शिंगल्‍स से कैसे करें बचाव

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 30, 2015

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कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों में शिंगल्स का खतरा ज्यादा होता है, इसके अलावा इसके लक्षण आसानी से दिखाई नहीं देते हैं, लेकिन थोड़ी सावधानी बरती जाये तो इससे बचाव किया जा सकता है।
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    क्या होता है शिंगल्स

    शिंगल्स बुजुर्ग लोगों और कमजोर इम्यूनिटी सिस्टम वाले लोगों में तनाव, चोट, कुछ दवाओं के साइड-इफेक्‍ट या दूसरे कारणों से होता है। नर्व रुट्स में छिपे वैरिसेला-जोस्टर वायरस के सक्रिय हो जाने की वजह से होता है। वैरिसेला-जोस्टर एक प्रकार का हर्पिस वायरस है, जिससे चिकेनपॉक्स होता है। अक्सर ऐसा होता है कि चिकेनपॉक्स के बाद शरीर में ये वायरस नर्व रुट्स में छिपे रह जाते हैं। कुछ लोगों में यह दोबारा सक्रिय हो जाते हैं और शिंगल्स रोग पैदा करते हैं। शिंगल्स का सबसे सामान्य लक्षण शरीर के एक ओर के हिस्से में दर्द और छाले होना है। इससे बचाव के तरीकों के बारे में जानें इस स्‍लाइड शो में।
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    रोग की जांच और पहचान

    चिकित्सकीय परीक्षणों से शिंगल्स होने की पुष्टि हो सकती है और डॉक्टर प्रायः शरीर के बांए या दांए किसी एक ओर रैशेज देखकर शिंगल्स की पहचान करते हैं। अगर प्रयोगशाला परीक्षण में रोग की स्पष्ट पहचान नहीं हो पाती तो फफोलों की कोशिकाओं की जांच से हर्पिस का पता लगाया जा सकता है। अगर इसका निदान हो जाये तो डॉक्टर छालों की कोशिकाओं के जांच का इंतजार नहीं करते और एंटीवायरल दवाओं से इलाज शुरू कर देते हैं।
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    वैक्सीन से बचाव

    शिंगल्स से बचाव के लिए सबसे पहला विकल्प है शिंगल्स वैक्सीन। हो सकता है कि आपने शिंगल्स वैक्सीन के बारे में कहीं पढ़ा हो या फिर दोस्तों को बात करते हुए सुना हो। अगर आप 60 वर्ष से अधिक हैं, तो शिंगल्स वैक्सीन आपको शिंगल्स से बचा सकता है। अगर आपको पहले कभी शिंगल्स हो चुके हैं, तो इस वैक्सीन की वजह से आपको फिर से कभी शिंगल्स नहीं होंगे।
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    क्या करता है शिंगल्स वैक्सीन

    शिंगल्स वैक्सीन जोटेवैक्स चिकनपॉक्स के वायरस को कमजोर करता है। ये वैक्सीन आपके इम्यून सिस्टम को वैरिसेला-जोस्टर वायरस से लड़ने के लिए तैयार करता है। वैज्ञानिक स्टडीज़ में, शिंगल्स वैक्सीन शिंगल्स होने के खतरे को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है। खोज बताती हैं कि शिंगल्स वैक्सीन शिंगल्स के दौरान होने वाले नर्व पेन पोस्ट हर्पेटिक न्यूरेल्जिया के समय को कम करने में भी मदद करता है। ये बहुत दर्दभरा होता है, और आमतौर पर 30 दिन तक रहता है।
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    कौन लगवाए शिंगल्स का वैक्सीन

    ऐसे लोग जिनकी उम्र 50 या इससे अधिक हो, ऐसे लोग जिनका इम्यून सिस्टम ठीक से काम न करता हो, ऐसे लोग जो प्रतिरक्षादमनकारी दवाएं लेते हों, को आमतौर पर शिंगल्स होता है। शिंगल्स वैक्सीन 50 या उससे अधिक उम्र वालों के लिए अनुमत है। सीडीसी 60 या उससे अधिक उम्र के लोगों को शिंगल्स वैक्सीन की सलाह देता है। उन लोगों को भी शिंगल्स वैक्सीन लगवाना चाहिए जिन्हें शिंगल्स हो चुका है।
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    ऐसें में ना लें वैक्सीन

    जिलेटिन, ऐंटीबायोटिक नीओमिसिन या शिंगल्स वैक्सीन के किसी तत्व से खतरनाक ऐलर्जी रिऐक्शन। अपने डॉक्टर को बताएं कि आपको बहुत सारी ऐलर्जी हैं। एचआईवी/एड्स या कोई ऐसी बिमारी जो इम्यून सिस्टम को प्रभावित करती है।कैंसर ट्रीटमेंट, जैसे कि रेडिएशन या मोथैरेपी। ट्यूबरक्लोसिस, जिसका इलाज न हुआ हो।गर्भावस्था के दौरान शिंगल्स वैक्सीन नहीं लगवाना चाहिए। या शिंगल्स वैक्सीन लगवाने के बाद कम से कम तीन महीने तक गर्भधारण नहीं करना चाहिए।
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    अन्य उपचार

    शिंगल्स का किसी चिकित्सा पद्धति में कोई वास्तविक इलाज नहीं है, इलाज से मात्र रोग की अवधि घटती है। और इसमें जटिलताओं की संभावना कम होती है। एंटीवायरल दवाएं-शिंगल्स के दौरान दर्द औऱ रोग की अवधि में कमी लाता है।लंबे समय तक रहने वाले दर्द से राहत के लिए दर्दनिवारक, एंटीडिप्रेसेंट और मल्हम का उपयोग किया जा सकता है।एंटीवायरल दवाएं,जिसमें एसाइलोवीर, फेम्सीक्लोवीर या वैलासाइक्लोवीर का सेवन किया जा सकता है।  एक्यूप्रेशर चिकित्सक की देखरेख में आवश्यक बिंदु पर दबाव बनाकर भी शिंगल्स का इलाज किया जा सकता है  
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    शिंगल्स के साइड इफेक्ट्स

    फ्लू वैक्सीन की ही तरह, शिंगल्स वैक्सीन बाजु में ऊपर की ओर दी जाती है। इसके साइड इफैक्ट्स में, लाली, हल्का दर्द, सूजन या इंजेक्शन की जगह पर खुजली होना हो सकते हैं। किसी किसी को सर दर्द भी हो सकता है। लेकिन ऐसा बहुत कम मामलों में होता है।
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