हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

जानें क्या है कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग बीमारी

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Apr 13, 2016
कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग रोग दोनों ही ऐसी ही स्थिति हैं, जब शरीर जरूरत से ज्यादा कोर्टिसोल का उत्पादन करता है। चलिये जानें कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग बीमारी क्या है और इनके बीच क्या अंतर होता है।
  • 1

    क्या है कुशिंग रोग?


    कोर्टिसोल के शरीर में एक ऐसा हार्मोन है, जो सीधे तनाव की प्रतिक्रिया से जुड़ा होता है। किसी स्वस्थ इंसान में पिट्यूटरी ग्रंथि ACTH नामक हार्मोन का रिसाव करती है, जोकि कोर्टिसोल के उत्पादन और मुक्ति को उत्तेजित करता है। जब कोई व्यक्ति तनावपूर्ण स्थिति का सामना करता है तो शरीर अतिरिक्त कोर्टिसोल मुक्त करता है। कई बार शरीर इस हार्मोन के अतिरिक्त उत्पादन की वजह से इसे ठीक से विनियमित नहीं कर पाता है। कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग रोग दोनों ही ऐसी ही स्थिति हैं, जब शरीर जरूरत से ज्यादा कोर्टिसोल का उत्पादन करता है।  
    Images source : © Getty Images

    क्या है कुशिंग रोग?
  • 2

    कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग रोग में अंतर


    शरीर में ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स (glucocorticoids) महत्वपूर्ण रसायन होते हैं, जो अधिवृक्क ग्रंथियों में उत्पादित स्टेरॉयड हार्मोन होते हैं। ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स, जिसे विशेष रूप से कोर्टिसोल पुकारा जाता है, कई शारीरिक प्रक्रियाओं जैसे चयापचय और संक्रमण से लड़ने के लिए अपनी क्षमता आदि में मदद करता है। ग्लूकोकोर्टिकॉइड्स (प्राकृतिक और सिंथेटिक दोनों), एलर्जी, सांस की समस्याओं और त्वचा संबंधी समस्याओं के उपचार वाली दवाओं में इस्तेमाल किया जाता है।
    Images source : © Getty Images

    कुशिंग सिंड्रोम और कुशिंग रोग में अंतर
  • 3

    कुशिंग सिंड्रोम एक हार्मोन संबंधी विकार है


    कुशिंग सिंड्रोम टर्म का इस्तेमाल, उन लोगों के होता है, जिनका कोर्टिसोल का स्तर लंबे समय तक बहुत अधिक (हयपरकोर्टिसोलिस्म) होता है, के लक्षण के समूह  के लिये किया जाता है। बहुत से लोगों में कुशिंग सिंड्रोम होता है, क्योंकि नियमित रूप से कुछ ऐसी दवाएं ले रहे होते हैं, जोकि लगातार शरीर के लिए ज्यादा कोर्टिसोल का निर्माण करती हैं। डॉक्टर इसे कुशिंग सिंड्रोम का एक्सोजीनियस (शरीर के बाहर) प्रकार बुलाता हैं। अन्य लोगों को कुशिंग सिंड्रोम होता है, क्योंकि कुछ अधिवृक्क ग्रंथि कोर्टिसोल का अतिरिक्त उत्पादन करने लगती हैं। डॉक्टर इसे कुशिंग सिंड्रोम का एंडोजीनियस (शरीर के अंदर) प्रकार बुलाते हैं।
    Images source : © Getty Images

    कुशिंग सिंड्रोम एक हार्मोन संबंधी विकार है
  • 4

    कुशिंग रोग कुशिंग सिंड्रोम का एक रूप है


    कुशिंग रोग, अंतर्जात कुशिंग सिंड्रोम का सबसे आम रूप है। यह पिट्यूटरी ग्रंथि में ट्यूमर के कारण होता है, जोकि अड्रेनोकोर्टीकॉट्रोपिक (Adrenocorticotropic) हार्मोन अर्थात ACTH नामक एक हार्मोन को अत्यधिक मात्रा में स्रावित करता है। सौभाग्य से इस प्रकार का ट्यूमर आमतौर पर सौम्य होता है। किसी कैंसर (घातक) ट्यूमर के विपरीत, सौम्य ट्यूमर अपने मूल स्थान में रहता है और फैलता नहीं है। आपका कुशिंग सिंड्रोम का निदान होने के बाद, यह महत्वपूर्ण है कि आपके चिकित्सक हयपरकोर्टिसोलिस्म के कारण का पता लगाने के लिए नैदानिक प्रक्रिया जारी रखें।
    Images source : © Getty Images

    कुशिंग रोग कुशिंग सिंड्रोम का एक रूप है
  • 5

    कुशिंग रोग का निदान



    कुशिंग रोग का निदान करना छोड़ा मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसके लक्षण काफी धीरे बढ़ते हैं। कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने की प्रक्रिया चक्र में हो सकती है, इसलिये ये जरूरी नहीं कि परिक्षण के समय स्तर बढ़ा ही हो। यह निर्धारित करने के लिए कि रक्त कोर्टिसोल का स्तर बहुत अधिक है, यह जांच हार्मोन रक्त परीक्षण के साथ शुरू होती है। अत्यधिक रक्त कोर्टिसोल के अधिक बढ़ा होने की पुष्टि के लिये एक से अधिक परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है। यदि रोगी कोर्टिसोल दवाएं नहीं ले रहा है तो, चिकित्सक किसी संभावित ट्यूमर के स्थान का पता लगाने के लिए एमआरआई कर सकता है। यदि आप बढ़े कोर्टिसोल के स्तर के लक्षणों का अनुभव कर रहे हैं तो किसी एंडोक्राइनोलॉजिस्ट साथ बात जरूर करें।
    Images source : © Getty Images

    कुशिंग रोग का निदान
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर