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इन पलों में कुछ कहने की बजाय दें जादू की झप्‍पी

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 17, 2016
मुन्‍नाभाई एमबीबीएस फिल्‍म के बाद 'जादू की झप्‍पी' शब्‍द सबसे अधिक प्रचलन में आया, लेकिन क्‍या आप जानते हैं ये वास्‍तव में बहुत फायदेमंद भी है, आइए हम बताते हैं किन-किन मामलों में दें जादू की झप्‍पी।
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    कुछ पल और जादू की झप्पी

    हमेशा ज़िंदगी में सब कुछ सही हो, ये जरूरी नहीं। लेकिन हर बूरे वक्त में किसी का साथ हो, ये जरूरी है। जिंदगी की सफलता-असफलता का अहसास तब होता है जब आपके साथ कोई हो। सफल हो गए, लेकिन कोई खुशी बांटने वाला नहीं, तो फिर ऐसी सफलता का क्या फायदा। जॉब चली गई, सामान चोरी हो गया, बॉस ने डॉट दिया... कोई नहीं, एक जादू की झप्पी और सारा दुख गायब। ये है कमाल जादू की झप्पी का। ये तब काम आती है जब शब्द साथ देते हैं। तो आइए जानें ऐसे कुछ खास पलों के बारे में जब सारे रिएक्शन बेकार हो जाते हैं और काम आती है जादू की झप्पी ही।

    कुछ पल और जादू की झप्पी
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    जब एक नम्बर से पीछे रह गईं

    जब आपका कोई करीबी एक्जाम के लिए खूब मेहनत करता है। लेकिन वो फर्स्ट की जगह सकेंड आ जाता है औऱ दुखी हो जाता है। तो तुरंत उसे एक जादू की झप्पी दें और कहें, "मेरे लिए फर्स्ट तुम ही हो।"

    जब एक नम्बर से पीछे रह गईं
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    डिग्री पूरी हो और कॉलेज का आखिरी दिन

    कॉलेज के दोस्त कभी वापस नहीं मिलते और उनके साथ बिताए हुए पल भी कभी वापस नहीं आते। इसलिए तो आखिरी दिनों में लोगों के शब्द नहीं आंखों के आंसू बोलते हैं। इस समय डिग्री पूरी होने की भी खुशी होती है और दोस्तों से बिछड़ने का दुख भी होता है। अब दुख मनाए कि सुख सेलीब्रेट करें, समझ नहीं आता। ऐसे समय में कुछ ना करें केवल दो मिनट के लिए जादू की झप्पी दें।

    डिग्री पूरी हो और कॉलेज का आखिरी दिन
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    ड्रीम कम्स ट्रू

    कुछ ऐसा जो आप तहे दिल से चाहते थे वो आपको अचानक से मिल जाए। उस समय जो खुशी होती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन है। ऐसे समय में केवल दौड़ के जाएं और अपने दोस्त, मां-पापा या भाई-बहन, किसी से गले मिलें।

    ड्रीम कम्स ट्रू
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    जब बॉस बेवजह चिल्लाए

    एक गलती, जो आपने नहीं की हो और उसके लिए आपके बॉस ने आपको सबके सामने सुना दिया हो। इस समय में कोई क्या ही कह सकता है। ना आपकी गलती है और ना बॉस की, क्योंकि उन्हें तो काम से मतलब है। ऐसे समय में तो केवल कोई प्यार से गले मिले और कहे, "कोई नहीं ऐसा होता है।"

    जब बॉस बेवजह चिल्लाए
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    री-युनियन

    पांच साल बाद जब बचपन के सारे दोस्त सोनू, मोनू, चिंकी-विंकी जो अचानक से एक-साथ मिल जाएं। यिप्पी.... इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है।
    अब ये आर्टिकल पढ़कर तो एक, "जादू की झप्पी" बनती है। सो हग योर फ्रैंड नाउ।

    री-युनियन
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