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स्ट्रेच मार्क्स के इन 10 मिथक को करें नजरअंदाज

By:Meera Roy, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Jul 13, 2015
स्ट्रेच मार्क्स त्वचा में हल्की सफेद धारियों को कहा जाता है जो कि सामान्यतः त्वचा में खिचाव के कारण होते हैं, इससे जुड़े कई मिथक हैं, जिनको आप सच मानते हैं, आइए हम उन मिथकों से पर्दा हटाते हैं।
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    स्‍ट्रेच मार्क से जुड़े मिथक

    स्ट्रेच मार्क्स त्वचा में हल्की सफेद धारियों को कहा जाता है जो कि सामान्यतः त्वचा में खिचाव के कारण होते हैं। आमातौर पर स्ट्रेच मार्क्स गर्भावस्था, किशोरावस्था में देखने को मिलते हैं। इसके अलावा अचानक वजन घटने या बढ़ने से भी शरीर के विभिन्न भागों में स्ट्रेच मार्क्स दिखने लगते हैं। कहने योग्य बात यह है कि स्ट्रेच मार्क्स से असंख्य मिथ जुड़े हुए हैं। इन भ्रमों से पार पाना है तो आइये तथ्यों को जानें।

    स्‍ट्रेच मार्क से जुड़े मिथक
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    मिथ- स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ महिलाओं में होते हैं।

    तथ्य - हालांकि यह सच है कि 90 फीसदी गर्भवति महिलाओं में स्ट्रेच मार्क्स होते हैं। सामान्यतः स्ट्रेच मार्क्स छठे या सातवें महीने से दिखने लगते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि स्ट्रेच मार्क्स को सिर्फ महिलाओं से जोड़ा जाए। पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं। त्वचा में हुए अचानक बदलाव के चलते स्ट्रेच माक्र्स होते हैं। अचानक वजन बढ़ना या घटना इसकी बड़ी वजह है जो कि पुरुषों में भी समान रूप में दिखते हैं।

    मिथ- स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ महिलाओं में होते हैं।
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    मिथ - त्वचा के खिंचाव से ही स्ट्रेच मार्क्स पड़ते हैं।

    तथ्य - यह सोचना निरानिर बेवकूफी है कि सिर्फ त्वचा में हुए खिचाव के कारण ही स्ट्रेच मार्क्स होते हैं। विशेषज्ञों की मानें त्वचा की मुख्य रूप से तीन परते होती हैं। सामान्यतः स्ट्रेच मार्क्स मिडल परत डर्मिस पर पड़ती है। हारमोनल वजहों के चलते भी स्ट्रेच मार्क्स होते हैं।

    मिथ - त्वचा के खिंचाव से ही स्ट्रेच मार्क्स पड़ते हैं।
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    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ पेट में ही होते हैं।

    तथ्य - यह सोचना बेवकूफी से कम नहीं है कि स्ट्रेच माक्र्स सिर्फ पेट में ही होते हैं। जबकि गर्भावस्था में साफ पता चलता है कि स्ट्रेच माक्र्स वक्ष, जांघ, नितंब, घुटने, कोहनी आदि जगहों में भी दिखाई देते हैं।

    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स सिर्फ पेट में ही होते हैं।
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    मिथ - वजन कम करने से स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा मिल सकता है।

    तथ्य - हालांकि मोटापा स्ट्रेच मार्क्स की एक बड़ी वजह है। लेकिन मोटापा कम होने से स्ट्रेच मार्क्स भी चले जाएं, यह जरूरी नहीं है क्योंकि स्ट्रेच मार्क्स त्वचा की मिडल परत डर्मिस पर पड़ते हैं। शुरुआती स्तर के स्ट्रेच मार्क्स से लड़ने के लिए वजन कम करने की बजाय एक्सरसाइज पर ध्यान दें। संभवतः इसमें कुछ कमी नजर आए।

    मिथ - वजन कम करने से स्ट्रेच मार्क्स से छुटकारा मिल सकता है।
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    मिथ - पतले लोगों में स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते।

    तथ्य - यह सच नहीं है क्योंकि स्ट्रेच मार्क्स अकसर हारमोनल और आनुवांशिक कारणों से होते हैं। मसलन किशोरावस्था के पूर्व और किशोरावस्था में स्ट्रेच मार्क्स मोटापे के चलते नहीं वरन हारमोन सम्बंधी बदलाव के चलते होते हैं। कुछ बीमारियों में भी स्ट्रेच मार्क्स हो सकते हैं जैसे मार्फन सिंड्रोम, कशिंग सिंड्रोम आदि।

    मिथ - पतले लोगों में स्ट्रेच मार्क्स नहीं होते।
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    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स के रंग नहीं बदलते।

    तथ्य - शुरुआती स्तर पर स्ट्रेच मार्क्स लाल, गुलाबी या रेडिश ब्राउन रंग में नजर आते हैं। यह वास्तव में रक्त वाहिकों के रंग होते हैं जिन्हें देख यह पता चलता है कि त्वचा की मिडल परत यानी डर्मिस में खिचाव बढ़ गया है या ये क्षतिग्रस्त हो रही हैं। जैसे जैसे रक्त वाहिकाएं सिकुड़ रही होती हैं, उनका रंग लाल से सफेद की ओर उन्मुख होने लगता है। समय के साथ इस रंग में कुछ फीकापन आ सकता है। इन सबके इतर स्ट्रेच मार्क्स का रंग आपकी स्किन टोन पर भी निर्भर करता है।

    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स के रंग नहीं बदलते।
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    मिथ - टैनिंग से स्ट्रेच मार्क्स हटते हैं।

    तथ्य - ध्यान रखें कि टैनिंग करने से स्ट्रेच माक्र्स हटते नहीं है। टैनिंग स्ट्रेच माक्र्स को सिर्फ ढकने का काम करते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो कई बार टैनिंग स्ट्रेच माक्र्स की स्थिति को और भी भयावह बना देते हैं। रूपहले सफेद रंग के स्ट्रेच माक्र्स और भी गाढ़े रंग के नजर आने लगते हैं। बेहतर है कि स्ट्रेच माक्र्स माक्र्स के लिए टैनिंग के विकल्प को न चुनें।

    मिथ - टैनिंग से स्ट्रेच मार्क्स हटते हैं।
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    मिथ - सर्जरी से स्ट्रेच मार्क्‍स खत्म हो जाते हैं।

    तथ्य - चाहे आप लेजर सर्जरी करा रहे हों और कोई ट्रीटमेंट ले रहे हों। चाहे बहुत महंगे हों या बहुत सस्ते। इस बात को ज़हन में उतार लें कि स्ट्रेच मार्क्स किसी भी तरीके से पूरी तरह खत्म नहीं हो सकते। हां, इसमें कुछ कमतरी का एहसास हो सकता है। निचले उदर में स्ट्रेच मार्क्स के पूरी तरह खत्म होने की काफी संभावना बनी रहती है।

    मिथ - सर्जरी से स्ट्रेच मार्क्‍स खत्म हो जाते हैं।
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    मिथ - ज्यादा पानी पीने से स्ट्रेच मार्क्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

    तथ्य - पानी शरीर के लिए हमेशा लाभकर होता है। स्ट्रेच मार्क्स के सम्बंध में भी यह कहा जा सकता है। विशेषज्ञों की मानें तो ज्यादा पानी पीना त्वचा के लिए फायदेमंद होता है। इससे त्वचा में लचीलापन बरकरार रहता है।

    मिथ - ज्यादा पानी पीने से स्ट्रेच मार्क्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
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    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स के लिए कोई संतुलित आहार नहीं है।

    तथ्य - चाहे बात शारीरिक समस्याओं की हो या सौंदर्य सम्बंधी समस्याओं की। हर स्थिति में संतुलित आहार हमारे लिए फायदेमंद ही साबित होते हैं। प्रोटीन, जि़ंक और विटामिन सी युक्त पौष्टिक आहार के जरिये त्वचा को बेहतर बनाया जा सकता है।

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    मिथ - स्ट्रेच मार्क्स के लिए कोई संतुलित आहार नहीं है।
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