विटामिन जो आपको चाहिये भी और नहीं भी

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jun 20, 2014

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विटामिन की हमारे शरीर में क्या भूमिका होती है और इनका सेवन हमें क्यों करना चाहिए, ऐसी जानकारी का होना बहुत जरूरी है। ऐसे में विटामिन की कमी या अधिकता से होने वाले सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर से बचा जा सकता है।
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    जरूरी विटामिन

    शरीर को पुष्‍ट और सुडौल बनाने के लिए विटामिन अत्‍यंत आवश्‍यक होता है। विटामिन की कमी से आप कई बीमारियों का शिकार बन सकते हैं। इतना ही नहीं शरीर के सही विकास के लिए भी विटामिन बहुत आवश्‍यक है। इसके अलावा विटामिन शरीर के सभी अंगों को सुचारू रूप से चलाने में भी मदद करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, किस विटामिन की क्या भूमिका होती है और इनका सेवन हमें क्यों करना चाहिए, यह जानकारी प्रत्येक को होना बहुत जरूरी है। ऐसे में विटामिन की कमी से सेहत पर पड़ने वाले बुरे असर से बचा जा सकता है। image courtesy : getty images

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    विटामिन सी

    विटामिन सी शरीर के क्षतिग्रस्‍त टिश्‍यु के नवीनीकरण और विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। यह कोर्टिलेज, हड्डियों को नवीनीकृत, फ्री रेडिकल्स के नुकसान को कम करने और दांतों के लिए जरूरी है। इसके अलावा यह किसी भी चोट या घाव को जल्दी भरने के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्‍सीडेंट विभिन्‍न प्रकार की बीमारियों जैसे कैंसर, हृदय रोग व ऑर्थराइटिस के खतरे को कम करता है। और विषाक्त केमिकल्स से शरीर को होने वाले नुकसान को भी नियंत्रित करता है।image courtesy : getty images

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    विटामिन ए

    विटामिन ए दांतों, हड्डियों, त्वचा और कोमल टिश्यूज को स्‍वस्‍थ रखने के लिए बहुत जरूरी होता है। एक तरफ यह विटामिन आंखों की रोशनी बढ़ाने में कारगर होता है तो दूसरी तरफ यह गर्भवती और स्‍तनपान करने वाली महिलाओं के लिए भी बहुत जरूरी होता है। image courtesy : getty images

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    विटामिन ई

    विटामिन ई कोशिकाओं, ऊतकों व अंगों पर पड़ने वाले फ्री रेडिकल्‍स के बुरे असर को कम करता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। शरीर में अनेक अंगों जैसे मांसपेशियों और अन्‍य टिश्‍यु को सामान्‍य रूप से बनाये रखने में विटामिन ई मदद करता है। विटामिन ई की कमी से शरीर में कई रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है जैसे आंतों में घाव, गंजापनर, गाठिया, पीलिया, डायबिटीज, हृदय रोग। image courtesy : getty images

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    विटामिन डी

    विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के साथ ही रक्त में कैल्शियम व फास्फोरस के स्‍तर को बनाये रखने में मदद करता है। इसकी कमी से ऑस्टियोपोरोसिस और बच्चों में रीकेट्स का खतरा बढ़ जाता है। अमेरिका की ओरेगन हेल्थ एंड साइंस यूनिवर्सिटी के न्यूरोइम्यूनोलॉजी सेंटर में चेयरमैन डेनिस बोरडे के अनुसार, विटामिन डी स्केलरोसिस के खतरे को भी कम करता है। एक अन्‍य शोध के अनुसार, विटामिन-डी मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को सुचारु रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। image courtesy : getty images

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    विटामिन के

    विटामिन ‘के’ वसा में घुलनशील विटामिन है। विटामिन ‘के’ का कार्य रक्त जमने की प्रक्रिया में शामिल विभिन्न प्रोटीन, मिनरल और कैल्शियम को सक्रिय करना है। इससे हड्डियों की सेहत में सुधार होता है, धमनियों में कैल्शियम को जमने से रोकने में मदद करता है। यह बुढ़ापे को दूर रखने में भी सहायक होता है। कैल्शियम ‘के’ विटामिन ई की तरह अच्छे एंटीऑक्सीडेंट का काम भी करता है, जो फ्री रेडिकल्स को लिवर को नुकसान पहुंचाने से रोकता है। image courtesy : getty images

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    ज्‍यादा विटामिन लेने के नुकसान

    वो कहते हैं ना अति हर चीज की बुरी होती है। यह बात सब पर लागू होती है। यह तो हम जानते हैं कि विटामिन हमारे शरीर के लिए कितने फायदेमंद होते हैं। शरीर के सही प्रकार के काम करते रहने में इनकी महत्‍वपूर्ण भूमिका होती है। विटामिन ए आंखों के लिए जरूरी है, तो विटामिन डी हड्डियों और पुरुष स्पर्म की क्वालिटी सुधारने में मदद करता है। लेकिन, इनकी खुराक अगर जरूरत से ज्यादा हो जाए तो ‘लेने के देने’ पड़ सकते हैं। image courtesy : getty images

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    विटामिन-बी-6

    बी -6 और बी 12 सहित विटामिन बी, कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होते हैं, और इसकी कमी बहुत दुर्लभ होती हैं। लेकिन लंबे समय के लिए बी -6 की खुराक लेने आपके लिए हानिकारक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लोगों को बहुत अधिक मात्रा में भोजन से विटामिन बी-6 नहीं मिलता है। इसलिए वह इसकी कमी को सप्‍लीमेंट के माध्‍यम से पूरी करते हैं। लेकिन बहुत अधिक लंबे समय तक इसका सेवन करने से गंभीर तंत्रिका क्षति हो सकती है। जिसके कारण लोग शारीरिक गतिविधियों के नियंत्रण खो सकते हैं। image courtesy : getty images

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    विटामिन-डी

    विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा विटामिन डी लेने से शरीर के नाजुक ऊतकों जैसे हृदय/फेफड़ों में कैल्शियम को इकट्ठा होने के लिए प्रेरित करते है, जिससे इनकी कार्यप्रणाली बाधित होती है और किडनी स्टोन, उल्टी आने तथा मांसपेशियों के कमजोर होने जैसी समस्याएं होने लगती है। इसके अलावा एक सर्वे से पता चला है जिन लोगों के रक्त में विटामिन डी का स्तर सामान्य से ज्यादा होता है उनमें हृदयाघात का खतरा 2.8 फीसदी ज्यादा होता है। image courtesy : getty images

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    विटामिन ए और बीटा कैरोटीन

    विटामिन ए, सी और ई एंटी-ऑक्‍सीडेंट है जिन्‍हें कैंसर विरोधी गुणों के कारण जाना जाता है। लेकिन कई विशेषज्ञ इस बात को सही नहीं मानते। उदाहरण के लिए, नेशनल राष्ट्रीय कैंसर इंस्टिट्यूट के एक बड़े अध्‍ययन के अनुसार, धूम्रपान करने वाले जो विटामिन ए लेते हैं उनमें नहीं लेने वालों की तुलना में फेफड़ों के कैंसर होने की संभावना बहुत अधिक होती है। इसके अलावा विटामिन ए जरूरत से ज्यादा लेने पर अंधापन, हड्डी संबंधित रोग, बालों को झड़ना, त्वचा पर रुखापन और साथ ही वजन में भी कमी देखी जाती है। image courtesy : getty images

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    विटामिन-ई

    जो लोग विटामिन ई की कमी को पूरा करने के लिए सप्‍लीमेंट का सहारा लेते हैं, उन्‍हें बीपी और सिरदर्द की शिकायत रहती है। एक अध्‍ययन के अनुसार, कुछ लोग जो विटामिन ई की गोलियां लेते है उन्हें तीन-चार साल बाद सिर दर्द की समस्या हुई। इस विटामिन का अधिक सेवन आंखों की रोशनी पर भी असर डालता है। ‘अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन’ के अनुसार इसकी अधिकता जान का जोखिम बढ़ा सकती है, इसलिए डॉक्टर की सलाह से इसका सेवन करें। image courtesy : getty images

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