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खिचड़ी के 7 आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ

By:Rahul Sharma, Onlymyhealth Editorial Team,Date:Mar 27, 2015
खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। साथ ही इसकाधार्मिक महत्व भी है और उत्तर भारत में मकरसंक्रान्ति के पर्व पर मूंग दाल की खिचड़ी बनाई जाती है।
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    खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभ

    यूं तो खिचड़ी को कई प्रकार से बनाया जा सकता है, लेकिन मूंग दाल की खिचड़ी एक प्रचलित व बेहद पौष्टिक डिश होती है। इसे बहुत ही आसानी से और कम समय में बनाया जाता है। स्वाद ही नहीं खिचड़ी सेहत के गुणों से भी भरपूर होती है। इसलिये जब कोई बीमार हो जाता है तो डॉक्टर भी उसे सुपाच्य मूग दाल की खिचड़ी खाने की ही सलाह देते हैं। खिचड़ी पौष्टिक होने के साथ साथ बहुत ही हल्की और आसानी से पचने वाली डिश होती है। साथ ही इसकाधार्मिक महत्व भी है और उत्तर भारत में मकरसंक्रान्ति के पर्व पर मूंग दाल की खिचड़ी बनाई जाती है। तो चलिये जानते हैं खिचड़ी के सात आश्चर्यजनक स्वास्थ्य लाभ।
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    खिचड़ी के स्वास्थ्य लाभ
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    पोषण से भरी

    खिचड़ी एक पौष्टिक भोजन है, जिसमें पोषक तत्वों का सही संतुलन होता है। चावल, दाल और घी का संयोजन आपको कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और पोटेशियम प्रदान करता है। कई लोगों इसके पोषण मूल्य को बढ़ाने के लिए इसमें सब्जियां भी मिला देते हैं।
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    पोषण से भरी
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    पचाने में आसान (सुपाच्य)

    खिचड़ी पेट और आंतों को स्मूथ बनाती है। सुपाच्य और हल्की होने की वजह से ही बीमारी में खिचड़ी खाने की सलाह दी जाती है। इसके सेवन से विषाक्त भी साफ होते हैं। नरम और पौष्टिक होने की वजह से यह बच्चों और बुजुर्ग दोनों के लिये बेहतर भोजन है।
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    पचाने में आसान (सुपाच्य)
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    त्रिदोषिक आहार (Tridoshic food)

    खिचड़ी आयुर्वेदिक आहार का एक मुख्य भोजन है, क्योंकि इसमें तीन दोषों, वत्ता, पित्त और कफ को संतुलित करने की क्षमता होती है। यह क्षमता ही खिचड़ी को त्रिदोषिक आहार बनाती है। शरीर को शांत व डीटॉक्सीफाई करने के अलावा खिचड़ी की सामग्री में ऊर्जा, प्रतिरक्षा और पाचन में सुधार करने के लिए आवश्यक बुनियादी तत्वों का सही संतुलन होता है।
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    त्रिदोषिक आहार (Tridoshic food)
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    ग्लूटेन मुक्त आहार

    ग्लूटेन अर्थात लस से परहेज कर रहे लोगों के लिये भी खिचड़ी एक बेहद फायदेमंद आहार विकल्प होती है। इसमें मौजूद दालों, सब्जियों व चावल में ग्लूटेन नहीं होता है और सभी लोग इसका निश्चिंत होकर सेवन कर सकते हैं।
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    ग्लूटेन मुक्त आहार
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    साधना और दीप आंतरिक शांति

    सुपाच्य भोजन होने के नाते खिचड़ी फैट व आलस्य नहीं पैदा कतरती है। यही कारण है कि धार्मिक लोगों व मौंक्स का खिचड़ी प्रमुख आहार होता है। पर्याप्त प्रोटीन देने के साथ रक्त में शर्करा की स्थिरता बनाए रखने में सहायक खिचड़ी मन की शांति और शांति की भावनाओं को सुविधाजनक बनाने में मदद करती है।
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    साधना और दीप आंतरिक शांति
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    कॉम्बिनेशन में बनाएं

    प्रोटीन से भरी दाल में एक प्रकार का अमिनो एसिड नहीं होता इसलिए केवल दाल का सेवन न कर दाल-चावल या खिचड़ी के रूप में खाएं। खिचड़ी कॉम्बिनेशन में सेवन करने से यह कम्प्लीट प्रोटीन बन जाता है।
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    कॉम्बिनेशन में बनाएं
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    धार्मिक महत्व

    खिचड़ी बनने की परंपरा को भगवान शिव का अंश माने जाने वाले बाबा गोरखनाथ ने शुरू किया। माना जाता है कि खिलजी के आक्रमण के समय नाथ योगियों को संघर्ष के कारण भोजन बनाने का समय नहीं मिल पाता था। इससे योगी अक्सर भूखे रह जाते और कमज़ोर होते जा रहे थे। इस समस्या का समाधानबाबा गोरखनाथ ने दाल, चावल और सब्जी को एक साथ पका कर निकाला। यह व्यंजन काफी पौष्टिक और स्वादिष्ट था। इससे शरीर को तुरंत उर्जा मिलती। और फिर बाबा गोरखनाथ ने इस व्यंजन का नाम खिचड़ी रखा।
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     धार्मिक महत्व
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