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बेकाबू खांसी के इन कारणों को समझें

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 14, 2014
यूं तो खांसी अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन लगातार होने वाली खांसी शरीर के अंदर पनप रही या पनपने की कोशिश कर रही अन्‍य बीमारियों का लक्षण हो सकती है।
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    बेकाबू खांसी के कारण

    खांसी सबसे ज्‍यादा कष्‍टप्रद समस्‍याओं में से एक है। यूं तो खांसी अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, पर यह शरीर के अंदर पनप रही या पनपने की कोशिश कर रही अन्‍य बीमारियों का लक्षण हो सकती है। वैसे, आम इलाजों से खांसी ठीक भी हो जाती है, पर कई बार यह किसी गंभीर बीमारी की ओर भी इशारा कर सकती है, इसलिए इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। आमतौर पर संक्रमण को खांसी का कारण माना जाता है, लेकिन खांसी होने के अन्‍य कई कारण भी है। यहां कुछ आम कारणों के बारे में जानकारी दी गई है।
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    बेकाबू खांसी के कारण
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    एलर्जी

    पर्यावरण प्रदूषण लोगों में एलर्जी खांसी से पीड़ि‍त होने के मुख्य कारणों में से एक है। इसमें केमिकल, औद्योगिक गैसें, धूल, धुआं, मिट्टी और पराग कण श्वसन तंत्र को ट्रिगर कर खांसी पैदा करते है। इस तरह की खांसी आमतौर पर एलर्जी पैदा करने वाला तत्व को हटाने से होती है।
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    एलर्जी
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    मौसमी फ्लू

    यह खासकर सर्दी के मौसम की शुरुआत में होता है। सर्दी, छींक, खांसी, गले में दर्द, बदन दर्द व बुखार इसके सामान्य लक्षण हैं। साथ ही वायरल इफेक्‍शन सूखी खांसी का सबसे आम कारण है। वायरस के प्रत्यक्ष हमले, ठंडे पेय या आइसक्रीम का सेवन श्‍वसन अस्‍तर को वायरल संक्रमण के लिए अतिसंवेदनशील बनाता है।
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    मौसमी फ्लू
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    गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)

    दो सप्‍ताह से अधिक खांसी के साथ छाती और गले में जलने जैसी सनसनी जीईआरडी के कारण हो सकती है। जीईआरडी से होने वाले खांसी आमतौर पर सुबह-सबुह या रात में शुरू होती है। ऐसा इसलिए होता है जीईआरडी की समस्‍या होने पर पेट के एसिडिक तत्‍व (अम्लीय) भोजन नलिका में वापस बहने लगते हैं। भोजन नलिका की भीतरी पर्त एसिड यानी अम्ल को बर्दाश्त करने के लिए नहीं बनी है। इसलिए भोजन नलिका में अम्ल की मौजूदगी उसकी भीतरी पर्त में जख्म (अल्सर) पैदा कर खांसी का कारण बनती है।  
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    गैस्ट्रोइसोफेजियल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी)
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    क्रोनिक ब्रोंकाइटिस

    ब्रोंकाइटिस ब्रोन्कियल ट्यूबों के अस्तर की सूजन है। यानी ब्रोंकाइटिस की समस्‍या होने पर वायुनली तथा इसकी शाखाओं में संक्रमण या एलर्जी के कारण सूजन आ जाती है। अस्तर में क्रोनिक सूजन बलगम के साथ मिलकर खांसी को निष्कासित कर गीली खांसी, पैदा करती है। क्रोनिक ब्रोंकाइटिस का मुख्य कारण धूम्रपान है। यह साधारण जुकाम या ऊपरी श्वास नलिका में अन्य वायरल इन्फेकशन से भी हो सकता है
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    क्रोनिक ब्रोंकाइटिस
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    अस्‍थमा

    अगर आप सांस और घरघराहट के साथ खांसी की समस्‍या से भी जूझ रहे हैं, तो हो सकता है कि आप अस्‍थमा से पीड़ि‍त हो। अस्थमा एक गंभीर बीमारी है, जो श्वास नलिकाओं को प्रभावित करती है। श्वास नलिकाएं फेफड़े से हवा को अंदर-बाहर करती हैं। अस्थमा होने पर इन नलिकाओं की भीतरी दीवार में सूजन आ जाती है और यह सूजन नलिकाओं को बेहद संवेदनशील बना देती है। जब नलिकाएं प्रतिक्रिया करती हैं, तो उनमें संकुचन होता है और उस स्थिति में फेफड़े में हवा की कम मात्रा जाती है। इससे खांसी और सुबह और रात में सांस लेने में तकलीफ आदि जैसे लक्षण पैदा होते हैं।
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    अस्‍थमा
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    निमोनिया

    निमोनिया होने पर फेफड़ों में हवा की थैलियों में संक्रमण या बलगम भर जाता है। निमोनिया किसी जीवाणु, विषाणु या रसायन से होता है। अक्सर यह एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता है। सूखी खांसी के साथ बाद में हरे बलगम का आना, निमोनिया का कारण हो सकता है। निमोनिया शुरू में ब्रोंकाइटिस के समान हो सकता है, यह खून के धब्बे के साथ अंत हो सकता है।
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    निमोनिया
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    ट्यूबरक्लोसिस

    टीबी यानी ट्यूबरक्लोसिस। ये एक संक्रामक रोग है, जो बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बैक्टीरिया शरीर के सभी अंगों में प्रवेश कर रोग ग्रसित कर देता है। ये ज्यादातर फेफड़ों में ही पाया जाता है। अत्यधिक थकान और वजन कम होने के साथ लंबे समय तक खांसी आमतौर पर फेफड़ों के एक जीवाणु संक्रमण का संकेत मिलता है। खांसी में बलगम के साथ खून का आना ट्यूबरक्लोसिस संदिग्‍ध हो सकता है।
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    ट्यूबरक्लोसिस
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    फेफड़ों का कैंसर

    फेफड़ों का कैंसर बहुत अधिक धूम्रपान करने वालों और तंबाकू उपयोगकर्ताओं में खांसी का सबसे आम कारण है। आमतौर पर, तीन सप्‍ताह से अधिक खांसी, पुरानी खांसी में खून आना, सांस का उखड़ना, अस्पष्टीकृत वजन घटना, अत्यधिक थकान और सीने में दर्द फेफड़ों के कैंसर का संकेत हो सकता है।
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    फेफड़ों का कैंसर
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