विश्व थायराइड दिवस पर जानें थायराइड से जुड़े ये महत्वपूर्ण टेस्ट

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:May 25, 2015

हेल्‍थ संबंधी जानकारी के लिए सब्‍सक्राइब करें

Like onlymyhealth on Facebook!

थायरॉयड विश्व भर में एक सामान्य स्वास्थ्य समस्या है।बिगड़ते लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण थायरॉइड की समस्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं को कई गुना अधिक होती है। यह मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारी है। लगभग पैंतीस की उम्र को पार करते ही महिलाओं में इस समस्या के पाए जाने का प्रतिशत तीस से पैंतीस तक हो चुका है I इस बारे मे विस्तार से जानने के लिए ये स्लाइडशो पढ़े।
  • 1

    थायरायड से जुड़े टेस्ट

    थायरायड रोग में या तो बहुत ज्यादा थायरायड हार्मोन का उत्पादन होने लगता है जिसे हाइपरथायरायडिज्म कहते हैं या बहुत कम थायरायड हार्मोन बनता है जिसे हाइपोथायरायडिज्म कहते हैं। थाइराइड ग्रंथि से दो प्रकार के हार्मोन निकलते हैं। थायरॉक्सिन टी-4 में चार आयोडीन और ट्राईआयोडोथाइरीन टी-3 में तीन आयोडीन होते हैं। टी-4 जरूरत के अनुसार टी-3 में बदल जाते हैं। दिक्‍कत तब आती है जब यह ग्रंथि ठीक से काम नहीं करती। इस स्थिति में थकान, कमजोरी, जल्द जुकाम होने, त्वचा के सूखने, बाल गिरने, हाथ-पैर ठंडे रहने, मोटापा, तनाव और अवसाद, कब्ज, अनिद्रा, याददाश्त कमजोर होने की समस्‍या होती है।

    ImageCourtesy@gettyimages

  • 2

    ब्लड टेस्ट‍

    हाइपरथायरायडिज़्म को जांचने के लिए ब्लकड टेस्टह किया जाता है ताकि आपके ब्लाड में थायरोक्सिन और TSH (हार्मोन उत्तेजक थायरायड) के स्तर का आकलन कर पुष्टि की जा सके। TSH एक ऐसा हार्मोन है जो शरीर में थायराइड हार्मोन (टी -4) के स्तर का रक्त में संश्लेषण और नियंत्रण द्धारा प्रभावित होता है। थायराइड हार्मोन का उच्चा स्तजर और TSH का कम या न के बराबर होना अति थाइराइड का संकेत है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 3

    (थाइरॉइड स्टिम्युलेटिंग हार्मोन्स) टीएसएच

    यदि आपका वजन बिना वजह के बढता चला जा रहा है या फिर सर्दी, थकान, कब्‍ज की शिकायत है तो ये लक्षण हाइपोथायराइडिज्‍म के हैं। यह बीमारी थायरॉक्सिन हार्मोन कम बनने की वजह से होती है। तकरीबन हर 100 में से 10 महिलाओं को यह बीमारी होती है। इसका पता लगाने के लिये साल में एक बार टीएसएच टेस्‍ट जरुर करवाएं। टीएसएच थायरॉयड को बढाने वाला हॉर्मोन है। हाई टीएसएच और लो टी 4 का अर्थ है- क्रॉनिक हाइपोथायरॉयड । अगर टीएसएच हाई है और टी4 नॉर्मल, तब भी हाइपोथायरॉयड हो सकता है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 4

    एंटी-थाइरॉयड परॉक्सिडेज एंटीबॉडी

    एक शोध के अनुसार एक-तिहाई लोगों में एंटी-थाइरॉयड परॉक्सिडेज एंटीबॉडी-टीपीओ (थायरॉयड हार्मोन अनियंत्रित करने वाला एंटी बॉडी) सकारात्मकता होती है, जो थाइरॉयड की समस्या का स्पष्ट संकेत माना जाता है। एंटी-टीपीओ  का नियमित जांच कराते रहें, इसका स्तर बढ़ने का जिसका मतलब है कि अगले  तीन से चार साल में थायरॉयड की समस्या हो सकती है। सामान्य टीपीओ का स्तर 150एमयूआई/एमएल होता है। ऑटोइम्यून थायरॉइड कहलाता है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 5

    एटीए- थायरोग्लूब्लिन एंटीबॉडी

    ये एंटीबॉडी भी हाशीमोटो थायरायडाइटिस मे पाए गए थे। जिसमें रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली थायरायड पर हमला कर उसे नष्ट करने लगती है।इसका सबसे सामान्य कारण आहार में आयोडीन की कमी है। शरीर में इस एंटीबॉडी का समान्य स्तर 200एमयूआईयएमएल होता है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 6

    एफटी 3 टेस्ट

    टी 3 टेस्ट के जिए हाइपरथाइरॉयडिज़्म का पता आसानी से लगाया जा सकता है। एफटी 4 की ही तरह शरीर में एफटी3 भी भारी मात्रा मे मुक्त अवस्था मे रहते है।  सामान्य टी 3 का स्तर 3.5 से 7.8 पीएमओएल/लीटर होता है। सामान्य टीएसएच स्तर और निम्न एफटी4  हाइपोथाइरॉयडिज्म होता है। निम्न टीएसएच का स्तर और निम्न एफटी4 और निम्न एफटी3  हाइपरथाइरॉयडिज़्म का संकेत होता है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 7

    रेडियोधर्मी आयोडीन तेज परीक्षण

     इस परीक्षण को करने के लिए, रेडियोधर्मी आयोडीन का एक छोटा सा मौखिक खुराक (रेडियोआयोडीन) दिया जाता है। थायराइड हार्मोन बनाने के लिए आयोडीन एक आवश्यक घटक है जो सक्रिय थायरायड ग्रंथि द्वारा अवशोषित हो जाता है। रेडियोधर्मी आयोडीन खिलाने के बाद कुछ घंटे में, आयोडीन द्धारा थायरायड के तेज का निर्धारित किया जा सकता है। यदि रेडियो आयोडीन की तेज उच्च है, तो यह इंगित करता है कि आपकी थायरायड ग्रंथि थायरोक्सिन का अतिरिक्त उत्पादन करती है।
    ImageCourtesy@gettyimages

  • 8

    थायराइड स्कैन

    इस परीक्षण में, रेडियोधर्मी आइसोटोप नस में इंजेक्‍ट किया जाता है (आमतौर पर कोहनी के अंदर या कभी कभी हाथ की नस में)। कंप्यूटर स्क्रीन पर थायरायड की छवि का निर्माण करने के लिए एक विशेष कैमरे का प्रयोग किया जाता है। कुछ मामलों में, यह एक रेडियोधर्मी आयोडीन तेज परीक्षण के भाग के रूप में किया जाता है। थायरायड ग्रंथि द्वारा परीक्षण रेडियोधर्मी आइसोटोप के तेज का निर्धारित करता हैं।

     ImageCourtesy@gettyimages

Related Slideshows
Post Comment
X
Post Your comment
Disclaimer +
Though all possible measures have been taken to ensure accuracy, reliability, timeliness and authenticity of the information; Onlymyhealth assumes no liability for the same. Using any information of this website is at the viewers’ risk. Please be informed that we are not responsible for advice/tips given by any third party in form of comments on article pages . If you have or suspect having any medical condition, kindly contact your professional health care provider.
संबंधित जानकारी
  • सभी
  • लेख
  • स्लाइडशो
  • वीडियो
  • प्रश्नोत्तर