पाचन से जुड़े ये 7 मिथ

By:Pooja Sinha, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jan 22, 2015

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पाचन से जुडें कुछ बातों को जानना थोड़ा कठिन होता है। इसलिए हमारे मस्तिष्‍क में पाचन तंत्र को लेकर कई प्रकार के मिथ बने रहते हैं।
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    मिथ या तथ्य

    पेट की बात आने पर हमें सिर्फ पाचन तंत्र और उसके कामकाज के बारे में ही पता होता है। हमारे अनुसार पाचन का कार्य आहार को शरीर के लिए पोषक तत्‍वों में बदलना, और शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालना होता है। इस काम को करने के लिए पाचन क्रिया को शरीर के कई हिस्‍सों की जरूरत पड़ती है। इसमें मुख, पेट, आंत, लीवर और पित्ताशय की थैली के सहयोग की जरूरत होती है। हालांकि बर्लिंगटन में मेडिसिन वरमोंट कॉलेज के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और हेप्टोलोजी डिविजन के एमडी प्रोफेसर पीटर एल मूसा के अनुसार, पाचन से जुडें कुछ बातों को जानना थोड़ा कठिन होता है। इसलिए हमारे मस्तिष्‍क में पाचन तंत्र को लेकर कई प्रकार के मिथ बने रहते हैं। पेट से जुड़ें मिथ और तथ्‍य के बीच भेद को समझने के लिए आपको कुछ बातों की जानकारी होनी चाहिए।
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    पका भोजन पचाने में आसान

    हमारा मानना हैं कि पका भोजन पचाने में आसान होता है। लेकिन यह मिथ हैं। मूसा के अनुसार, पाचन मैक्रो अणुओं को माइक्रो अणुओं में बदलकर पोषण, कैलोरी, विटामिन और मिनरल प्राप्‍त करने में सक्षम बनाने की प्रक्रिया है।
    पाचन तथ्य : आपको पाचन तंत्र इसका गुरू है, फिर चाहे आप उसे कच्‍चे खाने की आपूर्ति करें या पका हुये। पके खाने से कभी-कभी पोषक तत्‍व आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन जरूरत से ज्‍यादा पकाने से पोषण तत्‍व नष्‍ट हो जाते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों में पोषक तत्‍वों को सं‍रक्षित रखने के लिए खाना पकाने की सही विधि का पालन करें।
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    बेहतर होता है अधिक फाइबर

    कहते हैं न कि अति हर चीज की बुरी होती है। यही बात फाइबर पर भी लागू होती है। विशेषज्ञ प्रतिदिन लगभग 25 ग्राम फाइबर की सलाह देते हैं, लेकिन इस लक्ष्‍य तक नहीं पहुंच पाने पर आपको कम या ज्‍यादा लेने की क्‍या जरूरत है? नहीं! यह बहुत है, मूसा कहते है। अगर आपको पाचन तंत्र जैसी समस्‍या जैसे इर्रिटेबल बॉउल सिंड्रोम (IBS) की समस्‍या है तो आपको फाइबर के प्रकार पर ध्‍यान देना चाहिए। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित, IBS से ग्रस्‍त 275 मरीजों पर किये शोध से पता चला है कि IBS के लक्षण को कम करने के लिए अघुलनशील फाइबर जैसे ब्रान की बजाय इसबगोल जैसे घुलनशील फाइबर को लेना चाहिए।    
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    भोजन के साथ अधिक मात्रा में पानी का सेवन

    स्‍वयं को पूरा दिन अच्‍छी तरह से हाइड्रेटेड रखने के लिए, पाचन की मदद के लिए खाने के साथ पानी पीने की जरूरत नहीं होती है। वास्‍तव में, मूसा कहते हैं कि एसिड रिफ्लेक्‍स की समस्‍या से ग्रस्‍त लोगों को लक्षणों को बेहतर बनाने के लिए आहार के समय पेय पदार्थ नहीं लेने चाहिए। इसके अलावा, डाइटिंग करने वाले लोगों को खाने में कैलोरी की खपत में कटौती करने के लिए खाने से पहले पानी पीना चाहिए। इसलिए ऐसे उपाय का अपनाये जो आपके लिए काम करते हैं और इस पाचन मिथ की उपेक्षा करें।
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    अल्सर की वजह है तनाव

    अक्सर लोग ऐसा मानते हैं कि अधिक तनाव वाले व्यक्ति को अल्सर होने की आशंका सबसे अधिक होती है, लेकिन यह बात सही नहीं है। क्‍योंकि तनाव से अल्‍सर नहीं होता बल्कि हेलिकोबैक्टेर पाइलोरी नामक बैक्टीरिया से होता है जो पेट और आंतों में जलन पैदा करता है। हो सकता है तनाव से पेट में गड़बड़ी हो लेकिन इसे अल्सर की वजह नहीं माना जा सकता है। लेकिन घबराइये नहीं क्‍योंकि एच पाइलोरी को भी एंटीबायोटिक दवाओं के साथ इलाज किया जा सकता है।
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    मीट को पचाने में अधिक समय का लगना

    माना जाता है कि सब्जियों की तुलना में मीट पेट में अधिक समय तक रहता है। यानी मीट को पचाने में शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ऐसा इसलिए होता है क्‍योंकि मीट में सब्जियों की तुलना में हैवी और फैट से भरपूर होता हैं। हालांकि फैट पाचन प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, लेकिन सब्जियों और मीट दोनों को ही पाचन तंत्र के माध्‍यम से गुजरने में लगभग एक जैसा ही समय लगता है। हालांकि कुछ पाचन संबंधी समस्‍या या फूड एलर्जी के कारण समस्‍या हो सकती है।
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    खाली पेट सोना चाहिए

    यह तथ्‍य बिल्‍कुल भी सही नहीं है। हालांकि वजन प्रबंधन के दौरान आपको दिन भर में ली जाने वाली कैलोरी को ध्‍यान में रखना पड़ता है। और एसिड रिफ्लेक्‍स की समस्‍या के दौरान लक्षणों को कम करने के लिए सोने से कम से दो से तीन घंटे पहले खाना खा लेना एक अच्‍छा विचार है। लेकिन खाली पेट सोना बिल्‍कुल भी सही नहीं है। मूसा के पाचन संबंधी तथ्‍य के अनुसार, सोने से पहले खाना खाने से बुरे सपने परेशान नहीं करते।
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    प्रोबायोटिक्स का ढेर

    प्रोबायोटिक्स में मौजूद अनुकूल बैक्टीरिया स्वाभाविक रूप से कुछ खाद्य पदार्थों और हमारे पेट में भी पाए जाते हैं। ’अच्छे बैक्टीरिया’ अथवा ’उपयोगी बैक्टीरिया’ कहे जाने वाले प्रोबायोटिक्स सूक्ष्मजीवी होते हैं और हमारे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। लेकिन यह जरूरी नहीं कि सभी प्रकार के बैक्‍टीरिया इतने ही लाभकारी हो। दही में शामिल प्रोबायोटिक्स पेट के लिए अच्‍छा होता है। लेकिन पाचन के सही तथ्‍यों को पहचाने। और बाजार में मिलने वाले अनेक प्रोबायोटिक्स उत्‍पादों के लेबल की अच्‍छे से जांच कर लें।
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