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महिला संभोग सुख के बारे में शीर्ष 10 तथ्य

By: ओन्लीमाईहैल्थ लेखक, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 12, 2013
आइए जानते हैं ऑर्गेज्‍म के बारे में कुछ बातें। कुछ रोचक और कुछ रहस्‍यमयी तथ्‍य, जिनके बारे में आपने पहले शायद कभी न सुना हो।
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    ऑर्गेज्‍म का रहस्‍य

    ऑर्गेज्‍म के बारे में बात करते हुए महिलायें अकसर शरमा जाती हैं। यह केवल संभोग में चरम सुख की प्राप्ति ही नहीं है, बल्कि इसके कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ भी हैं। आइए जानते हैं ऑर्गेज्‍म के बारे में कुछ बातें। कुछ रोचक और कुछ रहस्‍यमयी तथ्‍य, जिनके बारे में आपने पहले शायद कभी न सुना हो।

    ऑर्गेज्‍म का रहस्‍य
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    दर्द-निवारक है ऑर्गेज्‍म

    कुछ शोध इस बात को प्रमाणित करते है कि ऑर्गेज्‍म सभी प्रकार के दर्द, फिर चाहे वो अर्थराइटिस, ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द और प्रसव के बाद होने वाला दर्द ही क्‍यों न हो, से राहत दिलाने का काम करता है। इस दौरान शरीर से ऑक्‍सीटोसिन नामक केमिकल का स्राव होता है। यह केमिकल लगाव, रिलेक्‍स और भावनात्‍मक रूप से अन्‍य सकारात्‍मक परिस्‍िथतियों की अनुभूति कराता है। हालांकि इससे दर्द में आठ से दस मिनट तक राहत मिलती है, लेकिन सेक्‍स के बारे में केवल सोचने भर से दर्द दूर हो जाता है।

    दर्द-निवारक है ऑर्गेज्‍म
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    कण्‍डोम से नहीं पड़ता ऑर्गेज्‍म पर असर

    अगर आप यह सोचती हैं कि कण्‍डोम से ऑर्गेज्‍म के स्‍तर पर कोई असर पड़ता है, तो आप गलत है़। महिलाओं के ऑर्गेज्‍म पर कण्‍डोम का कोई सकारात्‍मक और नकारात्‍मक असर नहीं पड़ता। यह उस भ्रम के उलट है जिसमें कहा जाता है कि कण्‍डोम के बिना किया गया संभोग अधिक आनंददायक होता है। वास्‍तविकता यह है कि कण्‍डोम से संभोग का समय बढ़ जाता है।

    कण्‍डोम से नहीं पड़ता ऑर्गेज्‍म पर असर
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    एक तिहाई महिलाओं को नहीं होता ऑर्गेज्‍म

    अगर आपको संभोग के चरम पर पहुंचने में दिक्‍कत होती है, तो आप अकेली ऐसी नहीं हैं। प्‍लानड पेरेंटहुड स्‍टेटिस्‍टिक्‍स के अनुसार, तीन में से एक महिला को सेक्‍स के दौरान ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में मुसीबत होती है। वहीं 80 फीसदी महिलाओं को केवल यौनिक संभोग से ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में परेशानी होती है। हालांकि इसके लिए दवायें भी उपलब्‍ध हैं। संभोग के दौरान अन्‍य शारीरिक गतिविधियां काफी मदद करती हैं। फीमेल सेक्‍सुअल डिस्‍फंक्‍शन, जिसमें ऑर्गेज्‍म पर पहुंचना भी शामिल है, काफी सामान्‍य है। एक सर्वे के मुताबिक 43 फीसदी महिलाओं को ऐसी परेशानी होती है।

    एक तिहाई महिलाओं को नहीं होता ऑर्गेज्‍म
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    जी-स्‍पॉट तलाशने से होती है मदद

    जी-स्‍पॉट के बारे में माना जाता है कि यह महिला की योनि का वह हिस्‍सा होता है, जो उसे लंबे समय तक रहने वाला ऑर्गेज्‍म हासिल करने में मदद करता है। हालांकि यह काफी विवादास्‍पद विषय रहा है। ब्रिटेन और बाद में इटली के शोधकर्ता जी-स्‍पॉट की मौजूदगी को स्‍वीकार करते हैं, जबकि लॉस एंजेलिस के शोधकर्ता ऐसे किसी स्‍पॉट के होने की बात को नकारते हैं।

    जी-स्‍पॉट तलाशने से होती है मदद
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    उम्र के साथ बेहतर होता है ऑर्गेज्‍म

    उम्र के साथ आपकी सेक्‍स लाइफ बेहतर हो सकती है। इससे ऑर्गेज्‍म पर पहुंचने की आपकी नियमितता भी बढ़ सकती है। 18 से 24 वर्ष के बीच की 61 फीसदी महिलायें ऑर्गेज्‍म तक पहुंचती हैं, वहीं 30 के उम्र की पार पहुंचीं 65 प्रतिशत महिलायें ऑर्गेज्‍म तक पहुंचती हैं। जबकि 40 और 50 पार कर चुकी महिलाओं में यह प्रतिशत बढ़कर 70 तक पहुंच जाता है। माना जाता है कि इसके पीछे उम्र के साथ-साथ महिलाओं का अधिक आत्‍मविश्‍वासी हो जाना एक बड़ा कारण है। साथ ही वे अधिक अनुभवी भी हो जाती हैं।

    उम्र के साथ बेहतर होता है ऑर्गेज्‍म
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    नियमित ऑर्गेज्‍म

    अगर आपको ऑर्गेज्‍म पर पहुंचने में परेशानी होती है, तो आप अपने सेक्‍स के तरीके में बदलाव लाकर देखें। नये तरीके और अनुभव ऑर्गेज्‍म को अधिक सहज बनाते हैं। सेक्‍स से पहले फोरप्‍ले इसमें काफी मदद कर सकता है। कुछ जानकार ओरल सेक्‍स करने की भी सलाह देते हैं। उनका मानना है कि इससे भी काफी मदद मिलती है। ऐसा करने से सेक्‍स का समय बढ़ जाता है और महिला व पुरुष दोनों सेक्‍स का अधिक लंबे समय तक आनंद उठा पाते हैं।

    नियमित ऑर्गेज्‍म
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    महिला का सेक्‍सुअल स्‍वाभिमान करता है प्रभावित

    शोध बताते हैं कि महिला अपने जनानांगों के बारे में कैसे विचार रखती है, इससे ऑर्गेज्‍म का स्‍तर काफी हद तक प्रभावित होता है। यदि महिला स्‍वयं को लेकर आश्‍वस्‍त नहीं हैं, तो वह संभोग का पूरा आनंद नहीं उठा पाएगी। जब तक किसी महिला को योनि में पीड़ा, असामान्‍य डिस्‍चार्ज, सूजन अथवा कोई अन्‍य चिकित्‍सीय परेशानी नहीं है, तो आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आप पूरी तरह स्‍वस्‍थ और सामान्‍य हैं। सेक्‍स के लिए आत्‍मविश्‍वास होना बहुत जरूरी है।

    महिला का सेक्‍सुअल स्‍वाभिमान करता है प्रभावित
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    कुछ फर्क होता है

    महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों को ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में अधिक परेशानी नहीं होती। कई बार महिलायें अपने पुरुष साथी को खुश करने के लिए भी ऐसा बोलती हैं कि उन्‍हें ऑर्गेज्‍म हुआ है। महिलाओं और पुरुषों में डॉक्‍टर मानते हैं कि ऑर्गेज्‍म गैप होता है। एक ओर जहां 85 फीसदी पुरुष सोचते हैं कि उनकी महिला साथी को ऑर्गेज्‍म हुआ है, जबकि केवल 64 फीसदी महिलाओं को ही वास्‍तव में ऑर्गेज्‍म हुआ होता है। इसका इलाज यह है कि महिलायें अपने प्रेश प्‍वाइंट्स के बारे में जानें इससे उन्‍हें ऑर्गेज्‍म तक पहुंचने में आसानी होगी।

    कुछ फर्क होता है
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    बिना यौनिक संभोग के ऑर्गेज्‍म

    कुछ मामलों में यौनिक संभोग के बिना भी ऑर्गेज्‍म प्राप्‍त हो जाता है। कुछ महिलाओं को व्‍यायाम करते समय ऐसा हो सकता है। हालांकि ऐसा बहुत कम मामलों में होता है। जानकार मानते हैं कि अगर सबके साथ ऐसा होने लगे, तो हम शारीरिक रूप से अधिक फिट समाज होंगे। ऐसा इसलिए होता है कि कुछ शारीरिक गतिविधियों से योनि में रक्‍त प्रवाह बढ़ जाता है। और इससे भगशेफ (क्लिटोरिस) में कंपन होने लगता है।

    बिना यौनिक संभोग के ऑर्गेज्‍म
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    अधिकतर महिलाओं को लगता है समय

    कई महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले संभोग के चरम आनंद पर पहुंचने में समय लगता है। यह बिल्‍कुल सामान्‍य बात है। कुछ शोध यह भी बताते हैं कि अधिकतर महिलाओं को चरम पर पहुंचने में बीस मिनट तक का वक्‍त लगता है। अगर आपका पुरुष साथी अक्‍सर आपसे पहले चरम पर पहुंच जाता है, तो इसमें आप उसकी मदद कर सकती हैं। इसके लिए उसके लिंग के आधार पर हल्‍का सा दबाव डाला जा सकता है साथ ही कुछ मा‍नसिक व्‍यायाम भी अपनाये जा सकते हैं। अगर फिर भी लाभ न हो, तो आपके साथी को चिकित्‍सीय सलाह लेनी चाहिए।

    अधिकतर महिलाओं को लगता है समय
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