जानें त्रिभुजासन करने का तरीका और इसके लाभ

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 17, 2016

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त्रिभुजासन शरीर को लचीला बनाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देते हुए शरीर को कई प्रकार के रोगों से दूर रखता है। आज हम आपको बता रहे हैं त्रिभुजासन करने की विधि और इसे करने से होने वाले फायदे।
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    क्या है त्रिभुजासन



    त्रिभुजासन एक बेहद लाभदायक आसन होता है। त्रिभुजासन को के नियमित अभ्यास से रीड़ की हड्डी लचीली बनती है और उसे बल मिलता है। साथ ही त्रिभुजासन शरीर को लचीला बनाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को बल देते हुए शरीर को कई प्रकार के रोगों से दूर रखता है। आज हम आपको बता रहे हैं त्रिभुजासन करने की विधि और इसे करने से होने वाले फायदे।

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    त्रिभुजासन की पहली विधि


    त्रिभुजासन को खड़े होकर किया जाता है। त्रिभुजासन को करने के लिए चित्र की तरह पहले सीधे खड़े हो जाएं और फिर अपने दोनों पैरों के बीच दो से ढाई फुट की दूरी बनाते हुए इन्हें फैला लें। इसके बाद अपने दाएं पैर को सीधा रखें और दाएं हाथ को कंधे की बिल्कुल सीध में कान से सटाकर ऊपर उठा लें और फिर बाएं पैर को घुटनों से मोड़ते हुए धीरे-धीरे बाईं ओर झुकते हुए बाएं हाथ की अंगुलियों से बाएं पैर के अंगुठे को छुएं। 2 से 3 मिनट तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं। अब इस क्रिया को इसी तरह से दाएं ओर से भी दोहराएं। इस करते हुए ध्यान रखें की ऊपर रखे हुए हाथ की हथेली हमेशा सामने की ओर हो।

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    त्रिभुजासन करने की दूसरी विधि


    त्रिभुजासन की दूसरी विधि में इस आसन को खड़े होकर करने के बजाए नीचे बैठ कर किया जाता है। इस विधि से त्रिभुजासन करने के लिए अपने दाएं पैर को आगे फैलाकर बैठ जाएं। दाएं पैर को बिल्कुल सीधा व तान कर रखें तथा बाएं पैर को घुटने से मोड़कर पीछे ले जाते हुए एड़ी को नितम्ब (कूल्हे) से सटाकर रख लें। इसके बाद अपने दोनों हाथों को फैलाकर सिर व छाती को आगे की ओर झुकाते हुए दाएं हाथ से दाएं पैर के पंजे को और फिर बाएं हाथ से बाएं पैर के पंजे को पकड़ने की कोशिश करें या छुएं। इस दौरान सांस सामान्य रूप से लें और छोड़ें। कुछ समय तक इस स्थिति में रहने के बाद सामान्य स्थिति में आ जाएं और फिर बाएं पैर को बिल्कुल सीधा रखें और दाएं पैरों को पीछे ले जाकर इस क्रिया को दोहराएं। इस तरह दोनों पैरों को बदल-बदलकर इस आसन का अभ्यास करें।

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    त्रिभुजासन करने के लाभ


    इस आसन से मेरूदंड (रीढ़ की हड्डी व शरीर के निचला भाग) पर अधिक प्रभाव होता है और रीढ़ की हड्डी मजबूत बनती है। इससे शरीर का संचालन व घुमाव बेहतर ढंग से हो पाता है। यह आसान करने से पाचन शक्ति ठीक होती है और भूख बढ़ाती है। इससे नितम्ब, ऊपरी जांघ (नारूआ या पिंडली) की हड्डियों पर चोट लगने के कराण हुआ लंगड़ापन दूर होता है। साथ ही त्रिभुजासन करने से पूरे शरीर में रक्त संचार (खून का बहाव) तेज होता है और शरीर के सभी अंगों में स्फूर्ति आती है। यह आसन शारीरिक की कार्य क्षमता को भी बढ़ाता है।

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