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सबसे अच्‍छे प्रोबॉयोटिक्‍स का चयन कैसे करें

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Aug 14, 2015
प्रोबॉयोटिक फूड में न्यूट्रीशनल फैक्टर उच्‍च होता है और ये शरीर में नुकसानदेह कीटाणुओं को एक्टिव होने से रोकते हैं, इसलिए ऐसे फूड का सेवन कीजिए जिसमें प्रोबॉयोटिक की मात्रा अधिक हो, इन फूड के बारे में जानने के लिए यह लेख पढ़ें।
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    क्या है प्रोबायोटिक

    प्रोबायोटिक ऐसे जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं, जो प्राकृतिक तौर पर हमारी आँतों में पाए जाते हैं। साथ ही ये कुछ खाद्य पदार्थों में भी या तो प्राकृतिक रूप से उपस्थित होते हैं या फिर इन्हें उन खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है। ये हमारे शरीर में हानिकारक बैक्टेरिया को बढ़ने से रोकते हैं। खास तौर पर यदि किसी बीमारी अथवा किसी दवाई के असर की वजह से हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद प्रोबायोटिक्स में कमी आ जाती है तो डायरिया तथा मूत्र नली संबंधी इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
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    क्या है प्रोबायोटिक
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    प्रोबायोटिक फूड के गुण

    प्रोबायोटिक प्रॉडक्ट्स में लेक्टोबेसिलस और बायफिडोबैक्टीरियम की क्वांटिटी अधिक होती है, जो बॉडी को कई तरह से फायदा पहुंचाती है। दही, लस्सी, आइसक्रीम, इडली जैसे प्रॉडक्ट्स को खासतौर पर इस तरह तैयार किया जा रहा है, ताकि लोगों की बॉडी में प्रोबायोटिक पहुंच पाएं। प्रोबायोटिक प्रॉडक्ट्स में  कैल्शियम से लेकर प्रोटीन और विटामिन ए, बी, के तक तमाम चीजें इनके जरिए मिलती हैं।
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    प्रोबायोटिक फूड के गुण
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    पाचन और पोषण में लाभदायक हैं बैक्टीरिया

    लैक्टोबेसिलस श्रेणी के प्रोबायोटिक्स पेट के लिए वरदान हैं। इनके बिना पाचन और पाचन तंत्र अधूरा है। जीवधारियों के शरीर में भोजन को शरीर में अवशोषित करने और पोषण चक्र की अंतिम कड़ी तक बैक्टीरिया सक्रिय रहते हैं। इसीलिए लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवा देने के बाद डॉक्टर रोगी को प्रोबायोटिक लेने की सलाह देते हैं।
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    पाचन और पोषण में लाभदायक हैं बैक्टीरिया
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    कायाकल्प और जवां दिखनें में

    इलैक्टोबेसिली और बाइफिडो बैक्टीरिया शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की भूमिका निभाते हैं। बुढ़ापे की सबसे प्रमुख वजह है ऎसे मुक्त कण, जो तमाम मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं, हानिकारक तत्वों और दिनचर्या की वजह से पैदा होते हैं। अच्छे बैक्टीरिया हानिकारक फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने की अद्भुत शक्तिरखते हैं।
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    कायाकल्प और जवां दिखनें में
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    एलर्जी और टॉक्सिक इफेक्ट्स कम करने में

    ओसाका यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसीन के अनुसार नाक और साइनस से संबंधित एलर्जी में प्रोबायोटिक्स बेहद कारगर होते हैं। लैक्टोबेसिलस कैसेइ, लैक्टोबेसिलस पैराकैसेइ, लैक्टोबेसिलस ऎसिडोफिलस और बायफिडोबैक्टेरियम लोंगम जैसे अच्छे बैक्टीरिया जहरीले प्रभावों से मुकाबले में मददगार होते हैं।
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    एलर्जी और टॉक्सिक इफेक्ट्स कम करने में
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    वायरस से मुकाबला करने में मददगार

    इटली की स्पेनजा यूनिवर्सिटी के शोधकर्मियों ने प्रोबॉयोटिक बैक्टीरिया में वायरसों के मुकाबले की शक्ति खोज निकाली है। एनअरोबी जर्नल में प्रकाशित उनके शोध के अनुसार लैक्टोबेसिलस ब्रेवी जैसे बैक्टीरिया हर्पीज जैसे वायरसों का मुकाबला करते हैं और शरीर की रोग प्रतिरोधकता क्षमता को बढ़ाकर शरीर को स्वस्थ रखते हैं।
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    वायरस से मुकाबला करने में मददगार
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