अर्थराइटिस से जुड़े 13 महत्‍वपूर्ण सवाल

By:Aditi Singh , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 28, 2015

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अर्थराइटिस जोड़ों के दर्द से संबंधित बीमारी है, वर्तमान में इसकी गिरफ्त में बुजुर्ग ही नहीं नौजवान भी आ रहे हैं, इससे जुड़े कई सवाल है जिनके बारे में जानना है जरूरी।
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    अर्थराइटिस से जुड़े सवाल

    अर्थराइटिस ज्दायातर लोगों को 60 साल के बाद होता है, लेकिन आज की बदलती जीवनशैली के चलते ये अब कम उम्र के लोगों में भी आसानी से देखा जा सकता है। यह जोड़ों से संबंधित बीमारी है और इसके कारण असहनीय दर्द होता है। अर्थराइटिस होने पर जोड़ों में सूजन की समस्‍या भी होती है। आगे की स्‍लाइड में इससे जुड़े कुछ सवाल और उनके जवाब के बारे में भी जानें।

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    क्या होते है आर्थराइटिस के लक्षण?

    आर्थराइटिस के किसी भी रूप में जोड़ों में सूजन दिखाई देने लगती है। इस सूजन के चलते जोड़ों में दर्द, जकड़न आदि की समस्‍या होती है। इस रोग में हड्डियों के सिरों को ढकने वाले सुरक्षा ऊतकों में विकार आ जाता है। हड्डियों के जोड़ परस्पर रगड़ खाने लगते हैं। ऐसा प्राय घुटनों, नितंबों, उंगलियों तथा मेरू की हड्डियों में होता है। वैसे कलाइयों, कोहनियों, कंधों तथा टखनों के जोड़ भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

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    कैसे होता है इसका निदान?

    आर्थराइटिस होने के बाद बिना किसी कारण भी दर्द होता है। जोड़ों में थोड़े-थोड़े अंतराल पर या हमेशा दर्द होता रहता है और उनमें सूजन आने लगती है। फिर जोड़ों में अकड़न होने लगती है। प्रभावित जोड़ों में हड्डियों के परस्पर रगड़ खाने से कचर-कचर जैसी आवाज़ भी आने लगती है।शुरुआत में पता चल जाए तो आर्थराइटिस का इलाज पूरी तरह मुमकिन है।

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    रूमेटॉयड अर्थराइटिस क्या होता है?

    रूमेटॉयड अर्थराइटिस का असर जोड़ों पर सबसे ज्यादा होता है। रूमेटॉयड अर्थराइटिस आमतौर पर 30 से 45 साल के लोगों को होता है। हमारा इम्यून सिस्टम प्रोटीन, बायोकेमिकल्स और कोशिकाओं से मिलकर बनता है, जो हमारे शरीर को बाहरी चोटों और के साथ बैक्‍टीरिया से हमें बचाता है। लेकिन कभी-कभी इस सिस्टम से भी गलती हो जाती है और यह शरीर में मौजूद प्रोटीन्स को ही नष्ट करना शुरू कर देता है, जिससे रूमेटॉयड अर्थराइटिस जैसी ऑटो-इम्यून बीमारियां हो जाती हैं। एक सीमा के बाद यह स्नायुतंत्र और फेफड़ों पर भी असर डालने लगता है। अगर ठीक समय पर इसका इलाज न कराया जाए, तो शरीर बेडौल हो जाने का जोखिम रहता है।

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    क्या होती है इलाज की प्रक्रिया ?

    इस रोग के इलाज के लिए अलग-अलग चिकित्सकीय विकल्प उपलब्ध हैं। इनमें दवाओं, फिजियोथेरेपी, व्यायाम, इंट्रा आर्टीक्यूलर इजंक्शनों से लेकर घुटने के प्रत्यारोपण सरीखे विकल्प मौजूद हैं, जिनका प्रयोग रोगी और उसकी अवस्था के अनुसार किया जाता है। व्‍यायाम के जरिये भी इसकी समस्‍या काफी हद तक दूर की जा सकती है।

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    अगर ना कराना चाहे घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी?

    जो रोगी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी के विकल्प का चयन नहीं करते, वे पारंपरिक उपायों जैसे दवाओं, व्यायाम, फिजियोथेरेपी और इजेक्शन आदि विकल्पों का सहारा ले सकते हैं। बहरहाल रोग की बढ़ी हुई या गंभीर अवस्था में उपर्युक्त विकल्पों के नतीजे उत्साहव‌र्द्धक या कारगर नहीं होते।

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    अर्थराइटिस की रोकथाम कैसे की जा सकती है?

    अर्थराइटिस की रोकथाम करने के लिए फिलहाल कोई खास इलाज उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन कुछ विशेष सजगताएं बरतकर और व्यायाम आदि करके व्यक्ति अर्थराइटिस होने की समस्या को कुछ समय के लिए टाला भी जा सकता है।

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    क्या है ऑटोलोगस स्टेम सेल थेरेपी?

    फिलहाल ऑस्टियोअर्थराइटिस के इलाज में बोन मैरो स्टेम सेल थेरेपी की कोई भूमिका नहीं है। स्टेम सेल थेरेपी से अर्थराइटिस ग्रस्त जोड़ों का सटीक इलाज कैसे किया जाए, इस संदर्भ में अभी तक कई शोध और अध्ययन किये जा रहे हैं।

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    घुटने या अन्य जोड़ों के प्रत्यारोपण में नवीनतम तकनीक क्या है?

    घुटना प्रत्यारोपण से संबंधित नवीनतम तकनीक के अंतर्गत कंप्यूटर नेवीगेशन, पेशेंट स्पेसिफिक इंस्ट्रूमेंटेशन और आई-असिस्ट नेवीगेशन को शामिल किया जाता है। आई-असिस्ट नेवीगेशन से एक सामान्य घुटने का मूवमेंट और उसकी कार्यप्रणाली का सटीक आकलन किया जाता है। इन तकनीकों का इस्तेमाल नवीनतम इंप्लांट्स में हो रहा है, जो पीड़ित व्यक्ति पर उम्दा रूप से फिट बैठते हैं और उसे अधिकतम राहत प्रदान करते हैं।

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    क्या युवाओं और बच्चों को भी होता है अर्थराइटिस?

    आज की जीवन शैली और देर तक गलत तरीके से बैठने और फास्ट फूड के बढ़ते चलन के कारण आर्थराइटिस जैसी जोडों की समस्यायें न केवल अधिक उम्र के लोगों में बल्कि युवकों और यहां तक की बच्चों में बढ़ रही है। यह रोग शरीर के रोग-प्रतिरोधक तंत्र (इम्यून सिस्टम) में विकार आने से उत्पन्न होता है। लगभग 60 प्रतिशत प्रभावित बच्चों में इसका सीधा संबंध माइकोप्लाज्मा नामक जीवाणु से माना जाता है। सामान्यत ये बीमारी 60 साल से ज्यादा के लोगों में होती है।

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    क्या हीट एंड कोल्ड थेरेपी से आराम मिलता है?

    हीट एंट कोल्‍ड थेरेपी वास्‍तव में शरीर की अपनी हीलिंग पावर को उत्‍तेजित करता है। ड्राय हीट या सूखी गर्मी में आप आप हीटिंग पैड का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। वहीं माइस्‍ट हीट में गर्म पानी में भीगे गर्म कपड़ों से सिंकाई शामिल होती है। वहीं कोल्‍ड थेरेपी में आपकी रक्‍तवाहिनियां सिकुड़ जाती हैं। शुरुआत में इससे आपको काफी परेशानी हो सकती है, लेकिन आखिर में इससे आपको काफी आराम होता है।

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    गठिया दूर करनें में योग मददगार होता है?

    अर्थराइटिस से मुक्ति पाने में पवनमुक्तासन, शशांकासन, वज्रासन आदि योगासन उपयोगी साबित होते हैं। इसके अतिरिक्त अपनी शक्ति के अनुसार सूर्य नमस्कार का नियमित अभ्यास समस्या से मुक्त होने के लिए पर्याप्त है। अर्थराइटिस के रोगी उदर श्वसन, भस्त्रिका तथा नाड़ी शोधन प्राणायाम का अभ्यास भी कर सकतें है। ये पाचन शक्ति बढ़ाकर नाडियों में प्राणशक्ति को बढ़ाते हैं तथा उनके अवरोधों को दूर करते हैं।

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    क्या ग्लूकोसामाइन अर्थराइटिस में मदद करता है?

    ग्लूकोसामाइन प्राकृतिक मिश्रण है जो ग्लूकोमीनोग्लाइकेन्स का एक सामान्य घटक है। यह स्वस्थ्य कोमल हड्डी और झिल्ली द्रव्य में पाया जाता है। ग्‍कोसामाइन जोड़ो को लचीला बनाता है और स्वस्थ कार्टिलेज उपास्थिध्द का सहायक है। खासकर घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस को दूर करने में यह मद्दगार है। ये तत्व ऊतकों के क्षीण होने की प्रक्रिया को रोककर उनके दोबारा निर्माण में सहायक होते है।

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