खराब मूड से जुड़े कुछ फायदे और नुकसान

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Nov 10, 2014

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आपको जानकर शायद थोड़ा आश्चर्य हो, लेकिन नकारात्मक मूड के भी कुछ फायदे हो सकते हैं, जबकि क्रोनिक मूडीनेस अर्थात पुराना चिड़चिड़ापन स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है।
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    खराब मूड हो सकता है फायदेमंद

    अकसर खराब मूड को बुरा माना जाता है। लेकिन, ऐसा नहीं है। खराब मूड के भी कुछ फायदे हो सकते हैं। हां, क्रोनिक मूडीनेस अर्थात पुराना चिड़चिड़ापन जरूर सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। नकारात्मक मूड आपको अधिक प्रेरित भी कर सकता है। यह उन लोगों के लिए एक प्रेरणादायी खबर हो सकती है जो मानते हैं कि खराब दिन और खराब मूड आपके जीवन को खराब कर सकता है।
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    फायदे भी, नुकसान भी

    सभी का मूड कभी न कभी खराब होता है। ऐसा कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है। किसी को मौसम नहीं सुहाता, तो कोई काम के अत्‍यधिक दबाव से परेशान होता है। लेकिन कई शोध इस बात की पुष्टि‍ करते नज़र आते हैं कि खराब मूड के भी कई लाभ हो सकते हैं। वहीं दूसरी ओर, लगातार मूड का खराब रहना कई गंभीर स्थितियों, जैसे डिप्रशन व मूड डिसार्डर आजि का कारण बन सकता है। तो इसके फायदे भी हैं और नुकसान भी। तो ऐसा कतई न समझें कि खराब मूड करना लाभ देगा।
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    याद्दाश्त बढ़ाए

    दी जर्नल ऑफ़ एक्सपेरिमेंटल सोशल साइकोलॉजी में 2009 में छपे एक शोध के अनुसार खराब मूड वाले लोगों की चीजों को याद रखने की क्षमता अच्छे मूड वाले लोगों की तुलना में बेहतर होती है। इस शोध में ठंड व बरसात के मौसम के कारण खराब मूड वाले दुकानदारों की तुलना में खि‍ली धूप व अच्छे मौसम के कारण बेहतर मूड वाले दुकानदारों से की। जिससे यह परिणाम निकलकर आए।
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    बेहतर निर्णय लेने की क्षमता

    एक अन्य शोध के अनुसार नकारात्मक मूड में सामाजिक परिस्थितियों में निर्णय लेने की क्षमता बेहतर हो जाती है। शोधकर्ताओं ने कुछ व्यक्तियों को लोगों का एक ऐसा वीडियो टेप दिखाया जिसमें सच्चे और बेईमान दोनों तरह के लोग थे जिन पर चोरी का आरोप लगाया गया था। जिससे यह परिणाम सामने आए।
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    अधिक प्रेरित इंसान

    2007 में हुए एक शोध में पाया गया कि नेगेटिव मूड वाले लोगों में सामान्य मूड वाले लोगों की तुलना में मुश्किल कामों के साथ ज्यादा समय तक जुड़े रहते हैं, तथा उनमें  और आत्म-बाधा या एक आत्म प्रासंगिक कार्य पर विफलता की आशा कम होती है।  
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    अवसाद और खराब मूड दो अलग चीजें

    सबसे पहले तो ये समझना जरूरी है कि खराब मूड और अवसाद के बीच एक बड़ा अंतर है। अवसाद उदासी और निराशा की कठोर भावनाओं के साथ जुड़ा होता है। साथ ही यह आपके दैनिक जीवन में किसी प्रकार के हस्तक्षेप या नींद और खाने के पैटर्न में परिवर्तन से संबंधित होता है। जबकि खराब मूड के लक्षण इतने गंभीर नहीं होते, और थोड़े ही समय में दूर भी हो जाते हैं।
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    मधुमेह पर बुरा प्रभाव

    2013 में एनल्स ऑफ फैमिली मेडिसिन में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मधुमेह से पीड़ि‍त वे लोग जिन्हें अवसाद भी होता है, उन्हें एक गंभीर निम्न रक्त शर्करा प्रकरण होने की आशंका 40 प्रतिशत अधिक होती है। जिसके कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ सकता है।
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    सूजन और हृदय को जोखिम

    कुछ शोध इस बात का खुलासा करते हैं कि यदि आप काफी समय से डिप्रेशन का शिकार हैं तो शरीर में प्रणालीगत सूजन हो सकती है। जोकि मस्तिष्क पर भी असर डाल सकता है। हालांकि अवसाद और सूजन के बीच संबंध तथा संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया का अध्ययन अभी भी किया जा रहा है। वहीं लंबे समय से चला आ रहा तनाव तथा अवसाद कार्डियोवेस्कुलर समस्याओं का कारण बन सकता है।
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