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आंखों से जुड़े कुछ प्रचलित मिथ

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Oct 13, 2014
आंखे अनमोल होती हैं, इन्ही की बदौलत हम दुनिया और इसकी खूबसूरती को देख पाते हैं, लेकिन स ही जानकारी न होने के कारण आंखों से जुड़े कई भ्रम और मिथ लोगों के बीच प्रचलित हैं।
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    आंखों की सच्चाई

    आंखे अनमोल होती हैं। इन्ही की बदौलत हम दुनिया और इसकी खूबसूरती को देख पाते हैं। आंखे न हों तो यह दुनिया भी ऐसी नहीं होती। लेकिन क्या हम अपनी आंखों का पूरा इस्तेमाल करते हैं? और क्या हम इसके बारे में सारी जानकारी रखते हैं? शायद नहीं! बहुत गहराई में न जाया जाए तो भी आंखों के बारे में कुछ ऐसी सामान्य बातें है जो अमूमन हमें मा लूम नहीं होती। बल्की आंखों से जुड़े कई भ्रम और मिथ लोगों के बीच प्रचलित हैं। तो चलिये जानें आंखों से जुड़े ऐसे ही कुछ प्रचलित मिथक और इनकी सच्चाई के बारे में।
    Image courtesy: © Getty Images

    आंखों की सच्चाई
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    टीवी देखना दृष्टिहीनता का कारण बनता है

    लोगों के बीच ये काफी प्रचलित है कि टेलीविजन को नजदीक से देखने से दृष्टिहीनता होती है। लेकिल सच या है कि, इलेक्ट्रोनिक्स को काफी पास से देर तक टकटकी लगाए देखने से आंखों में तनाव पैदा होता है। यह एक तत्कालिक समस्या होती है जिसके कारण बेचैनी या दृष्टि में अस्थायी कमी हो सकती है।
    Image courtesy: © Getty Images

    टीवी देखना दृष्टिहीनता का कारण बनता है
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    समस्या में ही मिले डॉक्टर से

    लोग अक्सर तभी आई डॉक्टर के पास जाते हैं जब उन्हें कोई समस्या होती है। लेकिन आंखों को स्वास्थ रखने के लिए बिना समस्या के भी साल के कम से कम दो बार अपनी आंखों की जांच कराते रहना जरूरी होता है।
    Image courtesy: © Getty Images

    समस्या में ही मिले डॉक्टर से
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    गाजर खाने से आंखें तेज होती हैं

    ये सरासर एक मिथ ही है। ज्यादा गाजर खआने से आंखों की रोशनी बढ़ने जैसा कोई प्रमाण मौजूद नहीं है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं की आप गाजर खाएं ही नहीं। गाजर के अपने कुछ स्वास्थ्य लाभ होते हैं।
    Image courtesy: © Getty Images

    गाजर खाने से आंखें तेज होती हैं
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    अंधेरे में पढ़ने से आंखें खराब होती हैं

    आपने अक्सर लोगों से सुना हागा कि यदि अंधेरे में पढ़ोगे तो आंखें खराब हो जाएंगी। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। कम सोशनी में पढ़ने से आंखें कुछ समय के लिए थक जरूर जाती हैं लेकिन इन्हें कोई परमानेंट डैमेज नहीं होता।
    Image courtesy: © Getty Images

    अंधेरे में पढ़ने से आंखें खराब होती हैं
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    बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं

    हमारी आंखे जन्म से सात साल की उम्र तक विकसित होती रहती हैं। इसलिए यह कह पाना मुश्किल होगा कि कम उम्र के बच्चों की आंखें कमजोर हैं या नहीं। बल्कि सच तो यह है कि इस उम्र से पहले किसी व्यक्ति की आंखें कितनी स्वस्थ है यह अनुमान आम तौर पर नहीं लगाया जा सकता।
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    बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं
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    आंखो का साइज बदलता रहता है

    कई लोगों की ऐसी मान्यता है कि उम्र के साथ आंखों का आकार भी बदलता रहता है। लेकिन यह सच नहीं है जन्म के बाद से हमारे शरीर के अंग बडे होने तक बढते रहते हैं लेकिन आंखो का कद हमेशा एक जैसा ही रहता है।
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    आंखो का साइज बदलता रहता है
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    मोतियाबिंद बूढे लोगों को ही होता है

    यह सच नहीं है, हां ये सच जरूर है कि मोतियाबिंद 65 साल से अधिक उम्र वाले लोगों में होने वाली आम बीमारी है। लेकिन यह इससे कम आयु के लोगों में भी हो सकता है। यह किसी इंसान में जन्मजात भी हो सकता है।  
    Image courtesy: © Getty Images

    मोतियाबिंद बूढे लोगों को ही होता है
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