हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

बच्चे के पेट में कीड़ों के प्रकार और उनका उपचार

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 26, 2016
आंतों में संक्रमण पैदा करने वाले कीड़े कई प्रकार के होते हैं जैसे, व्हिपवर्म, गिर्डिएसिस, टेपवर्म्स, थ्रेडवर्म्स(फीता कृमि), पिनवर्म्स, राउंडवर्म्स इत्यादि| इनके बारे में विस्तार से जानने औऱ इनके इलाज के बारे में इस स्लाइडशो में पढ़े ।
  • 1

    पेट में कीड़े होने का कारण

    मानव शरीर के भीतर पाये जाने वाले सभी कृमि प्रजनन क्रिया के बाद आंतो में अण्डे देते हैं। ये अण्डे ग्रसीत व्यक्ति के शौच के बाद,मल के माध्यम से मिटटी में पहुँच जाते हैं। मिट्टी से ये कृमि के अंडे गंदे हाथों व खाने की चीज़ों तक पहुँच जाते हैं। इस तरह ये उसी व्यक्ति या किसी और व्यक्ति की आँतों में पहुँच जाते हैं। मल से पेट तक का यह चक्र संक्रमण का बडा हिस्सा होता है। इसलिए खाने से पहले और शौच के बाद साबुन से हाथ धोना बेहद ज़रूरी है। आंत में पाये जाने वाले क़मि के बारे में विस्तार से पढ़े।
    Image Source-Getty

    पेट में कीड़े होने का कारण
  • 2

    पिनवर्म्स

    सृत्र कृमि (कीड़े) नर 2.5 मिमी होता है। ये कभी-कभी पेशाब करने की नली (मूत्रनली) या योनि के पास भी पहुंच जाते हैं और वहां खुजली और जलन पैदा करते हैं। सबसे अधिक व्यक्तियों में इसी प्रकार के आंत कृमि पाये जाते हैं। इन कृमियों का अधिकतर आक्रमण बच्चों पर ही होता है। ये कृमि बहुत छोटे होते हैं। इसके भी अंडे मल द्वारा धूल, मिटटी, पानी, सब्जियों आदि तक पहुंच जाते हैं, जिनके सेवन मात्र से ये अंडे पेट में पहुंच जाते हैं।  इससे उत्पन्न रोग का मुख्य लक्षण रक्त की भारी कमी हो जाना है, जिससे शरीर और चेहरा पीला पड़ जाता है। भूख घट जाती है तथा कमजोरी बढ़ती है।

    पिनवर्म्स
  • 3

    गोल कृमि

    ये सबसे अधिक पाये जाने वाले आंत कृमि हैं। यह कीड़े केंचुए जैसे लम्बे 4-12 इंच और पतले छोटी-छोटी आंतों में रहते हैं। इनका रंग कुछ मटमैला या पीला होता है। ये अधिकतर छोटी आंतों में मौजूद होते हैं। यह कभी-कभी आमाशय, प्लीहा (तिल्ली) और फेफड़े में भी चले जाते हैं। कई बार इनके कारण आंतो में रुकावट भी उत्पन्न हो जाती है और बच्चे को मितली आने लगती है। पेट में दर्द रहने लगता है तथा मरोड़ के साथ कभी कब्ज हो जाता है, या कभी दस्त आने लगते हैं। नींद में रोगी के मुंह से लार बहती है और बच्चे दांत पीसने लगते हैं। रोगी के नाक-मुंह में खुजली होती है। कभी-कभी शरीर पर पित्ती भी उछल जाती है।

    गोल कृमि
  • 4

    फीता कृमि

    फीता कीड़े की लम्बाई 31 से 62 मिमी, तक होती है यह मल के साथ गिर जाती है। यह आकार में चिपटा, गांठदार और रंग में सफेद होता है। फीता कृमि कई प्रकार के होते हैं, और यह अलग-अलग प्रकार से रोगी को प्रभावित करते हैं। फीता कृमि से संक्रमित रोगी की जाँच, उसके मल के द्वारा की जाती है।इन फीता कृमियों का आकार बहुत बड़ा हो, तो इनके बाहर निकलते समय थोड़ा दर्द हो सकता है।
    Image Source-Getty

    फीता कृमि
  • 5

    कीड़ों का उपचार

    बच्‍चों या बड़ों की आंत में कीड़े पड़ गये हों तो कच्‍चे आम की गुठली का सेवन करने से कीड़े मल के रास्‍ते बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए कच्चे आम की गुठली का चूर्ण दही या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इसके नियमित सेवन से कुछ दिनों में ही आंत के कीड़े बाहर निकल जायेंगे।अनार के छिलकों को सुखाकर इसका चूर्ण बना लीजिए। यह चूर्ण दिन में तीन बार एक-एक चम्मच लीजिए। कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से पेट के कीड़े पूरी तरह से नष्‍ट हो जाते हैं।
    Image Source-Getty

    कीड़ों का उपचार
Load More
X
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर
Disclaimer +
Though all possible measures have been taken to ensure accuracy, reliability, timeliness and authenticity of the information; Onlymyhealth assumes no liability for the same. Using any information of this website is at the viewers’ risk. Please be informed that we are not responsible for advice/tips given by any third party in form of comments on article pages . If you have or suspect having any medical condition, kindly contact your professional health care provider.