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चीजें जो पुरुष शुक्राणुओं को नुकसान पहुंचा सकती हैं

By: अन्‍य , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Feb 11, 2014
गर्भधारण न कर पाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, शुक्राणुओं के स्‍तर में कमी, अंडाणुओं की गुणवत्ता का कम होना और शुक्राणुओं का असक्रिय होना। एक अनुमान के अनुसार दस फीसदी जोड़ों को प्रजनन क्षमता में कमी की शिकायत हो सकती है।
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    पुरुष शुक्राणुओं के लिए घातक चीजें

    गर्भधारण न कर पाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शुक्राणुओं के स्‍तर में कमी, अंडाणुओं की गुणवत्ता का कम होना और शुक्राणुओं का असक्रिय होना। एक अनुमान के अनुसार दस फीसदी जोड़ों को प्रजनन क्षमता में कमी की शिकायत हो सकती है। इसमें यह बात सामने आयी है कि अकेले पुरुषों की भूमिका इसमें 30 फीसदी हो सकती है।

    पुरुष शुक्राणुओं के लिए घातक चीजें
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    पुरुषों में करोड़ों शुक्राणु

    हालांकि पुरुष रोजाना लाखों शुक्राणुओं का निर्माण करते हैं। वहीं महिलाये अपने पूरे जीवन में 300 से 400 अण्‍डाणुओं का ही निर्माण करती हैं। लेकिन, कई बाहृय कारणों का असर पुरुष शुक्राणुओं के स्‍तर और गुणवत्‍ता पर पड़ता है। और क्‍योंकि शुक्राणुओं की कोशिकाओं को परिपक्‍व होने में 75 दिन का समय लगता है, उन्‍हें नुकसान पहुंचाना आपकी प्रजनन क्षमता पर विपरीत असर डाल सकता है। आइए जानें वे कारण जिनसे शुक्राणुओं के स्‍तर में कमी आ सकती है।

    पुरुषों में करोड़ों शुक्राणु
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    अधिक गर्मी

    अंडकोष सही प्रकार से काम करें, इसके लिए जरूरी है कि उनका तापमान शरीर के सामान्‍य तापमान से कम हो। सौभाग्‍य से पुरुष शरीर रचना इसी प्रकार की है कि अंडकोष का तापमान शरीर के तापमान से कम रहे। अगर अंडकोश का तापमान भी शरीर के सामान्‍य तापमान यानी करीब 98 डिग्री फॉरहेनहाइट तक पहुंच जाए, तो शुक्राणुओं के निर्माण पर नकारात्‍मक असर पड़ता है। एक बार यदि ऐसा हो जाए, तो इससे बाहर निकलने में महीनों लग सकते हैं। अधिक गर्मी से शुक्राणुओं के स्‍तर, गुणवत्‍ता और गतिशीलता पर भी असर पड़ता है।

    अधिक गर्मी
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    गर्म टब

    'गीली गर्मी' अंडकोषों के लिए अच्‍छी नहीं होती। वर्ष 2007 में प्रकाशित एक स्‍टडी के अनुसार हॉट टब में केवल 30 मिनट गुजारने से ही शुक्राणुओं के निर्माण पर आजीवन बुरा आर पड़ता है। हालांकि इस शोध में यह भी बताया गया था कि इस नकारात्‍मक प्रभाव को पलटा भी जा सकता है। जानकार मानते हैं कि शुक्राणुओं को परिपक्‍व होने में लंबा समय लगता है, इसलिए किसी भी प्रकार के इलाज का असर नजर आने में कम से कम तीन महीने लग सकते हैं। यह समय छह से नौ महीने का भी हो सकता है।

     गर्म टब
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    बुखार

    यह बात शायद आपको थोड़ी हैरान करे, लेकिन अधिक तेज बुखार भी शुक्राणुओं के स्‍तर को बुरी तरह प्रभावित करता है। इसका हॉट बाथ टब जितना ही बुरा असर होता है। बुखार कितना अधिक समय तक रहता है यह बात भी काफी मायने रखती है। वर्ष 2003 में प्रकाशित एक शोध के मुताबिक बुखार के दौरान शुक्राणु निर्माण 35 फीसदी तक कम हो जाता है।

    बुखार
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    लैपटॉप

    क्‍या एक लैपटॉप से भी पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। स्‍ट्रॉनी ब्रुक में स्‍टेट यूनिवर्सिटी ऑफ न्‍यूयॉर्क के शोध के मुताबिक लैपटाप और शुक्राणुओं के स्‍तर में सीधा संबंध है। गोद में लैपटॉप रखकर बैठने से अंडकोषों के तापमान में इजाफा होता है। और यह अधिक तापमान ही शुक्राणुओं के स्‍तर और गुणवत्‍ता को नुकसान पहुंचाता है। तो अगर आप अपने शुक्राणुओं के स्‍तर को सामान्‍य बनाये रखना चाहते हैं, तो लैपटॉप का इस्‍तेमाल डेस्‍क पर रखकर ही करें।

     लैपटॉप
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    जांघिया

    बहुत ज्‍यादा टाइट जांघिया पहनने से भी शुक्राणुओं के स्‍तर में काफी कमी आती है। बॉक्‍सर यानी खुले जांघिया इस मामले में काफी बेहतर होते हैं। इसके साथ ही लंबे समय तक टाइट बाइसाइकिल जांघिया पहनना भी काफी नुकसानदेह हो सकता है। पुरुषों की पैंट और जांघिया यदि बहुत ज्‍यादा कसे हुए होंगे, तो इससे उनके शुक्राणुओं के स्‍तर में काफी कमी आएगी।

     जांघिया
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    फूली हुई नसें

    करीब 15 फीसदी पुरुषों को नसों में सूजन की शिकायत होती है। यह शिकायत मुख्‍यत: अंडकोषों और उसमें भी बायें अंडकोष में होती हैं। जब किसी पुरुष को शुक्राणुओं के स्‍तर में कमी की शिकायत हो, तो डॉक्‍टर उसकी नसों की जांच करने की बात कह सकते हैं। इसके लिए डॉक्‍टर सर्जरी का भी सहारा ले सकते हैं अथवा किसी अन्‍य उपाय से भी इसका इलाज कर सकते हैं। हालांकि नस की यह गड़बड़ी किस कारण से शुक्राणुओं के स्‍तर में कमी लाती है, इस बारे में अभी तस्‍वीर साफ नहीं है। हालांकि, कुछ डॉक्‍टर यह भी मानते हैं कि सर्जरी के बाद शुक्राणुओं की गुणवत्‍ता में भी इजाफा होता है।

    फूली हुई नसें
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    मोबाइल फोन

    मोबाइल फोन के पुरुष वीर्य और शुक्राणुओं के स्‍तर पर पड़ने वाले प्रभावों पर कई राय हैं। वर्ष 2008 में हुए एक अध्‍ययन में यह बात सामने आयी कि जो पुरुष दिन में चार घंटे से अधिक समय तक सेल फोन का इस्‍तेमाल करते हैं, उनमें शुक्राणुओं की संख्‍या और गतिशीलता कम पायी गयी। डॉक्‍टर तो रेडिएशन से बचने के लिए मोबाइल फोन को जेब के बजाय बैग में रखकर चलने की सलाह देते हैं। हालांकि इस शोध से कई डॉक्‍टर असहमत भी हैं।

    मोबाइल फोन
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    मोटापा

    मोटापा सेक्‍स अनिच्‍छा, प्रजनन क्षमता और शुक्राणुओं के स्‍तर सभी को प्रभावित करता है। 2009 में विश्व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की रिपोर्ट के मुताबिक सामान्‍य पुरुषों की तुलना में मोटे व्‍यक्ति के अंडकोषों की क्रियाप्रणाली और उनमें शुक्राणुओं की संख्‍या काफी कम पायी गयी। हालांकि मोटापा वीर्य के स्‍तर में कमी आती है, लेकिन खतरनाक स्‍तर तक मोटापा ही शुक्राणुओं पर नकारात्‍मक असर डालता है।

    मोटापा
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    जीवनशैली

    तंबाकू, अल्‍कोहल और नशे की आदतें भी सेक्‍स क्रिया पर विपरीत असर डालती हैं। पुरुषों की प्रजनन क्षमता के लिए ये सब चीजें काफी खतरनाक होती हैं। वर्ष 2010 के एक शोध के मुताबिक अल्‍कोहल का अधिक सेवन पुरुषों के शुक्राणुओं की गुणवत्‍ता और निर्माण को बुरी तरह प्रभावित करती हैं। वहीं सिगरेट और धूम्रपान शुक्राणुओं की गतिशीलता को प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही धूम्रपान डीएनए को प्रभावित कर स्‍तंभन दोष को भी बढ़ाता है।

    जीवनशैली
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    अन्‍य कारण

    अनुवांशिक कारण- क्रोमोजोम में असामान्‍यतायें भी शुक्राणुओं के निर्माण और उनके स्‍तर में कमी ला देती हैं। इसके अलावा मानसिक बीमारियां और समस्‍यायें भी इस परिस्थिति को जन्‍म दे सकती हैं। इसके अलावा हॉर्मोन असंतुलन, अंडकोष कैंसर, अंडकोषीय समस्‍यायें और अन्‍य सेक्‍स समस्‍यायें भी इसका कारण बन सकती हैं।

    अन्‍य कारण
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