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महिलाओं के दिल के लिए अच्‍छा नहीं भावनात्‍मक तनाव

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 01, 2014
हाल ही में शिकागो में चल रहे अध्‍ययन से यह बात सामने आई कि भावनात्‍मक तनाव पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के दिल के रक्‍त प्रवाह को प्रभावित करता है।
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    दिल के रक्‍त प्रवाह पर असर

    महिलायें भावनात्‍मक रूप से जल्‍दी जुड़ जाती हैं, इसलिए उन्‍हें भावनात्‍मक तनाव का अधिक सामना भी करना पड़ता है। लेकिन भावनात्‍मक तनाव दिल के लिए अच्‍छा नहीं है, क्‍योंकि इसके कारण उनका रक्‍त असंतुलित हो सकता है। शिकागो में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के वैज्ञानिकों द्वारा पेश किये गये रिपोर्ट में यह बात सामने आयी। इसलिए दिल को स्‍वस्‍थ रखने के लिए भावनात्‍मक रूप से मजबूत रहने की कोशिश करें।
    Image Courtesy : Getty Images

     

     

    दिल के रक्‍त प्रवाह पर असर
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    भावनात्‍मक तनाव का दिल की बीमारी से संबंध

    यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह की शोधकर्ता नेसी हेनरी के अनुसार, दिल की बीमारी पुरुषों के लिए भी उतनी ही खतरनाक है जितनी महिलाओं के लिए। इसलिए वैज्ञानिक इस बारे में जानकारी एकत्र कर रहे हैं कि भावनात्मक तनाव दिल की बीमारी के साथ कैसे संबंधित हैं।"
    Image Courtesy : Getty Images

    भावनात्‍मक तनाव का दिल की बीमारी से संबंध
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    भावनात्‍मक तनाव का महिलाओं पर असर

    शिकागो में हुए शोध के अनुसार, दिल की बीमारियों से ग्रस्‍त भावनात्‍मक तनाव में रहने वाली युवा महिलाओं के दिल में पुरुषों की तुलना में रक्‍त का प्रवाह कम होने की अधिक संभावना होती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसा महिलाओं का भावनात्‍मक रूप से बहुत जल्‍दी जुड़ जाने के कारण होता है।   
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    भावनात्‍मक तनाव का महिलाओं पर असर
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    शोध की माने तो

    अमेरिका में एमोरी यूनिवर्सिटी के अध्ययन लेखक वियोला वाकरीनो के अनुसार, छोटी उम्र में दिल की बीमारियों से पी‍ड़ित महिलाओं को विशेष उच्‍च जोखिम के समूह में रखा जाता है, क्‍योंकिे भावनात्‍मक तनाव उन्‍हें काफी हद तक कमजोर कर देता हैं।
    Image Courtesy : Getty Images

    शोध की माने तो
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    मध्‍यम आयु वर्ग की महिलाओं पर असर

    वाकरीनो के अनुसार, युवा और मध्‍यम आयु वर्ग की महिलाएं भावनात्‍मक तनाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती है, क्‍योंकि उन्‍हें रोजमर्रा की जिंदगी के तनाव जैसे बच्‍चों को संभालना, शादी, नौकरी और माता-पिता की देखभाल का पुरुषों की तुलना में अधिक सामना करना पड़ता है।  
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    मध्‍यम आयु वर्ग की महिलाओं पर असर
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    बॉयोलॉजी की भूमिका

    बॉयोलॉजी (जैविकी) की भी अपनी भूमिका हो सकती है- उदाहरण के लिए भावनात्‍मक तनाव के दौरान हृदय अथवा परिधीय रक्‍त वाहिनियों पर अधिक कसाव पड़ने की बजाय कई बार पेट की मांसपेशियों पर अधिक दबाव पड़ने लगता है।
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    बॉयोलॉजी की भूमिका
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    हार्ट अटैक का असर

    आमतौर पर, महिलाओं के जीवन में हृदय रोग का विकास पुरुषों की तुलना में बहुत बाद में होता है। लेकिन फिर भी समान उम्र के पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हार्ट अटैक से मरने की संभावना अधिक होती है। लेकिन मधुमेह या उच्च रक्तचाप के रूप में जोखिम कारकों के मृत्यु दर मतभेदों की व्याख्या नहीं की जा सकती है।
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    हार्ट अटैक का असर
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    अध्‍ययन का नतीजा

    अध्‍ययन में शोधकर्ताओं ने मानकीकृत मानसिक तनाव परीक्षण किया और परीक्षण के दौरान पाया कि स्थिर कोरोनरी हृदय रोग से ग्रस्‍त 534 रोगियों का पारंपरिक शारीरिक तनाव परीक्षण किया। अध्‍ययन के परिणामस्‍वरूप, 55 या इससे छोटी आयु वर्ग के पुरुषों की तुलना में महिलाओं के दिल में रक्‍त के प्रवाह में तीन गुना से अधिक की कटौती नोटिस की गई।
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    अध्‍ययन का नतीजा
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