भूलने की इन 4 बीमारियों का अल्‍जाइमर से नहीं है संबंध

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Dec 31, 2015

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अक्‍सर हम मेमोरी से जुड़ी समस्‍याओं को अल्‍जाइमर से संबंधित मानते हैं, लेकिन हमेशा भूलने की समस्‍या से जुड़ी बीमारियां अल्‍जाइमर नहीं होती। आइए ऐसी की कुछ समस्‍याओं के बारे में जानें जिसे अक्‍सर हम अल्‍जाइमर से जुड़ा मानते हैं, लेकिन असल में ऐसा है नहीं।
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    ये बीमारियां अल्‍जाइमर से नहीं है संबंधित

    अल्जाइमर एक ऐसी बीमारी हैं जिसमें व्‍यक्ति चीजों को भूलने लगता है। अल्जाइमर होने पर व्यक्ति की याददाश्त कम होने लगती हैं। वो सही समय पर ठीक से कोई निर्णय नहीं ले पाता। साथ ही  इस रोग से पीड़ित व्यक्ति को ना सिर्फ बोलने में दिक्कतें आती हैं बल्कि चीजें समझने में भी दिक्क्तें होने लगती हैं। अक्‍सर हम मेमोरी से जुड़ी समस्‍याओं को अल्‍जाइमर से संबंधित मानते हैं, लेकिन हमेशा याद्दाश्‍त की बीमारियां अल्‍जाइमर से जुड़ी नहीं होती। प्रीमेनोपॉज के हार्मोनल उतार-चढ़ाव और अन्‍य स्‍वास्‍थ्य समस्‍याएं को अल्‍जाइमर रोग के प्रारंभिक लक्षण समझना गलत हो सकता है। आइए ऐसी की कुछ समस्‍याओं के बारे में जानें जिसे अक्‍सर हम अल्‍जाइमर से जुड़ा मानते हैं, लेकिन असल में ऐसा है नहीं।

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    प्रीमेनोपॉज : हार्मोन का मस्तिष्क पर असर

    मेनोपॉज के दौरान महिला हार्मोन एस्‍ट्रोजन के स्‍तर में बहुत अधिक उतार-चढ़ाव होता हैं यानी वह बहुत तेजी से बढ़ता और गिरता है। इससे हॉट फ्लैशस और नींद में समस्‍याएं जैसे लक्षण दिखाई देते है, और इसे स्‍मृति हानि के लिए जिम्‍मेदार भी माना जाता है। लेकिन इसका संबंध अल्‍जाइमर रोग से नहीं होता है। सबसे महत्‍वपूर्ण बात, मेमोरी लॉस के इस तरह के अधिकांश मामले अस्‍थायी होते हैं और कुछ वर्षों के भीतर, हार्मोन के स्‍तर के ठीक होने पर लक्षण गायब हो जाते हैं।

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    तनाव: सोच और ध्यान का अपहरण

    बहुत ज्‍यादा तनाव सोच में गड़बड़ी कर, ध्‍यान देने में मुश्किलें पैदा करता है। यह नींद पर असर कर ब्रेन को ब्‍लॉक कर देता है जिससे यादों को व्‍यवस्थित करने और पुन प्राप्‍त करने में अधिक कठिनाई महूसस होती है। अगर तनाव अस्‍थायी होता है तो काम का तनाव कम होता है- और तब आपकी मॅमोरी और ब्रेन का काम दोबारा सामान्‍य हो जाता है। लेकिन बहुत अधिक तनाव होने पर, हालांकि हिप्पोकैम्पी क्षतिग्रस्‍त हो सकती है और अल्‍जाइमर रोग के विकास का जोखिम भी बढ़ जाता है। इसलिए तनाव से होने वाली भूलने की आदत अल्‍जाइमर रोग की तरह नहीं है लेकिन यह अंतत इसका नेतृत्‍व कर सकती है।

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    गर्भावस्था: बच्चे के मस्तिष्क पर असर

    नौ महीनों के दौरान गर्भवती के शरीर में होने वाले गंभीर हार्मोनल उतार-चढ़ाव उसकी मानसिक स्‍पष्‍टता को प्रभावित करता है। इसलिए गर्भवती इसे "प्रेग्‍नेंसी ब्रेन" कहती हैं। इस समय मित्रों और परिवार का झुकाव गर्भवती की मदद करता है। संयोग से, गर्भावस्था के दौरान अक्‍सर सबसे अधिक भूलने वाला पल बच्चे का जन्म ही होता है। हालांकि गर्भवती इससे जुड़ी होता है, लेकिन इससे जल्‍दी ही भूल जाती है और इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि डिलीवरी कितनी लंबी और मुश्किल थी और माताएं एक और बच्‍चे को जन्‍म देने के लिए इच्‍छुक हो जाती है।

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    कैंसर का इलाज: कीमो से ब्रेन पर असर

    कीमोथेरेपी या रेडिएशन हमारी समझ के बाहर, अल्‍जाइमर रोग के लक्षणों की तरह हमारे ब्रेन को प्रभावित करता है। इसे अक्‍सर कीमो ब्रेन के रूप में जाना जाता है। यह अभी तक स्‍पष्‍ट नहीं है कि ऐसा क्‍यों होता है, लेकिन इसे हम अल्‍जाइमर से जुड़ा मानते हैं। कुछ रोगियों में उपचार के बाद यह लक्षण पूरी तरह से दूर हो जाते है। जबकि कुछ में ये लक्षण बने रहते हैं।       
    Image Source : Getty

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