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महिलाओं में इन 7 स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम अधिक

By:Shabnam Khan , Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 07, 2015
वर्तमान की अस्‍वस्‍थ दिनचर्या और अनियमित खानपान के कारण बीमारियां समय से पहले हो रही हैं और इसका अधिक प्रभाव महिलाओं में हो रहा है, ऐसी ही कुछ बीमारियां हैं जिनका जोखिम महिलाओं में अधिक होता है।
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    महिलाओं में आम बीमारियां

    हम अपने घरों की बुजुर्ग महिलाओं को देखते हैं तो पाते हैं कि आज भी काफी स्वस्थ हैं। लेकिन आजकल की महिलाएं काफी कम उम्र से ही कई प्रकार की बीमारियों से घिर जाती हैं। इसके पीछे कई कारण होते हैं लेकिन लाइफस्टाइल में आया बदलाव सबसे बड़ा कारण होता है। इसलिए महिलाओं के लिए ये बहुत जरूरी है कि उन्हें उन सभी बीमारियों की जानकारी हो जिनका उन्हें जोखिम होता है। आइये जानते हैं ऐसी 7 बीमारियां जो महिलाओं को बहुत अधिक होती हैं।

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    महिलाओं में आम बीमारियां
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    यूटीआई

    यूटीआई यानी युरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन महिलाओं में होने वाली आम बीमारी होती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को यह बीमारी ज्यादा होती है, क्योंकि महिलाओं के शरीर का भीतरी ढांचा ऐसा होता है कि उसमें यह संक्रमण तेजी से फैल जाता है। यूटीआई तब होता है, जब बैक्टीरिया या फंगस हमारे पाचन तंत्र से निकल कर या फिर किसी अन्य माध्यम से पेशाब मार्ग की दीवारों पर चिपक जाते हैं और तेजी से बढ़ते चले जाते हैं। अगर संक्रमण को लंबे समय तक अनदेखा किया जाए तो ये बैक्टीरिया ब्लैडर और किडनी तक पहुंच जाते हैं और उन्हें नुकसान पहुंचा देते हैं। युरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन इतनी आम बीमारी है कि अमूमन हर महिला को अपनी जिंदगी में कभी-न-कभी इसका इलाज करवाना पड़ता है।

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    यूटीआई
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    एन्डोमेट्रीओसिस

    महिलाएं अपनी शारीरिक संरचना और वर्तमान जीवनशैली के चलते कई बार ऐसी बीमारियों की शिकार हो जाती हैं, जो उन्हें जीवन भर परेशान करती हैं। एन्डोमेट्रीओसिस एक ऐसी ही बीमारी है। यह एक ऐसा ट्यूमर है, जिसमें यूट्रस के आसपास की कोशिकाएं सेल्स की तरह का व्यवहार करने लगती हैं और शरीर के दूसरे हिस्सों में भी फैलने लगती हैं। यूट्रस में होने वाला यह ट्यूमर कई बार महिलाओं के लिए जानलेवा भी साबित होता है। महिलाएं अक्सर इसके लक्षणों की अनदेखी करती रहती हैं, जिससे इस बीमारी को बढ़ने में मदद मिलती है।

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    एन्डोमेट्रीओसिस
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    अनीमिया

    हमारे शरीर की कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है और ऑक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में लाल रक्त कणिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन द्वारा पहुंचाया जाता है। शरीर में आयरन की कमी से लाल रक्त कणिकाओं और हीमोग्लोबिन का निर्माण प्रभावित होता है। इससे कोशिकाओं को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, जो काबरेहाइड्रेट और वसा को जला कर ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए जरूरी है। इससे शरीर और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। इस स्थिति को एनीमिया कहते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व की कुल आबादी का छठा हिस्सा एनीमिया से ग्रस्त है, लेकिन पुरुषों के मुकाबले यह समस्या महिलाओं में अधिक पाई जाती है। हमारे देश में हर तीन में से एक महिला एनीमिया की शिकार है। गर्भवती महिलाओं में ये ज्यादा है।

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    अनीमिया
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    ब्रेस्ट कैंसर

    भारत में फिलाहल 22 महिलाओं में से एक महिला ब्रेस्ट कैंसर की मरीज है। डॉक्टरों के सामने हर साल ब्रेस्ट कैंसर के तकरीबन 75 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। एक अनुमान है कि 2015 तक इस बीमारी के ढाई लाख से ज्यादा मामले सामने आएंगे। खास बात ये है कि ग्रामीण महिलाओं से ज्यादा शहरी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। अगर दुनिया की बात करें तो दुनिया भर में हर 3 मिनट पर एक महिला ब्रेस्ट कैंसर की बीमारी से पीड़ित हो जाती है। जबकि हर 13 मिनट पर एक महिला की इस बीमारी से मौत हो जाती है।

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    ब्रेस्ट कैंसर
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    दिल की बीमारियां

    भारत में पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं के लिए हार्ट अटैक ज्यादा खतरनाक होता है और इसीलिए महिलाओं की मौत का मुख्य कारण हृदय रोग है। आमतौर पर महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण गर्दन या कंधे में दर्द, पाचन क्रिया ठीक न होना, श्वास चढऩा तथा उलटी आने को मन करना जैसे होने के कारण वे इसे कोई छोटी-मोटी बीमारी समझ लेती हैं जोकि काफी खतरनाक साबित होती है। महिलाओं में यह बीमारी शूगर, ब्लड प्रैशर या मोटापे की वजह से भी पुरुषों से ज्यादा व खतरनाक होती है और आंकड़े बताते हैं कि जिन महिलाओं को हार्ट अटैक होता है, उनमें से 64 प्रतिशत की मृत्यु तुरन्त हो जाती है। महिलाओं में हृदय रोग जहां आमतौर पर माहवारी बंद होने के बाद 45 से 60 वर्ष ज्यादा होते हैं। वहीं आजकल नौकरीपेशा करने वाली छोटी उम्र की महिलाएं भी इसका शिकार हो रही हैं।

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    दिल की बीमारियां
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    अर्थराइटिस

    जब हड्डियों के जोडो़ में यूरिक एसिड जमा हो जाता है तो वह गठिया का रूप ले लेता है। यूरिक एसिड कई तरह के आहारों को खाने से बनता है। रोगी के एक या कई जोड़ों में दर्द, अकड़न या सूजन आ जाती है। इस रोग में जोड़ों में गांठें बन जाती हैं और शूल चुभने जैसी पीड़ा होती है, इसलिए इस रोग को गठिया कहते हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन की कमी के कारण, शरीर में आयरन व कैल्सियम की अधिकता, पोषण की कमी, मोटापा, ज्‍यादा शराब पीना, हाई ब्‍लड प्रेशर और किडनियों को ठीक प्रकार से काम ना करने की वजह से गठिया होता है।

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    अर्थराइटिस
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    मेटाबॉलिक सिंड्रोम

    शरीर में फैट्स की कमी मेटाबॉलिज्म से जुड़ी समस्याओं की वजह भी हो सकती है। जो लोग फैट्स कम लेते हैं वे कार्बोहाइड्रेट की अधिकता डाइट में कर ही लेते हैं। ऐसे में कम फैट्स और अधिक कार्बोहाइडट्रेट शरीर इन्सुलिन का स्तर असामान्य होता है और मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ जाती हैं। ये समस्या महिलाओं में बहुत अधिक पाई जाती है।

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    मेटाबॉलिक सिंड्रोम
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