्रोम, खुजली जैसी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं दूसरी ओर कंप्यूटर पर लगातार काम करने वालों की आंखों से पानी निकलने की समस्या भी हो जाती है क्योंकि आंखें नहीं झपकाने से ल्युब्रिकेंट सही तरीके से आंखों में फैलता नहीं और उससे खुजली होती है और पानी बहता है।
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    आंखों को कम झपकना
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    लेटकर टीवी देखना

    लगातार टीवी देखने से आंखों की रोशनी कम होने लगती है क्योंकि टीवी से निकलने वाली घातक किरणें हमारी आंखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचती है। कभी भी बहुत पास या बहुत दूर और लेटकर भी टीवी नहीं देखना चाहिए।
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    लेटकर टीवी देखना
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    एल्कोहल का अधिक सेवन

    बहुत अधिक एल्‍कोहल पीने वाले लोगों की आंखों को भी उतना ही नुकसान होता है जितना कि लीवर को। कई शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि बहुत अधिक शराब पीने वाले लोगों की आंखे तो कमजोर होती है ही, लेकिन साथ ही उनकी आंखों में लालीपन, तेज गति की चीजें न दिखना, रंगों के प्रति संवेदनशीलता जैसी कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं।
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    एल्कोहल का अधिक सेवन
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