असल में मौजूद ही नहीं हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं

By:Gayatree Verma , Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 30, 2016

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कई बीमारियां ऐसी हैं जिनकी चर्चा हम करते हैं, लेकिन वास्‍तविक रूप में वे बीमारियां मौजूद ही नहीं हैं, इन बीमारियों के बारे में जानने के लिए इस स्‍लाइडशो को पढ़ें।
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    स्वास्थ्य समस्याएं और उनका सच

    इस दुनिया में ऐसी कई स्वास्थ्य समस्याएं हैं जिनके बारे में कम ही लोगों को पता होता है। लेकिन ऐसी कई काल्पनिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हैं जिनके बारे में सब लोगों को पता होता है लेकिन असल में वह मौजूद होती ही नहीं है। आज इन्हीं काल्पनिक बीमारियों के बारे में हम आपको बताने वाले हैं ताकि इनका डर आपके मन से निकल जाए।

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    स्टोमक फ्लू

    इस बीमारी में माना जाता है कि विशेष वायरस (इंफ्लुएंजा) श्वसन प्रणाली को क्षति पहुंचा देता है जिससे पेट दर्द होता है। इसमें शरीर का तापमान अचानक बढ़ जाता है और गले में दर्द देता है। इसे गैस्ट्रोएन्टराइटिस या सामान्य शब्दों में कहें तो पेट का संक्रमण कहते हैं। जबकि ये वायरस के कारण नहीं होता और ये कोई गंभीर बीमारी नहीं है। स्टोमक फ्लू जैसा कुछ नहीं होता। असल में पेट के संक्रमण की समस्या होती है जो बैक्टिरिया, पैरासाइट या वायरस किसी से भी हो सकती है। ये बाहर खाने और गंदगी की वजह से होती है जो साफ रहने के साथ ही दूर हो जाती है।

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    वॉकिंग निमोनिया

    निमोनिया के लक्षण इतनी ज्लदी नहीं पता चलते और वॉकिंग निमोनिया के लक्षण तो लास्ट स्टेज में ही पता चल पाते हैं। कई बार महीने से चली आ रही खांसी और लेजीनेस को डॉक्टर वॉकिंग निमोनिया के लक्षण बताते हैं और हॉस्पीटलाइज होने की हिदायत देते हैं। जबकि ये न्यूमोनिया के लक्षण नहीं है। इसमें केवल तीन दिन पूरी तरह से आराम लेने की जरूरत है। साथ ही एक जी-पेक औऱ गर्म खाना ले लें। आपकी सारी तबीयत ठीक हो जाएगी।

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    ग्लूटेन एलर्जी

    मैदे से बनी चीजें जैसे ब्रेड, केक आदि खाने के बाद कई लोग ग्लूटेन एलर्जी की शिकायत करते हैं। जबकि मेडिकली ग्लूटेन एलर्जी जैस कोई चीज नहीं होती। दरअसल ब्रेड खाने के बाद लोगों में लेजीनेस आ जाती है जिसका कारण लोग ब्रेड में मौजूद ग्लूटेन को मानते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। लेजीनेस एलर्जी की निशानी नहीं है, पेट अधिक भरने की निशानी है। सो कम ब्रेड खाएं।

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    नर्वस ब्रेकडाउन

    ये मेडिकली और जनरली बहुत लोकप्रिय शब्द है। लेकिन लोग इसे जितने सामान्य तरीके से बोल देते हैं ये उतना सामान्य भी नहीं है। मूड स्वींग होना, गुस्सा आना, डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर, आदि होने पर लोग कहते हैं कि नर्वस ब्रेकडाउन हो गया है। जबकि नर्वस ब्रेकडाउन होना मतलब तंत्रिका तंत्र का डैमेज होना। मतलब लाइफ खत्म होना।

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