हर मर्ज की दवा हैं ये 8 औषधीय पेड़

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 28, 2015

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पेड़ों से आक्सीजन मिलने के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बहुत सारी चीजें भी मिलती है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बहुत से ऐसे औषधीय पेड़ भी है जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत मददगार होते हैं।
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    औषधीय पेड़

    कुदरत की नियामत में एक से एक बेहतरीन चीजें उपलब्‍ध हैं। उन्‍हीं में से एक पेड़ भी है। पेड़ों का मानव जीवन में बहुत महत्‍व है। जन्म से लेकर मृत्यु के बाद तक मनुष्यों को विभिन्न कारणों से पेड़ों पर आश्रित रहना पड़ता है। पेड़ों से आक्सीजन मिलने के साथ रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लकड़ी भी मिलती है। लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि बहुत से ऐसे औषधीय पेड़ भी है जो आपके स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत मददगार होते हैं। आइए ऐसे ही कुछ औषधीय पेड़ों के बारे में जानकारी लेते हैं।  
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    कदम्ब का पेड़

    कदम्‍ब के पत्‍ते बड़े और मोटे होते हैं और इनसे गोंद निकलता है। इसके फूल छोटे और खुशबूदार होते हैं। कदम्‍ब के फलों का रस बच्चों में हाजमा ठीक करने के लिए बहुत ही फ़ायदेमंद होता है। और इसकी पत्तियों के रस को अल्सर तथा घाव ठीक करने के काम में प्रयोग किया जाता है। इसमें मौजूद इड्रोसिनकोनाइन और कैडेमबाइन नामक दो प्रकार के तत्‍व टाइप-2 डाइबिटीज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। इनमें से हाइड्रोसिनकोनाइन शरीर में बनने वाली इंसुलिन के उत्पादन को नियंत्रित करता है। और कैडेमबाइन इंसुलिन रीसेप्टर को फिर से इंसुलिन ग्रहण करने के प्रति संवेदनशील बनता है। इसके अलावा इसकी जड़ मूत्र रोगों में लाभकारी होती है और इसकी छाल को घिस कर आंखों के बाहर लगाने से कनजक्टीवाइटिस रोग ठीक हो जाता है।
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    नीम

    भारत में एक कहावत प्रचलित है, जिस धरती पर नीम के पेड़ होते हैं वहां बीमारियां और मृत्‍यु कैसे हो सकती है। भारत में इसके औषधीय गुणों के कारण हजारों वर्षों से इसका इस्‍तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन, अब अन्य देश भी इसके गुणों के प्रति जागरूक हो रहे हैं। हालां‍‍कि नीम स्वाभाव से कड़वा जरुर होता है, परन्तु इसके औषधीय गुण बड़े ही मीठे होते है। तभी तो नीम के बारे में कहा जाता है, कि एक नीम और सौ हकीम दोनों बराबर है। नीम सर्वरोगहारी गुणों से भरपूर होता है। इसका साबुन, एंटीसेप्टिक क्रीम, दातुन, मधुमेह नाशक चूर्ण, कॉस्मेटिक आदि के रूप में प्रयोग किया जाता है। नीम की छाल में ऐसे गुण होते हैं, जो दांतों और मसूढ़ों में लगने वाले तरह-तरह के बैक्टीरिया को पनपने से रोकते है, जिससे दांत स्वस्थ व मजबूत रहते हैं।
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    अशोक का पेड़

    अशोक का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर होता है। इसका इस्तेमाल कर आप कई प्रकार की बीमारियां से निजात पा सकते हैं। अशोक का रस कसैला, कड़वा, और इसकी प्रकृति ठंडी होती है। यह रंग निखारने वाला और सूजन दूर करने वाला होता है। इसके अलावा यह रक्त विकार, पेट के रोग, बुखार और जोड़ों के दर्द को दूर करने में बहुत लाभकारी होते हैं। अशोक का बीज पत्थरी की समस्या से आराम दिलाता है। अशोक की छाल के काढ़े में बराबर मात्रा में सरसों का तेल मिला कर फोड़े-फुंसियों पर लगाने से लाभ मिलता है। साथ ही अशोक के छाल और ब्राह्मी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला कर एक चम्मच की मात्रा में सुबह शाम एक कप दूध के साथ नियमित रुप से कुछ माह तक लेने से दिमाग तेज होने लगता है।
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    बबूल

    बबूल के पत्ते के साथ-साथ इसकी गोंद और छाल भी बहुत फायदेमंद होती है। इसकी गोंद में कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटेशियम होता है। और बबूल कफ और पित्त का नाश करने वाला होता है। इसके साथ ही बबूल के पेड़ की छाल और पत्तियों में टैनिन और गैलिक नामक एसिड होता है जिसके कारण इसका स्‍वाद कड़वा हो जाता है। यह जलन को दूर करने वाला, घाव को भरने वाला और रक्तशोधक होता है। इसकी फलियां कच्ची और लाभकारी होती हैं। इसलिए इसकी कच्ची फलियों को तोड़कर छाया में सुखाकर किसी डिब्बे में बंद कर सुरक्षित रखा जा सकता है। फलियां एक साल तक गुणकारी रहती हैं जबकि छाल दो साल तक लाभकारी रहती है।
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    पीपल

    पीपल का पेड़ न केवल एक पवित्र धार्मिक वृक्ष है बल्‍कि इसे स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उपयोगी माना जाता है। अब वैज्ञानिकों ने भी इस पेड़ को प्रकृति और आयुर्वेदिक दवाओं के लिए लाभकारी सिद्ध कर दिया है। यह विशाल पेड़ आपको 24 घंटे ऑक्सीजन प्रदान करता है इसलिये इसे औषधीय पेड़ों में से एक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार पीपल का हर भाग जैसे तना, पत्ते, छाल और फल चिकित्सा के काम आता हैं। इनसे कई गंभीर रोगों का भी इलाज संभव है। पीपल रक्त पित्त नाशक, रक्त शोधक, सुजन मिटाने वाला, शीतल और रंग निखारने वाला है। इसके पत्तों से निकलने वाले दूध को आंख में लगाने से आंख का दर्द ठीक हो जाता है। पीपल के ताजे पत्तों का रस नाक में टपकाने से नकसीर में आराम मिलता है। पीपल की छाल को घिसकर लगाने से फोड़े फुंसी और घाव और जलने से हुए घाव भी ठीक हो जाते है।
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    बरगद

    बरगद का पेड़ घना एवं फैला हुआ होता है। इसकी शाखाओं से जड़े निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाती हैं एंव स्तंभ बन जाती हैं। बरगद की जड़ों में एंटीऑक्सीडेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इसके इसी गुण के कारण वृद्धावस्था की ओर ले जाने वाले कारकों को दूर भगाया जा सकता है। बरगद की छाल का काढा बनाकर प्रतिदिन एक कप मात्रा में पीने से डायबिटीज में फायदा होता है व शरीर में बल बढ़ता है। पैरों की फटी पड़ी एड़ियों पर बरगद का दूध लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां सामान्य होने लगती हैं। इसके अलावा बरगद की ताजा कोमल पत्तियों को सुखा और पीसकर चूर्ण बनाकर, इस चूर्ण की लगभग 2 ग्राम मात्रा नियमित रूप से प्रतिदिन एक बार शहद के साथ लेने से याददाश्त बेहतर होने लगती है।
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    आंवला

    आंवला प्राकृति का ऐसा नायाब तोहफा है जिससे शरीर की कई सारी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। आंवले में आयरन, विटामिन सी और कैल्शियम भरपूर मात्रा में होने के कारण आंवले का जूस रोजाना लेने से पाचन दुरुस्त, त्वचा में चमक, त्वचा के रोगों में लाभ, बालों की चमक बढाने, बालों को सफेद होने से रोकने के अलावा और भी बहुत सारे फायदे मिलते हैं। आंवले के रस में संतरे के रस की तुलना में 20 गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। आंवले का सबसे बड़ा गुण यह है कि इसे पकाने के बाद भी इसमें मौजूद विटामिन सी खत्म नहीं होता। आंवले में क्रोमियम काफी मात्रा में होता है, जो डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद है। दरअसल, क्रोमियम इंसुलिन बनाने वाले सेल्स को एक्टिव करता है और इस हॉर्मोन का काम शरीर में ब्लड शुगर को कंट्रोल करना होता है। आंवला हमारी आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। आंवला हमारे पाचन तन्त्र और हमारी किडनी को स्वस्थ रखता है। यदि आपको भी अच्‍छी सेहत का मालिक बनना है तो आंवला का जूस अभी से ही पीना शुरु कर दें।
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    अर्जुन का पेड़

    अर्जुन की छाल में अनेक प्रकार के रासायनिक तत्व पाये जाते हैं। कैल्शियम-सोडियम की प्रचुरता के कारण यह हृदय की मांसपेशियों के लिए अधिक लाभकारी होता है। अर्जुन शीतल, हृदय के लिए हितकारी, स्वाद में कसैला, घाव, क्षय, विष, रक्तविकार, मोटापा, कफ तथा पित्त को नष्ट करता है। अर्जुन के पेड़ की छाल को हृदय रोगों के लिए अमृत माना जाता है। इससे हृदय की मांसपेशियों को बल मिलता है। जिससे हृदय की धड़कन ठीक होकर सामान्य होती है। इसके उपयोग से सूक्ष्म रक्तवाहिनियों का संकुचन होता है, जिससे रक्त, भार बढ़ता है। इससे रक्त वाहिनियों के द्वारा होने वाले रक्त का स्राव भी कम होता है, जिससे यह सूजन को दूर करता है। पेशाब की जलन तथा चर्म रोगों में इसका चूर्ण विशेष रूप से लाभकारी होता है। हड्डी टूटने पर इसकी छाल का स्वरस दूध के साथ रोगी को देने से सूजन व दर्द कम होता हैं तथा रोगी को जल्दी सामान्य होने में मदद मिलती है।
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