बीमारी भी हो सकती है फोबिया

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 12, 2015

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हम सभी जानते हैं कि फोबिया क्या है। हमें मालूम है कि यह किस हद तक हमारे जीवन को प्रभावित कर सकता है। लेकिन, कुछ इस तरह के फोबिया भी होते हैं, जिनके बारे में आपको बिलकुल जानकारी नहीं होती।
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    फोबिया कैसे-कैसे

    कुछ सामान्य प्रकार के फोबिया होते हैं, जैसे एगोराफोबिया। इसमें इनसान को भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से डर लगता है। और इसी तरह थानाटोफोबिया हो, जिसमें व्यक्ति को मौत का डर सताता रहता है। हम सभी जानते हैं कि फोबिया क्या है। हमें मालूम है कि यह किस हद तक हमारे जीवन को प्रभावित कर सकता है। लेकिन, कुछ इस तरह के फोबिया भी होते हैं, जिनके बारे में आपको बिलकुल जानकारी नहीं होती। आपको यह पता ही नहीं होता कि ये फोबिया हैं और ये किस प्रकार आपकी जिंदगी पर असर डाल सकते हैं।
    Image Courtesy : Getty Images

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    एम्बूलोफोबिया

    खड़े होने और चलने का डर
    खड़ा होना, चलना और शायद दौड़ना हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा है। यह प्राकृतिक घटनायें हैं जिनसे हर व्यक्ति जुड़ा होता है। लेकिन, इसी दुनिया में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो एम्बूलोफोबिया के शिकार होते हैं। इस फोबिया के शिकार लोगों को खड़े होने अथसा पैदल चलने से डर लगने लगता है। और वे रोजाना इस परेशानी से दो चार होते हैं। हालांकि यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन यह पूरी तरह से सच है। और साथ ही तकलीफदेह भी। सोचिये जरा ऐसे लोगों को अपने रोजमर्रा के काम करने में कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।
    Image Courtesy : Getty Images

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    डेकिडोफोबिया

    चुनने और फैसला लेने का डर
    जब आपसे कोई फैसला लेने के लिए कहा जाता है, तो आपके रोंगटे खड़े हो जाते हैं। या फिर आपको फिक्र होने लगती है। यह भी संभव है कि दो चीजों में से किसी को चुनने में आपको काफी मुश्किल होती है। और अगर इन सब सवालों का जवाब हां में है, तो बहुत संभव है कि आप डेकिडोफोबिया हो। डेकिडोफोबिया में इनसान लगातार एक प्रकार के मानसिक द्वंद्व से गुजरती रहता है और फैसला लेने के बाद उसे डर लगने लगता है। इसमें वे अपने ही लिये हुए फैसलों से डरने लगते हैं।  इसका अर्थ यह है कि दुनिया के साथ किसी भी प्रकार का संवाद स्थापित करते समय इस प्रकार के व्यक्ति को परेशानी होती हैष
    Image Courtesy : thecitypaperbogota.com

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    किबोफोबिया

    भोजन का डर
    भोजन हमारे जीवन के लिए बहुत जरूरी है। इसके बिना इनसानी जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन एक दुर्लभ प्रकार की बीमारी किबोफोबिया में व्यक्ति को भोजन करने से डर लगने लगता है। किबोफोबिया से ग्रस्त मरीज के सामने केवल दो विकल्प होते हैं, या तो वे भोजन न करें और भूख से मर जायें। या फिर हर निवाले के साथ डरते हुए भोजन करें। अब जरा सोचकर देखिये कि इस प्रकार के डर से पीडि़त लोगों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा।
    Image Courtesy : file.answcdn.com

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    सिमोनिफोबिया (हायपनोफोबिया)

    नींद से डर
    भोजन की ही तरह जिंदा रहने के लिए नींद बेहद जरूरी है। कुछ जानकार तो मानते हैं कि हम भोजन के बिना तो सप्ताह भर कुछ तकलीफ के साथ गुजार सकते हैं, लेकिन नींद के बिना कुछ दिन भी गुजारने बेहद मुश्क‍िल हैं। अगर आपको पूरी नींद न मिले तो इससे आपके शरीर, मन और मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। लेकिन, इस बीमारी में  अगर आप सोने जाते हैं तो इसमें भी आपको काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। आपको डर लगने लगता है और इस डर के कारण सो पाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।
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    एकोस्ट‍िकोफोबिया

    आवाज या शोर का डर (यहां तक कि अपनी आवाज का भी डर)
    सबसे बड़ा सवाल यही है कि एकॉस्टिकोफोबिया से ग्रस्त व्यक्ति आखिस सामान्य जीवन भला कैसे जी सकता है। क्या आप डॉक्टर से यह गुजारिश करते हैं कि वह आपको पूरी तरह से बहरा बना दे। या फिर आप अपना बाकी जीवन किसी साउंड प्रूफ कमरे में बिताना पसंद करेंगे। एकॉस्टिकोफोबिया से पीड़ित व्यक्ति अचानक हुई किसी भी आवाज से डर जाते हैं, फिर चाहे वह साथ वाले मकान में हुआ जरा सा शोर हो या फिर दूर से गुजरते वाहनों की आवाज। इतना ही नहीं ये लोग अपनी ही आवाज से डरने लगते हैं। और अगर ये किसी भी प्रकार के शोर से बचने के लिए अपने कानों को ढंक लेते हैं, लेकिन उससे भी कोई फायदा नहीं होता क्योंकि वे सिर में बहने वाले खून की आवाज से भी परेशान हो जाते हैं।
    Image Courtesy : listverse.com

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    एगोराफोबिया

    भीड़ से डर
    भीड़ से थोड़ी घबराहट तो स्‍वाभाविक है, लेकिन अगर कोई व्‍यक्ति सामाजिक अवसरों या सार्वजनिक स्‍थानों पर जाने से हमेशा बचने की कोशिश करे तो यह एगोराफोबिया का लक्षण हो सकता है। एगोराफोबिया से पीड़ित व्यक्ति को घर से बाहर जाने में, दुकानों या सिनेमाघरों में घुमने, भीड़-भाड़ में जाने, ट्रेन में अकेले सफर करने, या सार्वजनिक जगहों में जाने, में घबराहट होती है। यानि ऐसी जगह से जहां से निकलना आसान न हो, व्यक्ति को घबराहट होने लगती है और उससे बचने का प्रयास करता है।
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    माइसोफोबिया

    जर्म या डस्ट का फोबिया
    निसंदेह धूल-मिट्टी और गंदगी से दूरी तो आपको एक सेहतमंद जीवन देती है। लेकिन कुछ लोग सफाई के इस कदर आदी हो जाते हैं कि उनके मन में धूल और कीटाणुओं को लेकर डर पैदा हो जाता है। इस तरह के डर को माइसोफोबिया कहते है। इस दौरान थोड़ी सी धूल होने पर रोगी को घबराहट, सांस लेने में दिक्कत, धड़कन बढ़ना, सीने में दर्द और कंपकंपी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
    Image Courtesy : umn.edu

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