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अपनी ऊर्जा को कैसे बढ़ायें

By:Bharat Malhotra, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 29, 2014
सबके भीतर ऊर्जा समाहित होती है, यदि हम उस ऊर्जा का सही प्रयोग करें जीवन सही दिशा में चलने लगता है, लेकिन, सवाल यही है कि आखिर हम अपनी ऊर्जा को कैसे बढ़ा सकते हैं।
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    ऊर्जा को कैसे बढ़ायें

    हम सबके भीतर ऊर्जा समाहित होती है। यदि हम उस ऊर्जा का सही इस्‍तेमाल कर सकें तो हमारा जीवन सही दिशा में चलने लगता है। लेकिन, सवाल यही है कि आखिर हम अपनी ऊर्जा को कैसे बढ़ा सकते हैं।
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    ऊर्जा को कैसे बढ़ायें
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    अपनी प्रतिभा को निखारें

    अपनी प्रतिभा को पहचानें तथा उसे निखारने का काम करें। हमारी प्रतिभा अलग होती है जो हमें एक नये रास्‍ते पर ले जाती है। अपने जुनून का पीछा करें और जल्‍द ही आपको अपने सही मुकाम का अंदाजा हो जाएगा।

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    अपनी प्रतिभा को निखारें
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    बिखराव को सुधारें

    अनसुलझी समस्‍यायें हमें भावनात्‍मक और मानसिक रूप से परेशान करती हैं। ऐसी परेशानियों का ढंग से सामना करें और उन्‍हें खत्‍म करके ही चैन लें। इसके साथ ही भविष्‍य की समस्‍याओं को भी नजरअंदाज न करें। अगर जख्‍म का समय रहते इलाज न किया जाए तो वह नासूर बन जाता है। याद रखिये समस्‍याओं को दबाने से वे भविष्‍य में फिर सामने आ जाती हैं। तो समस्‍यओं का सामना करना उनसे छुपने की अपेक्षा बेहतर रहता है।

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    बिखराव को सुधारें
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    रिश्‍ते का सम्‍मान करें

    रिश्‍तों में एक दूसरे पर आरोप लगाना बंद करें। इससे कुछ हासिल होने वाला नही है। इससे बेहतर है कि आप अपने रिश्‍ते की समस्‍याओं को समझें। रिश्‍ते में अपनी गलतियों को स्‍वीकार करें। अपनी नाकामी को मानें। और इसके बाद जो गलत हुआ है उसे सुधारने का प्रयास करें। याद रखें सुधार करने के लिए जरूरी है कि पहले आप उन भूलों को स्‍वीकार करें जो आपसे हुई हैं। किसी से कुछ उम्‍मीद रखने से अच्‍छा है कि आप खुद रिश्‍ते को बेहतर बनाने का प्रयास करें।

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    रिश्‍ते का सम्‍मान करें
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    जाने देना है बेहतर

    हर रिश्‍ता अपने मनचाहे मुकाम तक नहीं पहुंचता। कई बार चाहकर भी आप दोनों साथ चल पाते। किस्‍मत से आपके रास्‍ते जुदा हो जाते हैं। और ऐसे में जबरन किसी के साथ चलने या उसे अपने साथ चलाने से बेहतर है कि आप उसे जाने दें। कहते हैं ना, 'चाहते हैं जिसे मुक्‍त कर दें उसे, मोहब्‍बत का तकाजा यही है। वो आएगा और आएगा जरूर, न आए तो समझो तुम्‍हारा नहीं है।

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    जाने देना है बेहतर
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    बेकार के जुड़ाव

    जीवन में आगे बढ़ने के लिए पीछे की कुछ चीजों को छोड़ना बेहतर होता है। यदि हम जीवन में अपने साथ बेकार की चीजें जमा करते रहेंगे तो अपने भविष्‍य को मुश्किल बनाते जाएंगे। इससे हमारा जीवन दुष्‍कर हो जाता है। जो चीजें आपके काम की नहीं हैं उनमें दिल और दिमाग उलझाये रखना वास्‍तव में ऊर्जा का नुकसान करना ही है। स्‍वयं को इन बेकार के झंझटों से मुक्‍त कीजिये।

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    बेकार के जुड़ाव
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    अपने भीतर की बुराइयों से लड़ें

    हर इनसान गलती करता है और उसे अपने कुछ पुराने फैसलों पर पछतावा होता है। अपनी कमियों को पहचानना और उन्‍हें सुधारने में कोई बुराई नहीं। इससे हमारी समझदारी पर सवाल नहीं खड़े होते। आपको अपने गलत फैसलों से सीखना चाहिये। ये सीख आपको भविष्‍य में काफी कुछ सिखा सकती है। इनसे सीखकर आप बेहतर इनसान बनते हैं। गलत कामों को स्‍वीकार न करना कहीं न कहीं शर्म से जुड़ा मसला हो सकता है। और ऐसा करके आप खुद के साथ न्‍याय नहीं करते।

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    अपने भीतर की बुराइयों से लड़ें
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    बदलाव को स्‍वीकार करें

    डर और सावधानी के बीच एक महीन रेखा होती है। हम अध्‍यात्म के मार्ग पर लगातार बढ़ते रहते हैं। इनसान एक ही स्‍थान पर लंबे समय तक रुके रहने के लिए नहीं बना है। हां, कई बार बदलाव डरावना हो सकता है, लेकिन बदलाव प्रकृति का नियम है। और इसी से आपको काफी कुछ सीखने को मिलता है। तो आखिर इसे क्‍यों न स्‍वीकार किया जाए। जब हम परिवर्तन की राह में बाधा उत्‍पन्‍न करते हैं, तो हम जीवन की राह में बाधक बनते हैं।

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    बदलाव को स्‍वीकार करें
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    देरी को स्‍वीकार करें

    कई बार आपको इंतजार करना पड़ता है। असंयम और चिढ़चिढ़ापन हालात को बेहतर नहीं बना सकते। कई बार मनचाहे बदलाव के लिए कुछ वक्‍त लगता है। आपको लगता है कि आपको फौरन एक काम करना चाहिये। लेकिन, रुकें और हालात का जायजा लें। हो सकता है कि हालात ही आपको इंतजार करवाना चाहते हों। बस स्‍टॉप पर कुछ देर और बैठने में कोई बुराई नहीं। आखिर में बस आनी ही है। यानी हालात बदलने ही हैं, लेकिन अति अधीरता अच्‍छी नहीं।

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    देरी को स्‍वीकार करें
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    आत्‍मसम्‍मान है जरूरी

    क्‍या आप अपना खयाल रख रहे हैं। आपका शरीर ही आपकी पूंजी है। और आप इसी को खर्च कर जीवन बिता रहे हैं। तो अगर आप व्‍यायाम और आहार के जरिये अपने शरीर को फिट रखेंगे तो इससे आपको आपको काफी फायदा होगा। अपना खयाल रखें, बीमारी का खयाल रखें, सही आहार और व्‍यायाम का सहारा लें।

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    आत्‍मसम्‍मान है जरूरी
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    मौत और बीमारी

    शारीरिक जीवन वह तोहफा है जो कई अनुभवों के साथ आता है। बीमारी से पीडि़त होना भी अनुभवों का पिटारा है। हालांकि शरीर की अपनी एक्‍सपायरी डेट होती है, लेकिन हमारी ऊर्जा कभी खत्‍म नहीं होती। तो, आपको चाहिये कि अपने जीवन और अपनी ऊर्जा का ऐसे इस्‍तेमाल करें कि आपके जाने के बाद भी लोग आपको याद रखें।

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